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नहरों से पानी गायब, कागज में चल रहा 1344 क्यूसेक
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फतेहपुर। नहरों के पानी के भरोसे खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है। शासन से बनाया गया रोस्टर सिर्फ कागजों पर ही दिख रहा है। हकीकत कुछ और है। रोस्टर पर नजर डालें तो इस सप्ताह 1,334 क्यूसेक पानी नहरों में छोड़ा गया है। वास्तविकता यह है कि नहरें सूखी पड़ी हैं या फिर उनमें कीचड़ दिखाई दे रहा है। पानी न होने के कारण खरीफ फसल की तैयारी अधूरी पड़ी है।
जिले की निचली गंगा और रामगंगा नहर से 72 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई की जाती है। मलवां, तेलियानी, भिटौरा, हथगाम, हसवा और ऐरायां ब्लाक क्षेत्र के किसान फसलों की सिंचाई के लिए रामगंगा नहर पर निर्भर हैं। इसी प्रकार खजुहा, देवमई, बहुआ, असोथर ब्लाक क्षेत्र के किसान निचली गंगा नहर के पानी के भरोसे खेती करते हैं। एक हफ्ते से नहर में पानी नहीं है। पहले का पानी नहरों की तली में भरा हुआ है, जिससे पशु-पक्षियों की प्यास तो बुझ रही है, लेकिन खेती का काम आगे नहीं बढ़ रहा है।
नियमानुसार खरीफ सीजन का रोस्टर अप्रैल महीने से शुरू होता है, जिसमें पानी का आवंटन शासन से किया जाता है। पिछले सप्ताह 1409 क्यूसेक पानी नहर में पानी छोड़ने का रोस्टर था, लेकिन कम क्षमता में पानी दिया गया है। जिले की निचली गंगा नहर में एक सप्ताह और रामगंगा नहर को दूसरे सप्ताह में पानी देने का रोस्टर इस समय चल रहा है।
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भाकियू के जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह गौतम का कहना है कि धान की नर्सरी के लिए भी किसानों की पानी की आवश्यकता है। दोनों ही नहरों में पानी नहीं है। यदि इस सप्ताह भी नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो अगले सप्ताह संगठन की ओर जिम्मेदारों का घेराव किया जाएगा।
जिले की नहर में पानी छोड़ने की डिमांड भेजी गई है। ऊपर से नहर में पानी नहीं आ रहा है। खरीफ सीजन में किसानों को समय पर पानी दिलाने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल अभी खेती के लिए पानी की खास जरूरत भी नहीं है।
- नंदजी गुप्ता, नोडल अधिकारी सिंचाई खंड
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जिले की निचली गंगा और रामगंगा नहर से 72 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई की जाती है। मलवां, तेलियानी, भिटौरा, हथगाम, हसवा और ऐरायां ब्लाक क्षेत्र के किसान फसलों की सिंचाई के लिए रामगंगा नहर पर निर्भर हैं। इसी प्रकार खजुहा, देवमई, बहुआ, असोथर ब्लाक क्षेत्र के किसान निचली गंगा नहर के पानी के भरोसे खेती करते हैं। एक हफ्ते से नहर में पानी नहीं है। पहले का पानी नहरों की तली में भरा हुआ है, जिससे पशु-पक्षियों की प्यास तो बुझ रही है, लेकिन खेती का काम आगे नहीं बढ़ रहा है।
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नियमानुसार खरीफ सीजन का रोस्टर अप्रैल महीने से शुरू होता है, जिसमें पानी का आवंटन शासन से किया जाता है। पिछले सप्ताह 1409 क्यूसेक पानी नहर में पानी छोड़ने का रोस्टर था, लेकिन कम क्षमता में पानी दिया गया है। जिले की निचली गंगा नहर में एक सप्ताह और रामगंगा नहर को दूसरे सप्ताह में पानी देने का रोस्टर इस समय चल रहा है।
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भाकियू के जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह गौतम का कहना है कि धान की नर्सरी के लिए भी किसानों की पानी की आवश्यकता है। दोनों ही नहरों में पानी नहीं है। यदि इस सप्ताह भी नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो अगले सप्ताह संगठन की ओर जिम्मेदारों का घेराव किया जाएगा।
जिले की नहर में पानी छोड़ने की डिमांड भेजी गई है। ऊपर से नहर में पानी नहीं आ रहा है। खरीफ सीजन में किसानों को समय पर पानी दिलाने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल अभी खेती के लिए पानी की खास जरूरत भी नहीं है।
- नंदजी गुप्ता, नोडल अधिकारी सिंचाई खंड