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Fatehpur News: गंगा में उफान से पांच गांवों से टूटा संपर्क, संकट में सैकड़ों परिवार
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फोटो-22-बाढ़ के पानी से घिरा मल्हू खेड़ा गांव। संवाद
- फोटो : संवाद
औंग (फतेहपुर)। मलवां ब्लॉक के कटरी क्षेत्र में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर पहुंच गया है। इससे हालात गंभीर होते जा रहे हैं। गंगा 101.08 मीटर पर बह रही है, जबकि खतरे का निशान 100.86 मीटर है। बाढ़ के चलते पांच गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। अन्य पांच गांवों में बाढ़ का पानी भरने लगा है। बावजूद इसके प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य अभी भी न के बराबर हैं।
गंगा और पांडु नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण कालीकुंडी, सदनहा, जाड़े का पुरवा, बिंदकी फार्म और मदारपुर गांव में बने घरों में पानी भरने लगा है। कालीकुंडी और सदनहा का बाहरी दुनिया से संपर्क कट चुका है। बड़ाखेड़ा, औसरीखेड़ा, मल्लूखेड़ा, बेनीखेड़ा और बंबूरीखेड़ा जैसे गांव भी बाढ़ की चपेट में हैं। इन क्षेत्रों में करीब 1200 लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि राहत शिविर सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। न तो साफ-सफाई है, न पीने के पानी, भोजन या मवेशियों के चारे की भी व्यवस्था नहीं की गई है।
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किसानों पर दोहरी मार
बाढ़ ने सबसे ज्यादा किसानों की कमर तोड़ी है। खेतों में खड़ी सब्जियां और फूलों की फसलें पानी में डूब चुकी हैं। इससे बड़ी आर्थिक क्षति हुई है। करीब 1500 हेक्टेयर में फैली फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसानों का कहना है कि यह बाढ़ सिर्फ मौजूदा फसल ही नहीं, बल्कि आने वाले सीजन की बोआई और उनकी पूरी आजीविका को भी प्रभावित कर रही है।
किसानों की बर्बाद हुई फसलें
- 1000 हेक्टेयर में सब्जियां (लौकी, मिर्च, हल्दी आदि)
- 250 हेक्टेयर में फूल (गेंदा, गुलाब, जाफरी)
- 250 हेक्टेयर में अन्य सब्जियां।
बच्चों और मवेशियों के साथ सड़क किनारे काट रहे रात
कालीकुंडी निवासी प्रांशु निषाद ने बताया कि गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पूरे इलाके में भय और चिंता का माहौल है। सदनहा, जाड़े का पुरवा, नयाखेड़ा, बड़ाखेड़ा और बिंदकी फार्म जैसे गांवों में पानी घरों तक घुस चुका है। मदारपुर के सीताराम और राजाराम सहित कई ग्रामीणों के घरों में पानी भर गया है।
नयाखेड़ा की सुनीता देवी का कहना है कि बाढ़ का पानी गांव में भर गया है। राहत शिविर अब तक नहीं लगाए गए हैं। इससे वह बच्चों और मवेशियों के साथ सड़क किनारे टेंट में रहने को मजबूर हैं।
कालीकुंडी के राजाराम ने बताया कि उनके खेत पहले ही डूब चुके थे। अब घरों में भी पानी भर गया है। प्रशासनिक मदद नहीं पहुंची है, इसलिए सुरक्षित स्थान पर खुद ही जाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रशासन का दावा, जल्द मिलेगी राहत
बाढ़ प्रभारी अधिकारी एसएल वर्मा का कहना है कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में निगरानी की जा रही है। जल्द सभी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे।
तहसीलदार बिंदकी अचलेश सिंह ने बताया कि महुआ घाटी में राहत शिविर के लिए टेंट भेजे गए हैं। आशापुर पंचायत भवन में भोजन और ठहरने की व्यवस्था की गई है। जैसे ही लोग शिविरों में पहुंचेंगे, अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
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गंगा और पांडु नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण कालीकुंडी, सदनहा, जाड़े का पुरवा, बिंदकी फार्म और मदारपुर गांव में बने घरों में पानी भरने लगा है। कालीकुंडी और सदनहा का बाहरी दुनिया से संपर्क कट चुका है। बड़ाखेड़ा, औसरीखेड़ा, मल्लूखेड़ा, बेनीखेड़ा और बंबूरीखेड़ा जैसे गांव भी बाढ़ की चपेट में हैं। इन क्षेत्रों में करीब 1200 लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
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ग्रामीणों का आरोप है कि राहत शिविर सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। न तो साफ-सफाई है, न पीने के पानी, भोजन या मवेशियों के चारे की भी व्यवस्था नहीं की गई है।
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किसानों पर दोहरी मार
बाढ़ ने सबसे ज्यादा किसानों की कमर तोड़ी है। खेतों में खड़ी सब्जियां और फूलों की फसलें पानी में डूब चुकी हैं। इससे बड़ी आर्थिक क्षति हुई है। करीब 1500 हेक्टेयर में फैली फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसानों का कहना है कि यह बाढ़ सिर्फ मौजूदा फसल ही नहीं, बल्कि आने वाले सीजन की बोआई और उनकी पूरी आजीविका को भी प्रभावित कर रही है।
किसानों की बर्बाद हुई फसलें
- 1000 हेक्टेयर में सब्जियां (लौकी, मिर्च, हल्दी आदि)
- 250 हेक्टेयर में फूल (गेंदा, गुलाब, जाफरी)
- 250 हेक्टेयर में अन्य सब्जियां।
बच्चों और मवेशियों के साथ सड़क किनारे काट रहे रात
कालीकुंडी निवासी प्रांशु निषाद ने बताया कि गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पूरे इलाके में भय और चिंता का माहौल है। सदनहा, जाड़े का पुरवा, नयाखेड़ा, बड़ाखेड़ा और बिंदकी फार्म जैसे गांवों में पानी घरों तक घुस चुका है। मदारपुर के सीताराम और राजाराम सहित कई ग्रामीणों के घरों में पानी भर गया है।
नयाखेड़ा की सुनीता देवी का कहना है कि बाढ़ का पानी गांव में भर गया है। राहत शिविर अब तक नहीं लगाए गए हैं। इससे वह बच्चों और मवेशियों के साथ सड़क किनारे टेंट में रहने को मजबूर हैं।
कालीकुंडी के राजाराम ने बताया कि उनके खेत पहले ही डूब चुके थे। अब घरों में भी पानी भर गया है। प्रशासनिक मदद नहीं पहुंची है, इसलिए सुरक्षित स्थान पर खुद ही जाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रशासन का दावा, जल्द मिलेगी राहत
बाढ़ प्रभारी अधिकारी एसएल वर्मा का कहना है कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में निगरानी की जा रही है। जल्द सभी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे।
तहसीलदार बिंदकी अचलेश सिंह ने बताया कि महुआ घाटी में राहत शिविर के लिए टेंट भेजे गए हैं। आशापुर पंचायत भवन में भोजन और ठहरने की व्यवस्था की गई है। जैसे ही लोग शिविरों में पहुंचेंगे, अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।