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Fatehpur News: बारिश में मानक से अधिक दूर पढ़ने जाएंगे नौनिहाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। नौनिहालों को बारिश के मौसम में मानक से अधिक दूर स्थित स्कूल में पढ़ने जाना पड़ेगा। पीडब्ल्यूडी की लापरवाही के कारण अभी तक ढहाए गए जर्जर स्कूल भवनों के स्थान पर नए भवनों का निर्माण नहीं हो सका है। अब डीएम ने भवन निर्माण की जिम्मेदारी आरईएस को सौंपी है।
प्राइमरी स्कूल का मानक एक किलोमीटर और उच्च प्राथमिक स्कूल की डेढ़ किलोमीटर है। स्कूलों के मामले में जिला संतृप्त की श्रेणी में अंकित है। 2021-22 में जिले के 96 परिषदीय स्कूल कंडम घोषित कर ढहा दिए गए थे। उनके निर्माण के लिए शासन से बजट भी आवंटित हुआ। भवन निर्माण की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को नवंबर 2022 में मिली थी। कार्यदायी संस्था ने बजट लेने के बावजूद भवनों के निर्माण की प्रक्रिया तक शुरू नहीं कराई। मार्च में पीडब्ल्यूडी ने यह कहकर बजट वापस कर दिया कि दूर स्थित स्कूल भवनों का निर्माण करा पाना उनके लिए संभव नहीं है। मार्च में बजट वापस मिलने के बाद बीएसए ने डीएम के आदेश पर स्कूल निर्माण का बजट आरईएस को आवंटित किया है। अभी इन भवनों का निर्माण प्रारंभ नहीं है। ऐसी हालत में इस बारिश के मौसम में नौनिहालों को मानक से अधिक दूर स्थित नजदीकी स्कूलों में पढ़ने जाना होगा।
बीएसए संजय कुमार कुशवाहा का कहना है कि एक-एक गांव में कई स्कूल संचालित हैं। ऐसे में बच्चों को अधिक दूर पढ़ने नहीं जाना होगा। कई स्कूलों के मुख्य भवन ढहाए गए हैं और उनकी अतिरिक्त कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
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फतेहपुर। नौनिहालों को बारिश के मौसम में मानक से अधिक दूर स्थित स्कूल में पढ़ने जाना पड़ेगा। पीडब्ल्यूडी की लापरवाही के कारण अभी तक ढहाए गए जर्जर स्कूल भवनों के स्थान पर नए भवनों का निर्माण नहीं हो सका है। अब डीएम ने भवन निर्माण की जिम्मेदारी आरईएस को सौंपी है।
प्राइमरी स्कूल का मानक एक किलोमीटर और उच्च प्राथमिक स्कूल की डेढ़ किलोमीटर है। स्कूलों के मामले में जिला संतृप्त की श्रेणी में अंकित है। 2021-22 में जिले के 96 परिषदीय स्कूल कंडम घोषित कर ढहा दिए गए थे। उनके निर्माण के लिए शासन से बजट भी आवंटित हुआ। भवन निर्माण की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को नवंबर 2022 में मिली थी। कार्यदायी संस्था ने बजट लेने के बावजूद भवनों के निर्माण की प्रक्रिया तक शुरू नहीं कराई। मार्च में पीडब्ल्यूडी ने यह कहकर बजट वापस कर दिया कि दूर स्थित स्कूल भवनों का निर्माण करा पाना उनके लिए संभव नहीं है। मार्च में बजट वापस मिलने के बाद बीएसए ने डीएम के आदेश पर स्कूल निर्माण का बजट आरईएस को आवंटित किया है। अभी इन भवनों का निर्माण प्रारंभ नहीं है। ऐसी हालत में इस बारिश के मौसम में नौनिहालों को मानक से अधिक दूर स्थित नजदीकी स्कूलों में पढ़ने जाना होगा।
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बीएसए संजय कुमार कुशवाहा का कहना है कि एक-एक गांव में कई स्कूल संचालित हैं। ऐसे में बच्चों को अधिक दूर पढ़ने नहीं जाना होगा। कई स्कूलों के मुख्य भवन ढहाए गए हैं और उनकी अतिरिक्त कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
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