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आएंगे गिरधर गोपाल, अगवानी को बेकरार
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
Updated Sat, 05 Sep 2015 12:38 AM IST
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बालगोपाल की अगवानी को मंदिरों के साथ घर-घर तैयारियां चल रहीं हैं। शहर में जगह-जगह राधाकृष्ण की भव्य झांकियां सजाई जा रही हैं। पुलिस लाइंस और पीएसी में कृष्ण जन्मोत्सव मनाने की तैयारियां को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उधर, बाजारों में दिनभर भीड़ लगी रही। बच्चे जहां खिलौनों की खरीद पर हठ करते नजर आए, वहीं महिलाएं कान्हा की पोशाक पर एक दूसरे से राय लेतीं रहीं।
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भगवान कृष्ण का जन्मदिन धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाने की तैयारियां जोरशोर के साथ चल रही हैं। शुक्रवार को सुबह से देर शाम तक झांकी सजाने के समान की खरीदारी होती रही। चौक बाजार में चुनरी, माला, पतंगी और रंगबिरंगी पन्नी खरीदने के लिए होड़ रही। बाल रूप श्रीकृष्ण के कपड़े 20 से 25 रुपये में बिके, जबकि चुनरी 10 रुपये से लेकर 50 रुपये तक दुकानदारों ने बिक्री की। जन्माष्टमी पर शाम 8 बजे से 9 बजे तक पुलिस मार्डल स्कूल के बच्चे तथा वाहिनी के कर्मचारी सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करेंगे। नौ बजे से 9.50 बजे तक भजन कीर्तन का कार्यक्रम होगा। इसके बाद रात 10 बजे तक श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसके बाद प्रसाद का वितरण होगा।
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इंसेट
गृहस्थ, वैष्णव एक दिन मनाएंगे जन्माष्टमी
पहली बार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन सिर्फ एक दिन शनिवार को ही मनाया जाएगा। इसके पहले एक दिन गृहस्थ लोग जन्माष्टमी का वृत रखते हुए पूजा अर्चना करते थे, जबकि दूसरे दिन रामनाम का गुरुमंत्र लेने वाले वैष्णव (साधु संत) जन्माष्टमी मनाते रहे हैं। आचार्य अशोक कुमार दीक्षित उर्फ राजू ने बताया कि जन्माष्टमी पर्व रोहणी नक्षत्र में मनाया जाता है। इससे पहले यह नक्षत्र दो दिन पड़ता था, लेकिन इस बार सिर्फ शनिवार को ही रोहणी नक्षत्र पड़ रहा है। अगले दिन यह नक्षत्र नहीं पहुंच रहा है। ऐसी हालत में गृहस्थ और वैष्णव दोनों शनिवार को ही जन्माष्टमी मनाएंगे।
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यहां बसते हैं मीरा के आराध्य गिरधर गोपाल
तहसील बिंदकी के गंगा तटवर्ती शिवराजपुर श्रीकृष्ण की दीवानी मीरा की भी तपोस्थली रहा है। शिवराजपुर में उनके हाथों से स्थापित गिरधर गोपाल की प्रतिमा आज भी विद्यमान है। भक्तिकाल मे संपूर्ण भारत में चर्चा का विषय बनी मीरा ने इस मूर्ति को चित्तौडग़ढ़ से लाकर तपोस्थली शिवराजपुर में स्थापित की थी। इस मंदिर के प्रबंधन के लिए चित्तौडग़ढ़ से धनराशि काफी अर्से तक आती रही है। यहां मंदिरों में सिद्धेश्वर, कपिलेश्वर, अंगदेश्वर, पंचवटेश्वर, मुंडेश्वर, भैरवश्वर, सगुनेश्वर आदि दर्जनों मंदिर रखरखाव के आभाव में जीर्ण शीर्ण दशा को पहुंच रहे हैं। पौराणिक स्थल में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद जी सरस्वती ने एक वर्ष रहकर साधना की थी।
हाहाकारी दंगल आज
मलवां विकास खंड के गांव बनियनखेड़ा में हाहाकारी दंगल का आयोजन गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी आयोजकों ने जन्माष्टमी पर्व पर किया है। यह जानकारी देते हुए रवींद्र कुमार ने बताया कि इस दंगल मेें मेरठ, जालौन, दिल्ली, बनारस, कानपुर, फतेहपुर, बांदा, हमीरपुर के मशहूर पहलवान अपने- अपने दांवपेंच दिखाकर कुश्ती का प्रर्दशन करेंगे।
डिघरुवा के बांके बिहारी मंदिर में उमड़ेंगे भक्त
डिघरुवा के प्राचीन बांके बिहारी लाल के मंदिर में भारी भीड़ जवाबी कीर्तन का लुत्फ उठाएगी। जगह- जगह भजन, कीर्तन, म्यूजिक के आयोजन किए गए है। नगर बिंदकी के प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर मेन बाजार में श्री कुंज बिहारी एजूकेशन ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। वहीं लोहाई मोड़, सुनहलाबाग, बटन धर्मशाला, लाहौरी मोहल्ले मे स्थित श्रीजगन्नाथ जी के प्राचीन मंदिर की सजावट पूरी करने के साथ ही कार्यक्रमों की रूप रेखा तैयार कर ली गई है। अमौली विकास खंड के गांव डिघरुवा के प्राचीन बांके बिहारी लाल मंदिर , बुढ़वां में ब्रह्मदेव बाबा, मलवां गिरधर गोपाल मंदिर, जिसकी स्थापना मीरा ने की थी। औंग के महावीर जी विराजमान मंदिर में वृहद कार्यक्रमों के आयोजन किए जाएंगे।