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कानपुर के दस फीसद युवाओं ने भरे कामयाबी के फर्राटे

Sun, 09 Feb 2020 12:30 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 09 Feb 2020 12:30 AM IST
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in army recruitment 428 candidate won the race
फतेहपुर में सेना भर्ती के लिए दौड़ में समय पूरा होने के बाद अभ्यर्थियों को रोकते जवान। - फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। सेना भर्ती में शनिवार को कानपुर के चार हजार से ज्यादा युवाओं ने चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया। जबकि आनलाइन आवेदन कराने वाले करीब तीन हजार युवाओं ने प्रतिभाग करने से किनारा कस लिया। दौड़ के इम्तिहान मेें 428 युवा ही सफल हो सके। जिन्हें आगे के परीक्षण के लिए भेजा जाता रहा। यह काम सैन्य अफसरों की निगहबानी में होता रहा।
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बारहवीं पीएसी मैदान में दो फरवरी से सेना रैली चल रही है। 16 फरवरी तक चलने वाली सेना भर्ती के सातवें दिन कानपुर नगर के स्थानीय कानपुर के 7236 युवाओं ने आनलाइन आवेदन कराया था। चूंकि कानपुर पड़ोस का जिला है। लिहाजा यह मानकर चला जा रहा था कि युवाओं की अच्छी खासी आमद होगी, लेकिन इसके विपरीत देखने को मिला। तीन हजार से ज्यादा युवाओं के मैदान छोड़ देने से दौड़ प्रक्रिया 11 बजे के पास खत्म हो गई। जिसके बाद सफल हुए अभ्यर्थियों को स्टेप वाइज स्टेप सैन्य परीक्षा के लिए भेजा जाता रहा। एडीएम पप्पू गुप्ता ने बताया कि सात हजार में चार हजार युवाओं ने ही चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया। जिसमें से दस फीसदी युवाओं को कामयाबी मयस्सर हो सकी।
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सेना रैली पर एक नजर-
आनलाइन आवेदन करने वाले अभ्यर्थी-7236
हिस्सा लेने वाली तादाद-4197
नहीं शामिल हुए-3039
दौड़ में सफल हुए- 428
सफलता का प्रतिशत- 10.18 प्रतिशत
सेना भर्ती प्रक्रिया के आठवें दिन यानी रविवार को कन्नौज जिले के कन्नौज जिले के साथ भी कानपुर नगर जिले के युवाओं को प्रतिभाग होगा। पीएसी मैदान में इस दिन की प्रक्रिया के लिए 7261 ने आनलाइन आवेदन कर रखा है। दरअसल, कानपुर के पास का ही कन्नौज जिला भी है। ऐसे में युवाओं के अच्छे प्रतिभाग की उम्मीद की जा सकती है।
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सेना भर्ती का हिस्सा बन रहे तमाम युवा, इस मलाल संग पीएसी मैदान से बाहर निकलते हैं कि आखिर, उन्हें किस मानक के आधार पर सेना लायक नहीं माना जा रहा है। शनिवार भी इस तरह का मलाल तमाम युवाओं के जेहन से जुबां तक आ पहुंचा। कानपुर नगर के कमालपुर गांव के पियूष सैनी ने बताया कि वह ग्रुप टू की रेस पर थे। दौड़ में सफल हुए, इसी लिए रन निकालने के बाद लगने वाली मुहर भी हाथ पर लग गई। मुहर लगी तो उम्मीदों को पंख लगे लेकिन चंद मिनट के लिए। बकौल पियूष, ग्रुप में दूसरे नंबर पर रहने के बावजूद बाहर करने की बात समझ में नहीं आई।
सेना भर्ती में शामिल होने वाली युवाओं की बड़ी जमात रेलवे की सेवाएं लेती हैं। चूंकि रविवार का दिन कन्नौज और कानपुर जिले के युवाओं को रैली में हिस्सा लेना है। ऐसे में जीआरपी और आरपीएफ के जवानों को सतर्क रखा गया है ताकि वह किसी भी स्थिति से निपटने में सफल हो सके।

सेना की नौकरी गौरवान्वित करने वाली है। वह भी इस नौकरी की अहमियत उससे अच्छा कौन जान सकता है जो खुद कभी सैनिक बनकर सरहद की रखवाली करता रहा हो। कानपुर से बेटे आयुष के साथ आए रणधीर सिंह ने बताया कि उनका एक भी सपना है कि बेटा उनकी तरह सेना में सेवा करके देश का नाम रोशन करे। बेशक, अब हड्डियां कमजोर पड़ती जा रही हैं लेकिन अभी भी इस बूढ़े शरीर में वतन के लिए पहले जैसी मोहब्बत है।
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