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कोहरा का कहर : सूर्यदेव गायब, ठंड बढ़ी

Fri, 02 Dec 2016 12:18 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर Updated Fri, 02 Dec 2016 12:18 AM IST
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Fog havoc: Surya disappeared, grew cold
शहर के हरिहरगंज रेलवे ओवरब्रिज पर कोहरे से रेंगते वाहन लाइट जलाकर चलते हुए - फोटो : Amar ujala
मौसम बदलने से जनजीवन प्रभावित होने लगा है। गुरुवार को भी कोहरे ने पूरे दिन आसमान को ढंके रखा। असर यह हुआ कि सूरज को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला। सुबह घने कोहरे ने वाहनों की रफ्तार पर ब्रेेक लगा दिया। कोहरे के साथ चलीं सर्द हवाओं से ठंड बढ़ गई है। स्कूल और कालेज में छात्र और छात्राओं की उपस्थिति कम हो गई। कोहरे के कारण स्कूली बस और वैन देरी से कैंपस में दाखिल हो सकीं। नौकरी पेशा करने वाले देर से अपने-अपने मुकाम पर पहुंचे।
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मौसम के बदल रहे मिजाज का असर 48 घंटे से देखने को मिलने लगा है।
गुरुवार को कोहरे ने अपना कहर दिखाया। आठ बजे तक कोहरा घनी चादर बना रहा। इसके बाद छंटने और छाने का दौर 10 बजे तक चला। इस दौरान सड़क पर गिने-चुने वाहन ही नजर आए। वाहनों में दोपहर 11 बजे तक फॉग लाइट जलती दिखाई दीं। कोहरे के साथ सर्द हवाओं के चलने से तमाम जगह पर लोग अलाव की आंच सेकते देखे गए। स्कूल और कोचिंग जाने वाले छात्र और छात्राएं कोहरे और हवा के बीच बस और वैन का इंतजार ककोहरा पड़ने से किसान के चेहरे पर संशय बढ़ता जा रहा है। पाला गिरने से आलू की फसल मुरझाने के आसार प्रबल हो गए हैं। दलहन और तिलहन भी अछूता नहीं रह सका है। कोहरे के साथ चलने वाली हवाओं से तिलहन के फूल झड़ने की शुरूआत हो गई है। बिंदकी तहसील के कोरसम गांव के काश्तकार कर्णवीर सिंह परिहार का कहना है कि कोहरा से आलू पर ज्यादा प्रभाव पड़ना है।
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कोहरा और सर्द हवाएं चलने से दिहाड़ी मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आ रहे हैं। शहर के चौगलिया और पीएचसी मोड़ पर मजदूरी के लिए जमा होने वाले ग्रामीण कंपकंपाते हुए नजर आए। सुबह 10 बजे तक ज्यादातर को काम नहीं मिला। कई मजदूर साइकिल में टंगा झोला निहारते हुए यह अपने अपने गांव को चले गए।
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बुधवार से जिले में शुरू हुआ कोहरे का कहर बढ़ता ही जा रहा है। गुरुवार को पूरे दिन सूरज नहीं निकला। इससे रात को आठ बजते ही कोहरे ने हाईवे को अपनी आगोश में ले लिया। साढ़े नौ बजते-बजते शहर के भीतरी इलाके भी घने कोहरे से पट गए। सौ मीटर दूर के लोग भी साफ नहीं दिख रहे थे। हाईवे पर वाहनों को करीबी ढाबे का सहारा लेना पड़ा। जिन्हें बहुत ही जरूरी था वे डिपर लाइटों का प्रयोग करते हुए रेंगते हुए निकले। कोहरे का असर बाजारों में भी देखने को मिला। आम दिनाें में रात साढ़े नौ बजे तक दिखने वाली खरीदारों की भीड़ कोहरा देखकर शाम ढलने के साथ खिसकनी शुरू हो गई। रात साढ़े नौ बजे कोहरा से चौराहा सूने हो गए। इक्का दुक्का लोग ही राह चलते नजर आए।


 दो दिन से पड़ रहे कोहरे और चल रही सर्द हवाओं ने किसानों के चेहरे पर पसीना ला दिया है। आलू के साथ दलहन और तिलहन की फसल खराब होने की आंशका बढ़ने लगी है। हालांकि जिला कृषि अधिकारी रविकांत का कहना है कि अभी खेती-बाड़ी पर कोहरे का असर नहीं है। हां अगर लगातार तापमान गिरता जाता है तो दिक्कत शुरू हो जाएगी क्योंकि तब कोहरा पाला में तब्दील हो चुका होगा। इससे राई और सरसो पर माहू लगने की संभावनाएं प्रबल हो जाएंगी। इसके अलावा आलू की फसल भी प्रभावित होगी। उधर, चंद्रशेखर कृषि विज्ञान केंद्र थरियांव के कृषि विशेषज्ञ डॉ. नौशाद आलम भी ऐसा ही मानते हैं। बकौल नौशाद, मौसम के बदलाव को देखते हुए किसानों को चौकन्ना हो जाना चाहिए। आलू को झुलसने से बचाने के लिए दवा का छिड़काव किया जाए। 
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