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Fatehpur News: तीन सौ से अधिक बिना मानक के चल रहे कोचिंग सेंटर
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फतेहपुर। दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे तीन छात्रों की कोचिंग सेंटर में दम घुटने से मौत के बाद भी जिले में भूमिगत और संकरी गलियों में मानक विहीन कोचिंग संचालित हैं।
इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ हाईस्कूल, इंटरमीडिएट में सफलता का वायदा कर अभिभावकों की जेब खाली की जा रही है। सेंटरों में शासन के मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में सिर्फ जिले के 185 कोचिंग सेंटरों का पंजीयन है। जबकि शहर में दो सौ से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हैं। दूसरे नंबर पर कस्बा बिंदकी है। यहां पर 100 से अधिक कोचिंग संचालित हैं। यहां कई कोचिंग सकरी गलियों और भूमिगत कमरों में चल रहे हैं। कमरों में क्षमता से दो गुना बच्चे बैठाए जा रहे हैं। इनमें किसी तरह की दुर्घटना होने पर बाहर निकला मुश्किल है। संचालकों ने आग से बचाव की भी व्यवस्था नहीं की है। बिजली, शौचालय आदि की व्यवस्था नहीं है। प्राथमिक उपचार के नाम पर सेंटर पर मलहम पट्टी तक नहीं है।
क्या होते हैं कोचिंग के मानक:-
- कोचिंग का छात्र संख्या के आधार पर पंजीयन।
-कोचिंन पढ़ाने वाले शिक्षक प्रशिक्षित व विषय विशेषज्ञ होना चाहिए।
-छात्रों की संख्या के आधार पर कमरों में बैठने की व्यवस्था।
-सेंटर में अग्नि सुरक्षा, व प्राथमिक चिकित्सा आदि की पर्याप्त व्यवस्था।
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इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ हाईस्कूल, इंटरमीडिएट में सफलता का वायदा कर अभिभावकों की जेब खाली की जा रही है। सेंटरों में शासन के मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में सिर्फ जिले के 185 कोचिंग सेंटरों का पंजीयन है। जबकि शहर में दो सौ से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हैं। दूसरे नंबर पर कस्बा बिंदकी है। यहां पर 100 से अधिक कोचिंग संचालित हैं। यहां कई कोचिंग सकरी गलियों और भूमिगत कमरों में चल रहे हैं। कमरों में क्षमता से दो गुना बच्चे बैठाए जा रहे हैं। इनमें किसी तरह की दुर्घटना होने पर बाहर निकला मुश्किल है। संचालकों ने आग से बचाव की भी व्यवस्था नहीं की है। बिजली, शौचालय आदि की व्यवस्था नहीं है। प्राथमिक उपचार के नाम पर सेंटर पर मलहम पट्टी तक नहीं है।
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क्या होते हैं कोचिंग के मानक:-
- कोचिंग का छात्र संख्या के आधार पर पंजीयन।
-कोचिंन पढ़ाने वाले शिक्षक प्रशिक्षित व विषय विशेषज्ञ होना चाहिए।
-छात्रों की संख्या के आधार पर कमरों में बैठने की व्यवस्था।
-सेंटर में अग्नि सुरक्षा, व प्राथमिक चिकित्सा आदि की पर्याप्त व्यवस्था।