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मदर्स डे::: इस दुनिया में कौन है, मां से अधिक महान
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संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर।
शैलेंद्र साहित्य सरोवर की साप्ताहिक काव्य गोष्ठी में मातृ दिवस पर कविताएं गूंजी। रविवार को मुराइन टोला हनुमान मंदिर में हुई गोष्ठी में कवि शैलेंद्र द्विवेदी ने इस दुनिया में कौन है, मां से अधिक महान, बेटों के खातिर वही धरती में भगवान कविता का पाठ किया।
कवि गोष्ठी की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। कवि केपी सिंह कछवाह ने सरस्वती मां वंदना चरणों में है शीश, शब्द अर्थ के ज्ञान का दो सबको आशीष काव्य का पाठ किया। उन्होंने मां पर का बखान करते हुए मां ममता की मूर्ति है, जग की पालन हार, उसमें ब्रम्हा, विष्णु हैं वह हैं तारनहार कविता पढ़ी। डॉ. सत्यनारायण मिश्र ने माया रूप अनेक हैं, पिता पुत्र परिवार, भवसागर डूबत रहत, कबहुं न पावै पार पढ़कर जीवन के सारे के बारे में बताया। इसी तरह शिवसागर साहू ने मातृदिवस पर याद कर करते उन्हें प्रणाम, सब देवो की रूप मां, सब देवों की धाम काव्य का पाठ किया। दीपचंद्र गुप्ता ने मेरी जननी है गंगा सी, चरण उसके बड़े पावन, मेरी जननी जो मेरे पास, तो पतझड़ लगे सावन कविता पढ़ी। श्रवण कुमार पांडेय ने अपने देश में मां सजीव, देवी स्वरूपा भगवान है, धन्य प्रणाम वे सभी जिन्हें मां बाप का ध्यान है कविता का पाठ करते हुए मां की महिमा का वर्णन किया। नरेंद्र कुमार ने मां की ममता मित्र सुनों, भूतल में विख्यात, सह सकती नहीं पुत्र के कष्ट अघात कविता का पाठ किया। कविताएं सुन श्रोताओं ने तालियां बजाकर कवियों की हौसला आफजाई की।
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फतेहपुर।
शैलेंद्र साहित्य सरोवर की साप्ताहिक काव्य गोष्ठी में मातृ दिवस पर कविताएं गूंजी। रविवार को मुराइन टोला हनुमान मंदिर में हुई गोष्ठी में कवि शैलेंद्र द्विवेदी ने इस दुनिया में कौन है, मां से अधिक महान, बेटों के खातिर वही धरती में भगवान कविता का पाठ किया।
कवि गोष्ठी की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। कवि केपी सिंह कछवाह ने सरस्वती मां वंदना चरणों में है शीश, शब्द अर्थ के ज्ञान का दो सबको आशीष काव्य का पाठ किया। उन्होंने मां पर का बखान करते हुए मां ममता की मूर्ति है, जग की पालन हार, उसमें ब्रम्हा, विष्णु हैं वह हैं तारनहार कविता पढ़ी। डॉ. सत्यनारायण मिश्र ने माया रूप अनेक हैं, पिता पुत्र परिवार, भवसागर डूबत रहत, कबहुं न पावै पार पढ़कर जीवन के सारे के बारे में बताया। इसी तरह शिवसागर साहू ने मातृदिवस पर याद कर करते उन्हें प्रणाम, सब देवो की रूप मां, सब देवों की धाम काव्य का पाठ किया। दीपचंद्र गुप्ता ने मेरी जननी है गंगा सी, चरण उसके बड़े पावन, मेरी जननी जो मेरे पास, तो पतझड़ लगे सावन कविता पढ़ी। श्रवण कुमार पांडेय ने अपने देश में मां सजीव, देवी स्वरूपा भगवान है, धन्य प्रणाम वे सभी जिन्हें मां बाप का ध्यान है कविता का पाठ करते हुए मां की महिमा का वर्णन किया। नरेंद्र कुमार ने मां की ममता मित्र सुनों, भूतल में विख्यात, सह सकती नहीं पुत्र के कष्ट अघात कविता का पाठ किया। कविताएं सुन श्रोताओं ने तालियां बजाकर कवियों की हौसला आफजाई की।
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