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गोशाला में भूख से मर रहे गोवंश
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थरियांव। गोशाला में गोवंशों की बढ़ती संख्या के कारण चारा-पानी की कमी हो गई है। मवेशियों को पेटभर चारा तक नसीब नहीं हो रहा है। भूख से मवेशी दम तोड़ रहे हैं। सोमवार को गोशाला में एक मवेशी की मौत हो गई। कई मवेशी बीमार हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी का कहना है कि मवेशियों में बीमारी नहीं है। इनको पेट भर चारा न मिलने के कारण यह कमजोर हो गए हैं। उन्होंने अपनी रिपोर्ट सीडीओ को दी है।
हसवा ब्लाक के सीतापुर गांव के पास हाईवे किनारे ग्राम पंचायत द्वारा बनाई गई गोशाला का सदर विधायक विधायक विक्रम सिंह ने फरवरी में उद्घाटन किया था। यहां पर मवेशियों को रखने के लिए दो टीनेशेड तो बनाए गए लेकिन भूसा, चूनी, चोकर रखने के लिए गोदाम नहीं बनाया गया।
उद्घाटन के बाद टीनशेड में भूसा रखा गया और एक बीघे में हरे चारा की व्यवस्था की गई थी। बारिश में भीगा हुआ भूसा मवेशियों को खिलाया जाता है। चूनी, चोकर की व्यवस्था न होने के कारण सूखा भूसा मवेशियों को रास नहीं आ रहा है। पेट भर चारा न मिलने के कारण दर्जन भर मवेशियों की हालत खराब है। यहां पर 165 गोवंश थे, जिसमें एक गोवंश की सोमवार को मौत हो गई।
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मवेशियों को नहीं मिल पा रहा चारा-पानी- सीवीओ
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एसके तिवारी ने बताया कि उन्होंने दो दिन पहले थरियांव गोशाला का निरीक्षण किया था। मवेशियों में कोई बीमारी नहीं है। बस उन्हें पर्याप्त चारा और पानी नहीं मिल रहा है। इसी कारण से मवेशी कमजोर होकर बीमार हो रहे हैं। उन्होंने अपनी रिपोर्ट सीडीओ को दी है।
164 मवेशियों को दिया जाता है एक बोझ हरा चारा
गोशाला के मवेशियों के लिए एक बीघा हरा चारा बोया गया है। रोज एक बोझ चारा काटकर गोशाला आता है, लेकिन चारा कतरने की मशीन न होने के कारण समूचे हरे चारे को मवेशियों के सामने डाल दिया जाता है। ऐसे में गोशाला के 164 मवेशियों को एक बोझ चारे से एक-एक डंठल ही नसीब हो रही है।
भूसा रखने का नहीं बना है गोदाम
20 अन्ना मवेशियों को गोशाला में रखकर इसका उद्घाटन किया गया। पांच महीने में मवेशियों की संख्या 164 हो गई, लेकिन यहां पर मवेशियों के लिए भूसा का स्टाक करने का गोदाम नहीं है। जहां मवेशी बांधे जाते हैं, उसी टीनशेड के एक किनारे भूसा रख दिया जाता है। जो बारिश में भीगता है और धूप में गरम होता है। यही चारा खाने के बाद मवेशी बीमार हो जाते हैं।
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हसवा ब्लाक के सीतापुर गांव के पास हाईवे किनारे ग्राम पंचायत द्वारा बनाई गई गोशाला का सदर विधायक विधायक विक्रम सिंह ने फरवरी में उद्घाटन किया था। यहां पर मवेशियों को रखने के लिए दो टीनेशेड तो बनाए गए लेकिन भूसा, चूनी, चोकर रखने के लिए गोदाम नहीं बनाया गया।
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उद्घाटन के बाद टीनशेड में भूसा रखा गया और एक बीघे में हरे चारा की व्यवस्था की गई थी। बारिश में भीगा हुआ भूसा मवेशियों को खिलाया जाता है। चूनी, चोकर की व्यवस्था न होने के कारण सूखा भूसा मवेशियों को रास नहीं आ रहा है। पेट भर चारा न मिलने के कारण दर्जन भर मवेशियों की हालत खराब है। यहां पर 165 गोवंश थे, जिसमें एक गोवंश की सोमवार को मौत हो गई।
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मवेशियों को नहीं मिल पा रहा चारा-पानी- सीवीओ
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एसके तिवारी ने बताया कि उन्होंने दो दिन पहले थरियांव गोशाला का निरीक्षण किया था। मवेशियों में कोई बीमारी नहीं है। बस उन्हें पर्याप्त चारा और पानी नहीं मिल रहा है। इसी कारण से मवेशी कमजोर होकर बीमार हो रहे हैं। उन्होंने अपनी रिपोर्ट सीडीओ को दी है।
164 मवेशियों को दिया जाता है एक बोझ हरा चारा
गोशाला के मवेशियों के लिए एक बीघा हरा चारा बोया गया है। रोज एक बोझ चारा काटकर गोशाला आता है, लेकिन चारा कतरने की मशीन न होने के कारण समूचे हरे चारे को मवेशियों के सामने डाल दिया जाता है। ऐसे में गोशाला के 164 मवेशियों को एक बोझ चारे से एक-एक डंठल ही नसीब हो रही है।
भूसा रखने का नहीं बना है गोदाम
20 अन्ना मवेशियों को गोशाला में रखकर इसका उद्घाटन किया गया। पांच महीने में मवेशियों की संख्या 164 हो गई, लेकिन यहां पर मवेशियों के लिए भूसा का स्टाक करने का गोदाम नहीं है। जहां मवेशी बांधे जाते हैं, उसी टीनशेड के एक किनारे भूसा रख दिया जाता है। जो बारिश में भीगता है और धूप में गरम होता है। यही चारा खाने के बाद मवेशी बीमार हो जाते हैं।