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Fatehpur News: चलती ट्रेन में गोली मारकर हत्या के दोषी तीन सगे भाइयों समेत चार को उम्रकैद
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फतेहपुर। चलती ट्रेन में गोली मारकर हत्या के मामले में सोमवार को तीन सगे भाइयों और एक अधिवक्ता को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने प्रत्येक दोषी पर 1.05 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला सोमवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या दो के न्यायाधीश अजय कुमार सिंह प्रथम की अदालत ने सुनाया।
खागा कोतवाली क्षेत्र के कटोघन गांव निवासी माघी ने गांव के सुरेश सिंह के खिलाफ हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मुकदमे की सुनवाई में 21 दिसंबर 2002 को सुरेश, भाई ओंकार सिंह और भतीजे श्यामेंद्र के साथ मुकदमे की तारीख पर पैसेंजर ट्रेन से फतेहपुर आ रहा था। सुरेश लाइसेंसी बंदूक और कारतूस की बेल्ट लिए था।
रमवां स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचते ही कटोघन गांव निवासी सगे भाई रामचंद्र, माघी, लालमन और बैजूपुर गांव निवासी कृष्णपाल तमंचे लेकर बोगी में घुस गए। इसके बाद कृष्णपाल ने सुरेश पर फायर किया, जिससे गोली लगने पर वह गिर पड़ा। इसके बाद माघी ने दोबारा फायर किया। इससे सुरेश की मौत हो गई।
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रामचंद्र ने सुरेश की बंदूक और लालमन ने कारतूस की बेल्ट निकाल ली। इसके बाद चारों ने लात मारकर शव को ट्रेन के नीचे गिरा दिया और बंदूक-कारतूस लेकर भाग गए थे। लालमन ने खुद को प्रयागराज का अधिवक्ता बताया था। कोर्ट ने छह गवाहों के बयान सुनने के बाद सगे भाई रामचंद्र, माघी, लालमन और बैजूपुर गांव निवासी कृष्णपाल को दोषी करार देकर उम्रकैद की सजा सुनाई है।
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खागा कोतवाली क्षेत्र के कटोघन गांव निवासी माघी ने गांव के सुरेश सिंह के खिलाफ हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मुकदमे की सुनवाई में 21 दिसंबर 2002 को सुरेश, भाई ओंकार सिंह और भतीजे श्यामेंद्र के साथ मुकदमे की तारीख पर पैसेंजर ट्रेन से फतेहपुर आ रहा था। सुरेश लाइसेंसी बंदूक और कारतूस की बेल्ट लिए था।
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रमवां स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचते ही कटोघन गांव निवासी सगे भाई रामचंद्र, माघी, लालमन और बैजूपुर गांव निवासी कृष्णपाल तमंचे लेकर बोगी में घुस गए। इसके बाद कृष्णपाल ने सुरेश पर फायर किया, जिससे गोली लगने पर वह गिर पड़ा। इसके बाद माघी ने दोबारा फायर किया। इससे सुरेश की मौत हो गई।
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रामचंद्र ने सुरेश की बंदूक और लालमन ने कारतूस की बेल्ट निकाल ली। इसके बाद चारों ने लात मारकर शव को ट्रेन के नीचे गिरा दिया और बंदूक-कारतूस लेकर भाग गए थे। लालमन ने खुद को प्रयागराज का अधिवक्ता बताया था। कोर्ट ने छह गवाहों के बयान सुनने के बाद सगे भाई रामचंद्र, माघी, लालमन और बैजूपुर गांव निवासी कृष्णपाल को दोषी करार देकर उम्रकैद की सजा सुनाई है।