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Fatehpur News: मवेशी की मौत पर बीमा कंपनी पर 1.36 लाख का जुर्माना
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फतेहपुर। उपभोक्ता फोरम आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को मवेशी के हेल्थ इंश्योरेंस मामले में पशुपालक को 1.36 लाख रुपये देने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष रामनरेश मौर्या और सदस्य पदमिनी आनंद ने यह फैसला सुनाया।
आयोग ने बीमा कंपनी को भैंस के लोन की 85 हजार रुपये की राशि वाद दायर करने की अवधि से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 10 हजार रुपये परिवाद व्यय के रूप में दो माह के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है।
बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के बिजौली गांव निवासी इंद्रजीत ने आयोग में वाद दायर कर बताया कि उन्होंने फरवरी 2019 में अमौली स्थित बैंक से भैंस पालन के लिए लोन लिया था। लोन के बाद नेशनल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा मवेशी का हेल्थ इंश्योरेंस किया गया था।
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एक मई 2019 को बीमारी के चलते भैंस की मौत हो गई। पशु अस्पताल के डॉक्टर ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बीमारी से मौत की पुष्टि की थी। इसके बाद बीमा कंपनी में क्लेम किया गया लेकिन अधिकारियों ने यह कहकर भुगतान से इनकार कर दिया कि बिना सूचना दिए भैंस का शव दफना दिया गया।
इस पर इंद्रजीत ने 13 नवंबर 2019 को उपभोक्ता फोरम आयोग में वाद दाखिल किया। सुनवाई के बाद आयोग ने बीमा कंपनी को ब्याज और परिवाद व्यय समेत 1.36 लाख रुपये दो माह के भीतर वादी के बैंक खाते में भेजने का आदेश दिया है।
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आयोग ने बीमा कंपनी को भैंस के लोन की 85 हजार रुपये की राशि वाद दायर करने की अवधि से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 10 हजार रुपये परिवाद व्यय के रूप में दो माह के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है।
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बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के बिजौली गांव निवासी इंद्रजीत ने आयोग में वाद दायर कर बताया कि उन्होंने फरवरी 2019 में अमौली स्थित बैंक से भैंस पालन के लिए लोन लिया था। लोन के बाद नेशनल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा मवेशी का हेल्थ इंश्योरेंस किया गया था।
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एक मई 2019 को बीमारी के चलते भैंस की मौत हो गई। पशु अस्पताल के डॉक्टर ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बीमारी से मौत की पुष्टि की थी। इसके बाद बीमा कंपनी में क्लेम किया गया लेकिन अधिकारियों ने यह कहकर भुगतान से इनकार कर दिया कि बिना सूचना दिए भैंस का शव दफना दिया गया।
इस पर इंद्रजीत ने 13 नवंबर 2019 को उपभोक्ता फोरम आयोग में वाद दाखिल किया। सुनवाई के बाद आयोग ने बीमा कंपनी को ब्याज और परिवाद व्यय समेत 1.36 लाख रुपये दो माह के भीतर वादी के बैंक खाते में भेजने का आदेश दिया है।