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Fatehpur News: ऑनलाइन बर्थ से कमाई पूरी, फिर रास्ते में सवारियों से अलग वसूली

Sun, 27 Sep 2026 12:20 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2026 12:20 AM IST
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Full earnings from the online berth, followed by collecting extra money from passengers along the way.
फोटो-16-स्लीपर बस में बर्थ के बीच ठूंसकर बैठाए गए यात्री। संवाद - फोटो : 1
फतेहपुर। लंबी दूरी के लिए चलने वाली स्लीपर बसों में सीटों को लेकर खेल जारी है। ऑनलाइन टिकट बुक करते समय यात्री को सीट या बर्थ नंबर मिलता है और वह उसी के आधार पर सफर की योजना बनाता है। रास्ते के कस्बों और चौराहों पर लोकल यात्रियों को बैठाने के बाद बस के भीतर सीटों का पूरा गणित बदल जाता है।
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यात्रियों का आरोप है कि कुछ चालक-परिचालक अतिरिक्त यात्रियों को बर्थ के बीच, गलियारे और उपलब्ध खाली जगहों पर बैठाकर किराया लेते हैं। यानी जिस बस में यात्री पहले ही बर्थ का किराया देकर जगह सुरक्षित कर चुका है, उसी में रास्ते से दूसरी सवारियों को जगह देने का खेल चलने का आरोप है। इससे पहले से टिकट लेकर यात्रा कर रहे यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा दोनों प्रभावित होती हैं।
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कमाई कुछ सौ की, खतरा सैकड़ों यात्रियों का
लोकल सवारियों से मिलने वाला अतिरिक्त किराया बस संचालकों के लिए भले ही छोटी कमाई हो, लेकिन क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने पर जोखिम कई गुना बढ़ सकता है। स्लीपर बस में बर्थ के बीच बैठाए गए यात्री आपात स्थिति में निकासी के रास्ते को प्रभावित कर सकते हैं। आग, टक्कर, पलटने या आगजनी की स्थिति में कुछ सेकेंड भी जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन सकते हैं।
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जिम्मेदार कौन, बस चालक या परमिटधारी
अगर किसी बस में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्री पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी केवल चालक-परिचालक तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। बस का परमिट, फिटनेस, यात्री क्षमता और संचालन की शर्तों की जांच भी जरूरी है। परिवहन विभाग के प्रवर्तन दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यात्रियों का कहना है कि यदि लंबी दूरी की बसों की नियमित जांच हो और रास्ते में अचानक निरीक्षण किया जाए तो ऐसी गतिविधियों पर रोक लग सकती है।


बर्थ बुक कराई थी, बैठने की जगह तक नहीं मिली
फतेहपुर से दिल्ली जा रहे खागा निवासी संदीप ने बताया कि उन्होंने मेक माई ट्रिप से स्लीपर बस की टिकट बुक की थी। बस कुछ दूर चली फिर रास्ते में रुपये लेकर कुछ सवारियां बैठा ली गईं। इन सवारियों में से कुछ को इन्हीं की सीट पर बैठा दिया गया। इससे यात्रा के दौरान परेशानी हुई। परिचालक से कहने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई।


सवाल जो जवाब मांगते हैं :
- ऑनलाइन बुकिंग के बाद रास्ते में अतिरिक्त यात्रियों को क्यों बैठाया जाता है।
- बस की स्वीकृत यात्री क्षमता की मौके पर जांच कितनी बार होती है।
- बर्थ के बीच बैठाए गए यात्रियों की जिम्मेदारी किसकी होगी।
- क्या अतिरिक्त यात्रियों का कोई टिकट या यात्रा रिकॉर्ड रखा जाता है।
- आपात स्थिति में इन यात्रियों के लिए सुरक्षित निकासी का रास्ता कितना उपलब्ध रहता है।
- परिवहन विभाग की ओर से इन बसों की नियमित जांच क्यों नहीं की जाती।


सभी ट्रैवल्स एजेंसियों को निर्धारित मानक से अधिक सवारियां न बैठाने की सख्त हिदायत दी गई है। स्लीपर बसों की चेकिंग के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। जांच के दौरान यदि किसी बस में मानक से अधिक सवारियां या सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं पाए जाते हैं तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
संतोष सिंह, एआरटीओ, प्रवर्तन

फोटो-16-स्लीपर बस में बर्थ के बीच ठूंसकर बैठाए गए यात्री। संवाद

फोटो-16-स्लीपर बस में बर्थ के बीच ठूंसकर बैठाए गए यात्री। संवाद- फोटो : 1

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