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कस्बे में सालों बाद बाजार हुआ बंद
ब्यूरो, अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Sun, 28 Feb 2016 12:34 AM IST
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जनपद के व्यावसायिक कस्बा बिंदकी में दशकों बाद
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साप्ताहिक बंदी का असर दिखा। शनिवार को दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं।
जिससे दुकानों में काम करने वाले कामगार भी खुश दिखे।
बिंदकी में साप्ताहिकी बंदी का दिन तय होने के बाद भी दुकानें खुली रहती थीं। बंदी कराने के लिए कई बार श्रम प्रवर्तन अधिकारी को बाजार में अपील करते हुए घूमना पड़ा। दुकानों व प्रतिष्ठानों में काम करने वाले मजदूरों को हफ्ते में एक दिन भी छुट्टी न मिलने से शोषण हो रहा था।
बंदी के दिन जब श्रम निरीक्षक बाजार में जाते तो कुछ देर के लिए दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर देते थे और उनके जाते ही दुकानें फिर से खुल जाती थीं। इस संबंध में श्रम प्रवर्तन अधिकारी विनोदनी अवस्थी ने व्यापार मंडल अध्यक्ष कल्लू लोहिया से बात की थी।
इस बार शनिवार को अभूतपूर्व बंदी रही। प्रमुख व्यवसायी बिल्लू बजाज, दिनेश लोहिया, मुकुंदी गुप्ता, मोहित ओमर, राजेश ओमर, योगेश गुप्ता, शोएब खान, शमी अहमद बरकाती, सफी अहमद चीनियर सहित कई दुकानदारों ने साप्ताहिक बंदी की सफलता पर खुशी का इजहार किया है।
इनका कहना है कि प्रतिस्पर्धा में दुकानें खोलनी पड़ती थीं। हफ्ते में एक दिन दुकानें बंद रहने पर घरेलू कामकाज भी आसानी से निपट जाएंगे। उधर, दुकानदार अजय उर्फ गुड्डूू ओमर, पद्म ओमर, कन्हैया गुप्ता, खिल्लन सेठ, राम किशन गुप्ता आदि अपनी दुकानों के इर्द गिर्द मिले।
इनका कहना है कि साप्ताहिक बंदी कड़ाई से लागू होने के कारण समय ही पास नहीं हो रहा है। साप्ताहिक बंदी होने के कारण अधिकांश दुकानदारों ने अपना समय घर में बिताया।
इससे उनके बच्चे तो खुश रहे ही महिलाएं भी प्रफुल्लित रहीं। प्रमुख व्यवसायी राम किशन की पत्नी रीता देवी व सफी अहमद की पत्नी कैकशा बेगम ने बंदी कराने वालों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि हर दिन दुकानें खुली होने से मिल बैठकर बातचीत भी नहीं हो पाती थी।
तहसील के पास फोटोकॉपी व टाइप की दुकानों के दुकानदारों ने श्रम प्रवर्तन अधिकारी से मांग की कि उनकी बंदी का दिन रविवार हो। रविवार को तहसील बंद रहती है। शनिवार को दुकानें बंद होने से तहसील में फोटोकॉपी व टाइप का कार्य प्रभावित होगा।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी विनोदनी अवस्थी ने कहा कि व्यापार मंडल के सहयोग से पहली बार साप्ताहिक बंदी सफल हुई है। उन्होंने हिदायत दिया कि यदि बंदी के दिन किसी की भी दुकान खुली मिली तो उसके ऊपर जुर्माना ठोंकने के अलावा चालान भी किया जाएगा।
बिंदकी में साप्ताहिकी बंदी का दिन तय होने के बाद भी दुकानें खुली रहती थीं। बंदी कराने के लिए कई बार श्रम प्रवर्तन अधिकारी को बाजार में अपील करते हुए घूमना पड़ा। दुकानों व प्रतिष्ठानों में काम करने वाले मजदूरों को हफ्ते में एक दिन भी छुट्टी न मिलने से शोषण हो रहा था।
बंदी के दिन जब श्रम निरीक्षक बाजार में जाते तो कुछ देर के लिए दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर देते थे और उनके जाते ही दुकानें फिर से खुल जाती थीं। इस संबंध में श्रम प्रवर्तन अधिकारी विनोदनी अवस्थी ने व्यापार मंडल अध्यक्ष कल्लू लोहिया से बात की थी।
इस बार शनिवार को अभूतपूर्व बंदी रही। प्रमुख व्यवसायी बिल्लू बजाज, दिनेश लोहिया, मुकुंदी गुप्ता, मोहित ओमर, राजेश ओमर, योगेश गुप्ता, शोएब खान, शमी अहमद बरकाती, सफी अहमद चीनियर सहित कई दुकानदारों ने साप्ताहिक बंदी की सफलता पर खुशी का इजहार किया है।
इनका कहना है कि प्रतिस्पर्धा में दुकानें खोलनी पड़ती थीं। हफ्ते में एक दिन दुकानें बंद रहने पर घरेलू कामकाज भी आसानी से निपट जाएंगे। उधर, दुकानदार अजय उर्फ गुड्डूू ओमर, पद्म ओमर, कन्हैया गुप्ता, खिल्लन सेठ, राम किशन गुप्ता आदि अपनी दुकानों के इर्द गिर्द मिले।
इनका कहना है कि साप्ताहिक बंदी कड़ाई से लागू होने के कारण समय ही पास नहीं हो रहा है। साप्ताहिक बंदी होने के कारण अधिकांश दुकानदारों ने अपना समय घर में बिताया।
इससे उनके बच्चे तो खुश रहे ही महिलाएं भी प्रफुल्लित रहीं। प्रमुख व्यवसायी राम किशन की पत्नी रीता देवी व सफी अहमद की पत्नी कैकशा बेगम ने बंदी कराने वालों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि हर दिन दुकानें खुली होने से मिल बैठकर बातचीत भी नहीं हो पाती थी।
तहसील के पास फोटोकॉपी व टाइप की दुकानों के दुकानदारों ने श्रम प्रवर्तन अधिकारी से मांग की कि उनकी बंदी का दिन रविवार हो। रविवार को तहसील बंद रहती है। शनिवार को दुकानें बंद होने से तहसील में फोटोकॉपी व टाइप का कार्य प्रभावित होगा।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी विनोदनी अवस्थी ने कहा कि व्यापार मंडल के सहयोग से पहली बार साप्ताहिक बंदी सफल हुई है। उन्होंने हिदायत दिया कि यदि बंदी के दिन किसी की भी दुकान खुली मिली तो उसके ऊपर जुर्माना ठोंकने के अलावा चालान भी किया जाएगा।