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टेल तक तो दूर हेड में ही नहीं पहुंच रहा पानी

Mon, 06 Jul 2015 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर Updated Mon, 06 Jul 2015 12:33 AM IST
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Head to tail off in the water not reaching

रोस्टर के मुताबिक नहरों, माइनरों में पानी की सप्लाई जरूर शुरू हो गई, लेकिन सैकड़ों गांवों के किसानों को पानी नहीं मिल रहा है। मरम्मत व सिल्ट सफाई न होने से दो दर्जन माइनरों के टेल तक पानी पहुंचना तो दूर, उनके हेड में पानी नहीं पहुंच रहा है। रोस्टर के मुताबिक 13 दिन से लगातार निचली गंगा नहर में पानी चलने के बाद भी असोथर ब्लाक के आगे पानी नहीं पहुंच सका है। ऐसे में नहर से सिंचाई करने वाले किसानों को एक बार फिर धान की रोपाई में परेशानी से जूझना पड़ रहा है।

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कौशांबी जिले के करीब एक दर्जन माइनरों के माध्यम से सिंचाई करने वाली निचली गंगा नहर की हालत बदतर होती जा रही है। लगातार रोस्टर के मुताबिक पानी चलने के बाद भी नहर के आधे रास्ते में पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे विजईपुर, धाता विकास खंड की चचीड़ा माइनर, दरियामऊ माइनर, पौली माइनर, रारी माइनर, खखरेरू माइनर, अहमदपुर कुसुंभा माइनर, धाता माइनर समेत कौशांबी की एक दर्जन माइनरों में तीन महीने से पानी नहीं गया है।
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जंगली घास की कटाई न होने से रुका पानी
बौडर स्टेप के आगे जंगली घास ने निचली गंगा नहर पर कब्जा कर लिया है, जिससे पानी नहर के टेल में पहुंचने के बजाय नाले से होकर यमुना नदी में जा रहा है। सिल्ट सफाई के नाम पर लाखों खर्च के बाद भी जंगली घास नहीं हटाई गई। बता दें कि जरौली पंप कैनाल के छह पंप तीन महीने से चल रहे हैं लेकिन बौंडर स्केप के आगे पानी नहीं पहुंच सका है। जरौली पंप कैनाल के जरिए नहर में आने वाला पानी स्केप से घूम कर वापस यमुना नदी में जा रहा है। विभाग के अधिकारी मुख्य नहर में खड़ी जंगली घास को साफ कराने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। बता दें कि पंप कैनाल से बौंडर स्केप की दूरी महज दस किमी है।
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इनसेट
अफसर ने काट दिया फोन
अधिशाषी अभियंता आरके गुप्ता ने एक बार फिर विभागीय मामले में जानकारी देने से मना कर दिया। निचली गंगा नहर का पानी असोथर के बौंडर स्केप से आगे न पहुंचने के सवाल पर उन्होंने आश्रम में होेने की बात कहकर फोन काट दिया।


कोट
बिजली के बार-बार ट्रिप होने पर मशीने बंद हो जाती हैं, जिससे नहर का पानी आगे नहीं बढ़ पाता है। नहर के कुछ हिस्से में घास खड़ी है, लेकिन घास से इतना प्रभाव नहीं पड़ता है कि पानी आगे न जा सके। - राजकुमार सचान, सहायक अभियंता, निचली गंगा नहर

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