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किसानों की फसलें हुईं जलमग्न
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नहर में कटी खांदी। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। निचली गंगा नहर की फतेहपुर माइनर में शनिवार रात खांदी कट गई, जिससे आसपास के करीब 150 बीघा खेत की फसलें जलमग्न हो गईं। करीब 30 बीघा धान की फसल तो पानी में डूब सी गई है। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसान ही खांदी काट देते हैं। ऐसे किसानों को पता लगाया जा रहा है। उन पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
कसेरुवा और बहलोलपुर के गांव के पास से रामंगा नहर से फतेहपुर माइनर निकली है। शनिवार रात मेन ब्रांच से 50 मीटर की दूरी पर ही माइनर में खांदी कट गई। रविवार सुबह किसान खेतों पर पहुंचे तो फसलें जलमग्न देख उनके होश उड़ गए। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को फोन से सूचना दी। तब तक करीब 150 बीघा में पानी भर चुका था।
कुछ खेतों पर तो मेड़ के ऊपर से पानी बह रहा है। 25 से 30 बीघा धान की फसल पानी में डूबी हुई है। किसान अनिल कुमार, बबलू ने बताया कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों की अनदेखी से खांदी कट जाती है।
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चार दिन पहले इसी जगह से खांदी कटी थी, जिसे ठीक करने में लापरवाही की गई। पर्याप्त मिट्टी न डाले जाने से शनिवार रात फिर उसी स्थान पर खांदी कट गई।
वहीं रामगंगा नहर के अधिशासी अभियंता नंदजी गुप्ता का कहना है कि इस बार पर्याप्त बारिश न होने से किसान ही खांदी काट रहे हैं। ऐसा वही किसान करते हैं, जिनके खेत कुछ दूरी पर हैं। ऐसे किसानों का पता लगाकर उन पर कार्रवाई की जाएगी।
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कसेरुवा और बहलोलपुर के गांव के पास से रामंगा नहर से फतेहपुर माइनर निकली है। शनिवार रात मेन ब्रांच से 50 मीटर की दूरी पर ही माइनर में खांदी कट गई। रविवार सुबह किसान खेतों पर पहुंचे तो फसलें जलमग्न देख उनके होश उड़ गए। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को फोन से सूचना दी। तब तक करीब 150 बीघा में पानी भर चुका था।
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कुछ खेतों पर तो मेड़ के ऊपर से पानी बह रहा है। 25 से 30 बीघा धान की फसल पानी में डूबी हुई है। किसान अनिल कुमार, बबलू ने बताया कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों की अनदेखी से खांदी कट जाती है।
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चार दिन पहले इसी जगह से खांदी कटी थी, जिसे ठीक करने में लापरवाही की गई। पर्याप्त मिट्टी न डाले जाने से शनिवार रात फिर उसी स्थान पर खांदी कट गई।
वहीं रामगंगा नहर के अधिशासी अभियंता नंदजी गुप्ता का कहना है कि इस बार पर्याप्त बारिश न होने से किसान ही खांदी काट रहे हैं। ऐसा वही किसान करते हैं, जिनके खेत कुछ दूरी पर हैं। ऐसे किसानों का पता लगाकर उन पर कार्रवाई की जाएगी।