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स्कूलों में ताले, दांव पर बच्चों का भविष्य
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर
Updated Fri, 06 Nov 2015 12:20 AM IST
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सहायक अध्यापक बने शिक्षामित्रों की बर्खास्तगी से
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जिले के प्राथमिक स्कूलों की पढ़ाई बाधित हो गई है। दर्जनों स्कूलों में
तालाबंदी हो गई है तो सैकड़ों स्कूल एकल होने से शैक्षिक कार्य पूरी तरह से
ठप है। बर्खास्त शिक्षामित्रों के स्कूल न जाने से यह स्थिति उत्पन्न हुई
है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने अगस्त 2014 में पहले बैच के 945 शिक्षामित्रों की सहायक टीचरों की बंद स्कूलों और एकल स्कूलों में नियुक्ति की थी।
इसके बाद दूसरे बैच के 1446 शिक्षामित्रों की सहायक अध्यापक पद एकल स्कूल में नियुक्ति जून 2015 में की गई। इस तरह से जिले के सभी स्कूलों में सहायक टीचरों की पर्याप्त संख्या हो गई थी।
न्यायालय ने सहायक अध्यापक पद पर समायोजित दोनों बैच के शिक्षामित्रों को बर्खास्त कर दिया है। ऐसी हालत में उन्हें वेतन मिलना बंद हो गया है। वेतन भुगतान बंद होने से ज्यादातर शिक्षामित्रों ने स्कूल जाना बंद कर दिया है।
नजदीकी स्कूलों में कार्यरत शिक्षामित्र स्कूल में सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराने पहुंच रहे हैं। उनका बच्चों की पढ़ाई से कोई मतलब नहीं रहा।
खास बात यह है कि जिन स्कूलों में सिर्फ शिक्षामित्रों की ही नियुक्ति रही है, उनकी बर्खास्तगी से ताला बंद हो गया है।
इस तरह से करीब 3 दर्जन स्कूलों में ताला बंदी हो गई है।
एक सैकड़ा स्कूल ऐसे हैं जिनमें सिर्फ प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति रह गई है। प्रधानाध्यापक को अभिलेखीय कार्यवाही और विभागीय बैठकों से समय नहीं मिलता है। ऐसी हालत में इन स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गई है।
इस समस्या से निजात के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के पास फिलहाल कोई विकल्प नहीं है। ऐसी हालत में इन स्कूलों में पंजीकृत नौनिहालों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विनय कुमार का कहना है कि जिले में कोई भी स्कूल बंद नहीं है। जहां भी ऐसी स्थिति आई थी, वहां पर नजदीकी अन्य स्कूल के शिक्षकों संबद्ध करके काम चलाया जा रहा है।
उनका कहना है कि बहुत जल्द 245 शिक्षकों की नियुक्ति होने वाली है। इसके बाद समस्या का निराकरण हो जाएगा।
बेसिक शिक्षा विभाग ने अगस्त 2014 में पहले बैच के 945 शिक्षामित्रों की सहायक टीचरों की बंद स्कूलों और एकल स्कूलों में नियुक्ति की थी।
इसके बाद दूसरे बैच के 1446 शिक्षामित्रों की सहायक अध्यापक पद एकल स्कूल में नियुक्ति जून 2015 में की गई। इस तरह से जिले के सभी स्कूलों में सहायक टीचरों की पर्याप्त संख्या हो गई थी।
न्यायालय ने सहायक अध्यापक पद पर समायोजित दोनों बैच के शिक्षामित्रों को बर्खास्त कर दिया है। ऐसी हालत में उन्हें वेतन मिलना बंद हो गया है। वेतन भुगतान बंद होने से ज्यादातर शिक्षामित्रों ने स्कूल जाना बंद कर दिया है।
नजदीकी स्कूलों में कार्यरत शिक्षामित्र स्कूल में सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराने पहुंच रहे हैं। उनका बच्चों की पढ़ाई से कोई मतलब नहीं रहा।
खास बात यह है कि जिन स्कूलों में सिर्फ शिक्षामित्रों की ही नियुक्ति रही है, उनकी बर्खास्तगी से ताला बंद हो गया है।
इस तरह से करीब 3 दर्जन स्कूलों में ताला बंदी हो गई है।
एक सैकड़ा स्कूल ऐसे हैं जिनमें सिर्फ प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति रह गई है। प्रधानाध्यापक को अभिलेखीय कार्यवाही और विभागीय बैठकों से समय नहीं मिलता है। ऐसी हालत में इन स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गई है।
इस समस्या से निजात के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के पास फिलहाल कोई विकल्प नहीं है। ऐसी हालत में इन स्कूलों में पंजीकृत नौनिहालों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विनय कुमार का कहना है कि जिले में कोई भी स्कूल बंद नहीं है। जहां भी ऐसी स्थिति आई थी, वहां पर नजदीकी अन्य स्कूल के शिक्षकों संबद्ध करके काम चलाया जा रहा है।
उनका कहना है कि बहुत जल्द 245 शिक्षकों की नियुक्ति होने वाली है। इसके बाद समस्या का निराकरण हो जाएगा।