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फतेश्वर महादेव मंदिर में पूरी होती मुरादें
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
Updated Wed, 03 Aug 2016 12:57 AM IST
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खागा के फतेश्वर बाबा का मंदिर।
- फोटो : अमर उजाला
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अमनी के मजरा शाहीपुर स्थित फतेश्वर महादेव का भव्य मंदिर 500 साल पुराना है, जो भी भक्त यहां आकर माथा टेकता है, उसकी मुराद पूरी होती है। महाशिवरात्रि के दिन मेला और सावन के महीने में मंदिर के दर्शन और पूजा के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है। मंदिर की शोभा बढ़ाने के लिए पश्चिम और दक्षिण की ओर तालाब हैं।
ससुर खदेरी नदी से एक किलोमीटर उत्तर दिशा में खागा-किशनपुर रोड स्थित फतेश्वर महादेव मंदिर की विशाल शिवलिंग आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। शिवलिंग के बगल में नंदी और चाराें ओर मां पार्वती, लक्ष्मी-गणेश, हनुमानजी, चतुर्भुज माता की सफेद पत्थर की मूर्तियां लगी हैं। मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन शिव बारात निकाली जाती है। मेले का भी आयोजन होता है। सभी त्योहारों पर मंदिर में पूजा अर्चना की जाती है। शादी विवाहों में मंदिर की पूजा के बाद घर में कार्यक्रम शुरू होते हैं।
गांव के 80 वर्षीय राममनोहर मौर्य और 73 वर्षीय रामविशाल मौर्य ने बताया कि मंदिर की शिवलिंग को खोदने के लिए कई बार बदमाशों ने प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हुए थे। वहीं 92 वर्षीय ननकू उर्फ छुट्टा बाबा ने बताया कि किशनपुर कस्बा निवासी स्वर्गीय झब्बूलाल अग्रवाल के राजापुर निवासी दामाद शिवचरन को फांसी की सजा माफ कराने के लिए मनौती मांगी थी। सजा माफ होने के बाद उन्होंने और दामाद ने मिलकर चबूतरे की छोटी सी मंदिर को 84 वर्ष पहले विशालकाय रूप करवाया था।
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83 वर्षीय शिवमंगल कोरी ने बताया कि उनके बुजुर्गों ने बताया था कि शिवलिंग अपने आप जमीन से निकली थी। तभी से लोगों ने चबूतरा बनाकर पूजा करना शुरू कर दिया था। मंदिर के पुजारी चून बाबा ने बताया कि संकट में फंसे लोग मुराद पूरी होने के लिए मंदिर जरूर आते हैं।
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ससुर खदेरी नदी से एक किलोमीटर उत्तर दिशा में खागा-किशनपुर रोड स्थित फतेश्वर महादेव मंदिर की विशाल शिवलिंग आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। शिवलिंग के बगल में नंदी और चाराें ओर मां पार्वती, लक्ष्मी-गणेश, हनुमानजी, चतुर्भुज माता की सफेद पत्थर की मूर्तियां लगी हैं। मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन शिव बारात निकाली जाती है। मेले का भी आयोजन होता है। सभी त्योहारों पर मंदिर में पूजा अर्चना की जाती है। शादी विवाहों में मंदिर की पूजा के बाद घर में कार्यक्रम शुरू होते हैं।
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गांव के 80 वर्षीय राममनोहर मौर्य और 73 वर्षीय रामविशाल मौर्य ने बताया कि मंदिर की शिवलिंग को खोदने के लिए कई बार बदमाशों ने प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हुए थे। वहीं 92 वर्षीय ननकू उर्फ छुट्टा बाबा ने बताया कि किशनपुर कस्बा निवासी स्वर्गीय झब्बूलाल अग्रवाल के राजापुर निवासी दामाद शिवचरन को फांसी की सजा माफ कराने के लिए मनौती मांगी थी। सजा माफ होने के बाद उन्होंने और दामाद ने मिलकर चबूतरे की छोटी सी मंदिर को 84 वर्ष पहले विशालकाय रूप करवाया था।
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83 वर्षीय शिवमंगल कोरी ने बताया कि उनके बुजुर्गों ने बताया था कि शिवलिंग अपने आप जमीन से निकली थी। तभी से लोगों ने चबूतरा बनाकर पूजा करना शुरू कर दिया था। मंदिर के पुजारी चून बाबा ने बताया कि संकट में फंसे लोग मुराद पूरी होने के लिए मंदिर जरूर आते हैं।