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रिबोर में खर्च हो गए पांच करोड़, फिर भी ग्रामीण क्षेत्र के हैंडपंप बने ठूंठ
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ंगू सिंह का डेरा मजरे सरकडी का खराब हैंडपंप। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। गर्मी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही पेयजल संकट बढ़ने लगा है। अधिकारियों की लापरवाही से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप ठूंठ बने हैं। दूसरी ओर पंचायती राज विभाग के अधिकारी चालू वित्तीय वर्ष में खराब हैंडपंपों के रिबोर में पांच करोड़ से अधिक खर्च करने का दावा कर रहा है। हकीकत यह है कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, वैसे ही खराब हैंडपंपों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।
जिले की 834 ग्राम पंचायतों के लोगों की प्यास बुझाने के लिए 53 हजार से अधिक सरकारी हैंडपंप लगे हैं। इनमें मामूली कमी वाले हैंडपंपों की मरम्मत पंचायती राज विभाग कराता है। जिन हैंडपंपों की बोरिंग फेल हो जाती है, उसके बदले ग्राम पंचायत स्तर से रिबोर भी कराया जाता है।
चालू वित्तीय वर्ष में जिले की सभी ग्राम पंचायतों से 1039 हैंडपंपों के रिबोर कराने की सूची पंचायती राज विभाग को सभी ग्राम पंचायतों से भेजी गई थी, जिनका विभाग रिबोर कराकर पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त करने का दावा कर रहा है।
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दावे के विपरीत अभी ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का संकट जस का तस बना हुआ है। एक हैंडपंप के रिबोर कराने में करीब 50 हजार रुपये का खर्च आता है। अभी ज्यादातर ग्राम पंचायतों में एक से अधिक हैंडपंप ठूंठ खड़े हैं। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए दूसरे मोहल्लों में जाना पड़ता है। ग्रामीण लाइन लगाकर पानी भरने के लिए मजबूर हैं।
असोथर ब्लाक क्षेत्र के जंगू का डेरा गांव में दो सरकारी हैंडपंप लगे हैं। इनमें से एक हैंडपंप चार महीने से खराब है। अब पूरे गांव के लोग एक ही हैंडपंप से पीने का पानी भर कर जरूरत पूरी करते हैं। ग्रामीण जितेंद्र सिंह, हरिओम ने बताया कि खराब हैंडपंप सही कराने के लिए ब्लाक के अधिकारियों को कई बार कहा गया है, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अब गर्मी में पानी की समस्या और बढ़ जाएगी।
मलवां ब्लाक के रेना ग्राम पंचायत में एक हजार की आबादी है। यहां पर 20 सरकारी हैंडपंप लगे हैं। इनमें 12 हैंडपंप एक साल से खराब हैं। ग्राम पंचायत के 12 हैंडपंप खराब होने के कारण अब गर्मी में पानी की किल्लत बढ़ गई है। प्रधान अमर सिंह ने बताया कि पंचायत सचिव से हैंडपंपों को रिबोर कराने के लिए कहा गया था, लेकिन पंचायत सचिव ने जल निगम से सर्वे कराने की बात कह कर टाल दिया था।
हसवा--- 3937-- 63
तेलियानी--- 2883-- 58
बहुआ--- 4407-- 71
भिटौरा--- 3799-- 110
असोथर--- 4287-- 80
खजुहा--- 6049-- 114
देवमई--- 3719-- 66
अमौली--- 4805-- 80
मलवां--- 3947-- 91
धाता--- 3139-- 79
हथगाम-- 4347-- 83
विजयीपुर--- 4509-- 68
ऐरायां--- 3684-- 73
जो हैंडपंप तकनीकी कारणों से खराब हैं, उनकी मरम्मत कराई जा रही है। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में बोरिंग फेल होने वाले हैंडपंपों को रिबोर कराने की सूची तैयार कराई जाती है। ऐसे हैंडपंपों की बोरिंग कराकर पेयजल व्यवस्था बहाल करा दी गई है। इधर जिन हैंडपंपों की बोरिंग फेल हुई है, उन्हें अगले वित्तीय वर्ष में रिबोर कराया जाएगा।
- निधि बंसल, प्रभारी डीपीआरओ
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जिले की 834 ग्राम पंचायतों के लोगों की प्यास बुझाने के लिए 53 हजार से अधिक सरकारी हैंडपंप लगे हैं। इनमें मामूली कमी वाले हैंडपंपों की मरम्मत पंचायती राज विभाग कराता है। जिन हैंडपंपों की बोरिंग फेल हो जाती है, उसके बदले ग्राम पंचायत स्तर से रिबोर भी कराया जाता है।
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चालू वित्तीय वर्ष में जिले की सभी ग्राम पंचायतों से 1039 हैंडपंपों के रिबोर कराने की सूची पंचायती राज विभाग को सभी ग्राम पंचायतों से भेजी गई थी, जिनका विभाग रिबोर कराकर पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त करने का दावा कर रहा है।
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दावे के विपरीत अभी ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का संकट जस का तस बना हुआ है। एक हैंडपंप के रिबोर कराने में करीब 50 हजार रुपये का खर्च आता है। अभी ज्यादातर ग्राम पंचायतों में एक से अधिक हैंडपंप ठूंठ खड़े हैं। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए दूसरे मोहल्लों में जाना पड़ता है। ग्रामीण लाइन लगाकर पानी भरने के लिए मजबूर हैं।
असोथर ब्लाक क्षेत्र के जंगू का डेरा गांव में दो सरकारी हैंडपंप लगे हैं। इनमें से एक हैंडपंप चार महीने से खराब है। अब पूरे गांव के लोग एक ही हैंडपंप से पीने का पानी भर कर जरूरत पूरी करते हैं। ग्रामीण जितेंद्र सिंह, हरिओम ने बताया कि खराब हैंडपंप सही कराने के लिए ब्लाक के अधिकारियों को कई बार कहा गया है, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अब गर्मी में पानी की समस्या और बढ़ जाएगी।
मलवां ब्लाक के रेना ग्राम पंचायत में एक हजार की आबादी है। यहां पर 20 सरकारी हैंडपंप लगे हैं। इनमें 12 हैंडपंप एक साल से खराब हैं। ग्राम पंचायत के 12 हैंडपंप खराब होने के कारण अब गर्मी में पानी की किल्लत बढ़ गई है। प्रधान अमर सिंह ने बताया कि पंचायत सचिव से हैंडपंपों को रिबोर कराने के लिए कहा गया था, लेकिन पंचायत सचिव ने जल निगम से सर्वे कराने की बात कह कर टाल दिया था।
हसवा--- 3937-- 63
तेलियानी--- 2883-- 58
बहुआ--- 4407-- 71
भिटौरा--- 3799-- 110
असोथर--- 4287-- 80
खजुहा--- 6049-- 114
देवमई--- 3719-- 66
अमौली--- 4805-- 80
मलवां--- 3947-- 91
धाता--- 3139-- 79
हथगाम-- 4347-- 83
विजयीपुर--- 4509-- 68
ऐरायां--- 3684-- 73
जो हैंडपंप तकनीकी कारणों से खराब हैं, उनकी मरम्मत कराई जा रही है। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में बोरिंग फेल होने वाले हैंडपंपों को रिबोर कराने की सूची तैयार कराई जाती है। ऐसे हैंडपंपों की बोरिंग कराकर पेयजल व्यवस्था बहाल करा दी गई है। इधर जिन हैंडपंपों की बोरिंग फेल हुई है, उन्हें अगले वित्तीय वर्ष में रिबोर कराया जाएगा।
- निधि बंसल, प्रभारी डीपीआरओ