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फतेहपुर महोत्सव में लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने श्रोताओं को झुमाया

Sun, 08 Feb 2015 12:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर Updated Sun, 08 Feb 2015 12:47 AM IST
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in Fatehpur mahotsav folk singer malini awasthi performed

फतेहपुर महोत्सव की शाम को लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने सुरमई बना दिया। अपनी मखमली आवाज से शहरवासियों को झूमने पर मजबूर कर दिया। मालिनी के मंच पर आते ही पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इससे उत्साहित मालिनी ने अपनी चुनिंदा गानों की सौगात अपने श्रोताओं को दी

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भक्ति संगीत के जरिये आगाज करने वाली लोकगायिका ने दिल को छूने वाले एक से बढ़कर एक लोकगीत प्रस्तुत करने का सिलसिला चालू किया।

जैस ही मंच पर आईं तो श्रोताओं की तालियों से गदगद मालिनी ने माइक संभालते ही पहले हाथ जोड़कर प्रणाम किया और फिर डिमांड मिलते ही, ‘सइंया मिले लरकइया, हाय मै का करौं’ मशहूर गीत से श्रोताओं को मोहित कर दिया।
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यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा और मालिनी की महफिल-ए-समां ने शहरियों को खूब रोमांचित किया। इसके बाद ‘लेरिया बैरन पिया को लिये जाए’ गीत गाकर दर्शकों को बांधे रखा। इसके पहले कार्यक्रम का शुरुआत डीएम राकेश कुमार ने दीप जलाकर किया। इस दौरान सीडीओ भवानी सिंह, एएसपी अरविंद मिश्रा और जिला प्रोबेशन अधिकारी नीता अहिरवार मौजूद रहीं।
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लोकसंगीत कला नहीं वरन जीवनशैली से जुड़ी विधा है। जिसमें दादा-दादी व  नाना-नानी की यादें समाहित हैं। सच तो यह है कि बीस साल में इस कला का 75 फीसदी क्षरण हुआ है। इसके अलावा बाजारवाद की चमक भी इसकी जिम्मेदार है।

फतेहपुर महोत्सव में आई लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने खास बातचीत में लोककला के हश्र पर मलाल जाहिर किया। कहा कि इस कला के कद्रदान आज भी हैं। अपने इस सफर में कद्रदानों का कारवां बढ़ता देखा है। सोन चिरईया संस्था लखनऊ की मुखिया मालिनी ने बेबाकी से कहा कि सरकार ने सदियों पुरानी इस विधा को हाशिये पर लाने का काम किया है। महज 20 साल के दौर में 75 फीसदी विधा का क्षरण इसकी गवाही देता है।

इनसेट
जिले में है पिता का ननिहाल
मालिनी अवस्थी ने बताया कि जिला उनकी पुरानी यादों से जुड़ा है। बताया कि फतेहपुर के जहानाबाद के करीब बेहटा गांव में उनके पिता डॉ. पीएन अवस्थी का ननिहाल है। 12 साल की उम्र तक वह इस सरजमीं के करीब रही हैं। करबिगवां रेलवे स्टेशन से ननिहाल तक का बैलगाड़ी का वो सफर आज भी जेहन में गूंजता है।

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