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गुमनाम शिकायत ने खोली तंत्र की पोल
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फतेहपुर। मुख्यमंत्री के पोर्टल पर की गई एक गुमनाम शिकायत ने पंचायती राज और सहकारी बैंक महकमे में इन दिनों हलचल मचा रखी है। शिकायतकर्ता ने पूरी व्यवस्था की पोल खोलते हुए मुख्यमंत्री पोर्टल में लिखा है कि जिला सहकारी बैंक का एक कर्मचारी बैंक की नौकरी करते हुए ग्राम प्रधान बन बैठा है। उस पर भी खास बात यह है कि चार साल से वह बैंक की नौकरी और ग्राम प्रधानी एक साथ चला रहा है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐरायां विकास खंड की पुरइन ग्राम पंचायत में शैलेंद्र सिंह ग्राम प्रधान हैं। वह कोआपरेटिव बैंक के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी हैं। सिर्फ इतना ही नहीं उनके पिता सुरेंद्र सिंह भी बैंक के कर्मचारी हैं और वह क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए हैं। पिता-पुत्रों को चयनित हुए चार साल हो गए और किसी को भनक
तक नहीं लगी। हालांकि कोआपरेटिव बैंक नियमों की मानें तो बैंक बोर्ड से अनुमति के बिना उनका कोई कर्मचारी चुनाव नहीं लड़ सकता। बहरहाल शिकायत के माध्यम से इस प्रकरण का खुलासा होने पर डीपीआरओ कार्यालय ने कोऑपरेटिव प्रबंधन से पिता-पुत्र के बैंक कर्मचारी होने का साक्ष्य मांगा है।
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वर्जन
कोआपरेटिव बैंक के सचिव वीरेंद्र यादव ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आने के बाद पड़ताल की गई है। पता चला कि इन दोनों कर्मचारियों ने बिना अनुमति लिए ही चुनाव लड़ा और एक साथ दोनों पदों का संचालन कर रहे हैं। इन दोनों पर कार्रवाई के लिए बोर्ड की बैठक में मुद्दा रखा जाएगा। दोनों कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होनी है, यह बोर्ड ही तय करेगा।
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शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐरायां विकास खंड की पुरइन ग्राम पंचायत में शैलेंद्र सिंह ग्राम प्रधान हैं। वह कोआपरेटिव बैंक के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी हैं। सिर्फ इतना ही नहीं उनके पिता सुरेंद्र सिंह भी बैंक के कर्मचारी हैं और वह क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए हैं। पिता-पुत्रों को चयनित हुए चार साल हो गए और किसी को भनक
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तक नहीं लगी। हालांकि कोआपरेटिव बैंक नियमों की मानें तो बैंक बोर्ड से अनुमति के बिना उनका कोई कर्मचारी चुनाव नहीं लड़ सकता। बहरहाल शिकायत के माध्यम से इस प्रकरण का खुलासा होने पर डीपीआरओ कार्यालय ने कोऑपरेटिव प्रबंधन से पिता-पुत्र के बैंक कर्मचारी होने का साक्ष्य मांगा है।
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कोआपरेटिव बैंक के सचिव वीरेंद्र यादव ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आने के बाद पड़ताल की गई है। पता चला कि इन दोनों कर्मचारियों ने बिना अनुमति लिए ही चुनाव लड़ा और एक साथ दोनों पदों का संचालन कर रहे हैं। इन दोनों पर कार्रवाई के लिए बोर्ड की बैठक में मुद्दा रखा जाएगा। दोनों कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होनी है, यह बोर्ड ही तय करेगा।