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एक्सरे मशीन खा रही धूल, सीबीसी मशीन बनी शोपीस
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अमौली। क्षेत्रीय गांवों को अभी तक सीएचसी में जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में एक्सरे और सीबीसी जांच के लिए मरीजों को घाटमपुर और हमीरपुर जाना पड़ रहा है। इससे उनका खर्च भी बढ़ रहा है।
इस समस्या से निजात के लिए दो साल पहले तत्कालीन कारागार मंत्री जयकुमार सिंह जैकी ने एक्सरे और सीबीसी मशीन की व्यवस्था कराई थी लेकिन अभी तक एक्सरे मशीन पैकिंग से भी बाहर नहीं निकाली गई है। सीबीसी मशीन भी कमरे में धूल खा रही है।
तीमरदारों को प्राइवेट लैब से महंगी जांच और एक्सरे कराने को मजबूर होना पड़ रहा। कंप्लीट ब्लड काउंट मशीन (सीबीसी) चालू हो जाय तो रक्त की अधिकांश जांचों की सुविधा रोगियों को मिलना शुरू हो जाएगा। खास बात तो यह है कि छह साल से एक्सरे टेक्नीशियन और सहायक बैठे-बिठाए का वेतन पा रहे हैं।
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मकरंदपुर निवासी सुरेंद्र ने बताया कि पैर में चोट लगने के कारण एक्सरे के लिए गए, तो बताया गया कि मशीन खराब है। तब जहानाबाद से पांच सौ रुपये खर्च कर एक्सरे कराना पड़ा।
गांगपुर निवासी पप्पू ने बताया कि बुखार की वजह से खून की कमी के लिए सठिगंवा के डाक्टर ने हिमोग्लोबिन एवं टीएलसी जांच के लिए अमौली भेजा, लेकिन वहां से वापस कर दिया गया।
जहानाबाद में 450 रुपये में जांच करानी पड़ी। चिकित्साधीक्षक डॉ. पुष्कर कटियार ने बताया कि जिस कंपनी ने एक्सरे मशीन की सेटिंग की थी। इंजीनियर बिना चलाए चला गया था। इसके बाद से मशीन बंद है। सीबीसी मशीन केमिकल के बिना बंद पड़ी है।
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इस समस्या से निजात के लिए दो साल पहले तत्कालीन कारागार मंत्री जयकुमार सिंह जैकी ने एक्सरे और सीबीसी मशीन की व्यवस्था कराई थी लेकिन अभी तक एक्सरे मशीन पैकिंग से भी बाहर नहीं निकाली गई है। सीबीसी मशीन भी कमरे में धूल खा रही है।
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तीमरदारों को प्राइवेट लैब से महंगी जांच और एक्सरे कराने को मजबूर होना पड़ रहा। कंप्लीट ब्लड काउंट मशीन (सीबीसी) चालू हो जाय तो रक्त की अधिकांश जांचों की सुविधा रोगियों को मिलना शुरू हो जाएगा। खास बात तो यह है कि छह साल से एक्सरे टेक्नीशियन और सहायक बैठे-बिठाए का वेतन पा रहे हैं।
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मकरंदपुर निवासी सुरेंद्र ने बताया कि पैर में चोट लगने के कारण एक्सरे के लिए गए, तो बताया गया कि मशीन खराब है। तब जहानाबाद से पांच सौ रुपये खर्च कर एक्सरे कराना पड़ा।
गांगपुर निवासी पप्पू ने बताया कि बुखार की वजह से खून की कमी के लिए सठिगंवा के डाक्टर ने हिमोग्लोबिन एवं टीएलसी जांच के लिए अमौली भेजा, लेकिन वहां से वापस कर दिया गया।
जहानाबाद में 450 रुपये में जांच करानी पड़ी। चिकित्साधीक्षक डॉ. पुष्कर कटियार ने बताया कि जिस कंपनी ने एक्सरे मशीन की सेटिंग की थी। इंजीनियर बिना चलाए चला गया था। इसके बाद से मशीन बंद है। सीबीसी मशीन केमिकल के बिना बंद पड़ी है।