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पत्नी की मौत से हताश पति ने सीएचसी में फांसी लगाकर दी जान
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अमौली सीएचसी में रोती विशाल की मां एव भाभी। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
अमौली। आग लगाकर जान देने वाली पत्नी की मौत से हताश पति ने शुक्रवार सुबह अमौली सीएचसी में फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
घटना से सीएचसी में हड़कंप मच गया। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतारा। पुलिस ने दंपति के शवों का पोस्टमार्टम कराया है। पोस्टमार्टम के बाद युवक के परिजनों शवों को अंतिम संस्कार कर दिया।
चांदपुर थाना क्षेत्र के अमौली कस्बा निवासी वंदना (32) ने पति विशाल से विवाद के बाद गुरुवार शाम खुद पर केरोसिन डालकर आग लगा ली थी।
उसकी घर में ही झुलस जाने से मौत हो गई थी। पुलिस ने शव को जिला अस्पताल की मार्च्युरी हाउस में रखवाया है। पत्नी को बचाने में पति विशाल (35) भी झुलस गया था।
उसे ग्रामीणों ने सीएचसी में भर्ती कराया था। जहां डॉक्टरों ने हालत नाजुक देखकर उसे कानपुर ले जाने की सलाह दी थी, लेकिन परिजन नहीं होने के कारण विशाल को कानपुर नहीं ले जाया जा सका था।
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शुक्रवार सुबह सीएचसी में वार्ड के स्टाफ ने बेडशीट के फंदे से पंखे पर विशाल का शव लटकता देखा। बेड पर स्टूल रखा हुआ था। जिसके सहारे से वह पंखे से लटका।
यह देखकर अस्पताल प्रशासन के होश उड़ गए। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने लखनऊ में रहने वाले मृतक के बड़े भाई देवाशीष उर्फ सत्यनारायण की तहरीर पर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
तहरीर में देवाशीष ने बताया कि बहू वंदना की मौत के सदमे में भाई ने आत्महत्या की है। वह लोग कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। थानाध्यक्ष डीडी सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। मायके पक्ष ने कोई आरोप नहीं लगाया है।
मायके वाले ले गए बच्चे
मृतक के बड़े भाई देवाशीष ने मृतक बहू वंदना के भाई विनोद निवासी देवा शरीफ जिला बाराबंकी को घटना की सूचना दी थी। सूचना पर पहुंचा भाई बहन के एक साल के बेटे वासू को लेकर रात में ही लौट गया।
विनोद ने पुलिस को बताया कि उसके घर में तेरहवीं संस्कार का शुक्रवार को आयोजन है। इसी वजह से वह नहीं रुक सकता है। वह लोग वंदना का अंतिम बार चेहरा देखे बगैर ही लौट गए।
इधर, देवाशीष ने सीएचसी से सुबह विशाल को कानपुर ले जाने की पुलिस से बात की और घर चला गया। सत्यनारायण सुबह अमौली सीएचसी पहुंचा। जहां भाई की मौत का पता लगा।
सीएचसी प्रशासन की लापरवाही
अमौली सीएचसी प्रशासन की घटना में कहीं न कहीं चूक सामने आई है। सीएचसी में पूरी रात चिकित्सीय स्टाफ मौजूद रहता है।
इसके बाद भी मरीज ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अस्पताल प्रशासन विशाल को रेफर किए जाने का दावा कर पल्ला झाड़ रहा है।
जबकि ड्यूटी में तैनात डाक्टर रात को ही विशाल को जिला अस्पताल या फिर कानपुर हैलट के लिए रेफर कर सकते थे। उन्हें सिर्फ खुद की ओर से 108 नंबर में काल करके एंबुलेंस बुलानी थी।
थाने में सूचना भेजकर होमगार्ड बुलाते और विशाल को अस्पताल भेज सकते थे। सीएचसी प्रभारी डा. पुष्कर कटियार ने बताया कि मरीज को रेफर किया गया था। उनके परिजनों के आने का इंतजार था। बगैर अटेंडेंट के मरीज को नहीं भेजा जा सकता है।
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घटना से सीएचसी में हड़कंप मच गया। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नीचे उतारा। पुलिस ने दंपति के शवों का पोस्टमार्टम कराया है। पोस्टमार्टम के बाद युवक के परिजनों शवों को अंतिम संस्कार कर दिया।
चांदपुर थाना क्षेत्र के अमौली कस्बा निवासी वंदना (32) ने पति विशाल से विवाद के बाद गुरुवार शाम खुद पर केरोसिन डालकर आग लगा ली थी।
उसकी घर में ही झुलस जाने से मौत हो गई थी। पुलिस ने शव को जिला अस्पताल की मार्च्युरी हाउस में रखवाया है। पत्नी को बचाने में पति विशाल (35) भी झुलस गया था।
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उसे ग्रामीणों ने सीएचसी में भर्ती कराया था। जहां डॉक्टरों ने हालत नाजुक देखकर उसे कानपुर ले जाने की सलाह दी थी, लेकिन परिजन नहीं होने के कारण विशाल को कानपुर नहीं ले जाया जा सका था।
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शुक्रवार सुबह सीएचसी में वार्ड के स्टाफ ने बेडशीट के फंदे से पंखे पर विशाल का शव लटकता देखा। बेड पर स्टूल रखा हुआ था। जिसके सहारे से वह पंखे से लटका।
यह देखकर अस्पताल प्रशासन के होश उड़ गए। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने लखनऊ में रहने वाले मृतक के बड़े भाई देवाशीष उर्फ सत्यनारायण की तहरीर पर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
तहरीर में देवाशीष ने बताया कि बहू वंदना की मौत के सदमे में भाई ने आत्महत्या की है। वह लोग कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। थानाध्यक्ष डीडी सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। मायके पक्ष ने कोई आरोप नहीं लगाया है।
मायके वाले ले गए बच्चे
मृतक के बड़े भाई देवाशीष ने मृतक बहू वंदना के भाई विनोद निवासी देवा शरीफ जिला बाराबंकी को घटना की सूचना दी थी। सूचना पर पहुंचा भाई बहन के एक साल के बेटे वासू को लेकर रात में ही लौट गया।
विनोद ने पुलिस को बताया कि उसके घर में तेरहवीं संस्कार का शुक्रवार को आयोजन है। इसी वजह से वह नहीं रुक सकता है। वह लोग वंदना का अंतिम बार चेहरा देखे बगैर ही लौट गए।
इधर, देवाशीष ने सीएचसी से सुबह विशाल को कानपुर ले जाने की पुलिस से बात की और घर चला गया। सत्यनारायण सुबह अमौली सीएचसी पहुंचा। जहां भाई की मौत का पता लगा।
सीएचसी प्रशासन की लापरवाही
अमौली सीएचसी प्रशासन की घटना में कहीं न कहीं चूक सामने आई है। सीएचसी में पूरी रात चिकित्सीय स्टाफ मौजूद रहता है।
इसके बाद भी मरीज ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अस्पताल प्रशासन विशाल को रेफर किए जाने का दावा कर पल्ला झाड़ रहा है।
जबकि ड्यूटी में तैनात डाक्टर रात को ही विशाल को जिला अस्पताल या फिर कानपुर हैलट के लिए रेफर कर सकते थे। उन्हें सिर्फ खुद की ओर से 108 नंबर में काल करके एंबुलेंस बुलानी थी।
थाने में सूचना भेजकर होमगार्ड बुलाते और विशाल को अस्पताल भेज सकते थे। सीएचसी प्रभारी डा. पुष्कर कटियार ने बताया कि मरीज को रेफर किया गया था। उनके परिजनों के आने का इंतजार था। बगैर अटेंडेंट के मरीज को नहीं भेजा जा सकता है।

विशाल की फाइल फोटो। संवाद- फोटो : FATEHPUR