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गुरुवार तक कर्फ्यू लागू, लोग जरूरी सामान के लिए दौड़े
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फतेहपुर। कोरोना वायरस की घातक दूसरी लहर के चलते कर्फ्यू की मियाद दो दिन और बढ़ गई है। लॉकडाउन की अवधि बढ़ने से अब गुरुवार सुबह सात बजे तक बिना वजह घरों से निकलने पर पाबंदी रहेगी। ऐसे में रसोई की जरूरत वाली वस्तुओं को लेकर उहापोह की स्थिति बन गई है। लोग आनन फानन जरूरी सामान एकत्रित करने में लगे रहे। उधर, गांव की नई सरकार को लेकर कोरोना गाइडलाइन का रविवार को भी पूरी तरह पालन नहीं हुआ। जीत के जश्न में कोरोना को भुला दिया गया।
फतेहपुर। तीन दिन के कर्फ्यू को पांच दिन किए जाने से रोजमर्रा की वस्तुओं की खरीदारी के लिए लोग दौड़ पड़े। तमाम लोग ऐसे हैं जो सप्ताह भर का सामान एक साथ लाने के बजाय रोज खरीदारी करते हैं। ऐसे में लोगों के सामने राशन पानी की व्यवस्था करना चुनौती बन गया है क्योंकि शहर में परचून का सामान उपलब्ध कराने वाली दुकानें पूरी तरह बंद हैं। बस्तियों में जरूर कुछ दुकानदार पिछले दरवाजे से जरूरतमंदों को सामान उपलब्ध करा रहे हैं।
फतेहपुर। रोज खाने कमाने वाले तबके के सामने दो वक्त की खुराक के जुगाड़ की चुनौती सामने खड़ी होती नजर आने लगी है। जिस कारण यह वर्ग जीविका को चिंतित हो उठा है। अगर लॉकडाउन आगे और खींचता है तो उसे पिछले साल की तरह रोजी और रोटी को मोहताज होना पड़ेगा। पटेल नगर के रहने वाले बाबू परिवार का गुजारा ई रिक्शा चलाकर करते हैं। बाबू का कहना है कि परिवार का भरण पोषण रोज की कमाई से होता है। तीन दिन से जेब खाली है। नहर कॉलोनी के पास पान की दुकान चलाने वाले दीपू भी लॉकडाउन की बड़ी मियाद को लेकर असमंजस में पड़ गए।
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फतेहपुर। पंचायत चुनाव की मतगणना के चलते सोमवार भी कोविड-19 गाइडलाइन पर बेहतर तरीके से फॉलो नहीं कराया जा सका। गांव में जगह-जगह जीत का जश्न सामाजिक संक्रमण को बढ़ावा देता नजर आया। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव की रोचकता शाम तक गांव के गलियारों में दिखाई दी। लोग 2 गज की दूरी की बात को बुलाकर नई सरकार बनने की खुशियां मनाते देखे गए।
फतेहपुर। कर्फ्यू के दौरान परिवहन सेवा बहाल होने से आवागमन की समस्या तो दूर हो रही है लेकिन इसके पलट संक्रमण को भी बढ़ावा मिल रहा है। रोडवेज की बसों में क्षमता से ज्यादा न केवल सवारियां भरी जा रही हैं बल्कि संक्रमण से बचाव को लेकर किसी प्रकार की सजगता नहीं बरती जा रही है। गिनी चुनी बसें चलने से यात्रियों की भीड़ बढ़ जाती है और हालात धक्कामुक्की वाले रहते हैं।
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फतेहपुर। तीन दिन के कर्फ्यू को पांच दिन किए जाने से रोजमर्रा की वस्तुओं की खरीदारी के लिए लोग दौड़ पड़े। तमाम लोग ऐसे हैं जो सप्ताह भर का सामान एक साथ लाने के बजाय रोज खरीदारी करते हैं। ऐसे में लोगों के सामने राशन पानी की व्यवस्था करना चुनौती बन गया है क्योंकि शहर में परचून का सामान उपलब्ध कराने वाली दुकानें पूरी तरह बंद हैं। बस्तियों में जरूर कुछ दुकानदार पिछले दरवाजे से जरूरतमंदों को सामान उपलब्ध करा रहे हैं।
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फतेहपुर। रोज खाने कमाने वाले तबके के सामने दो वक्त की खुराक के जुगाड़ की चुनौती सामने खड़ी होती नजर आने लगी है। जिस कारण यह वर्ग जीविका को चिंतित हो उठा है। अगर लॉकडाउन आगे और खींचता है तो उसे पिछले साल की तरह रोजी और रोटी को मोहताज होना पड़ेगा। पटेल नगर के रहने वाले बाबू परिवार का गुजारा ई रिक्शा चलाकर करते हैं। बाबू का कहना है कि परिवार का भरण पोषण रोज की कमाई से होता है। तीन दिन से जेब खाली है। नहर कॉलोनी के पास पान की दुकान चलाने वाले दीपू भी लॉकडाउन की बड़ी मियाद को लेकर असमंजस में पड़ गए।
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फतेहपुर। पंचायत चुनाव की मतगणना के चलते सोमवार भी कोविड-19 गाइडलाइन पर बेहतर तरीके से फॉलो नहीं कराया जा सका। गांव में जगह-जगह जीत का जश्न सामाजिक संक्रमण को बढ़ावा देता नजर आया। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव की रोचकता शाम तक गांव के गलियारों में दिखाई दी। लोग 2 गज की दूरी की बात को बुलाकर नई सरकार बनने की खुशियां मनाते देखे गए।
फतेहपुर। कर्फ्यू के दौरान परिवहन सेवा बहाल होने से आवागमन की समस्या तो दूर हो रही है लेकिन इसके पलट संक्रमण को भी बढ़ावा मिल रहा है। रोडवेज की बसों में क्षमता से ज्यादा न केवल सवारियां भरी जा रही हैं बल्कि संक्रमण से बचाव को लेकर किसी प्रकार की सजगता नहीं बरती जा रही है। गिनी चुनी बसें चलने से यात्रियों की भीड़ बढ़ जाती है और हालात धक्कामुक्की वाले रहते हैं।