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साढ़े पांच करोड़ खर्च, 70 फीसदी स्कूल नहीं हुए रोशन
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13 जनवरी को अमर उजाला के पेज दो पर प्रकाशित खबर की पीडीएफ
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। करोड़ों खर्च होने के बाद भी जिले के 1550 परिषदीय विद्यालय रोशन नहीं हो पाए। बेसिक शिक्षा विभाग से जारी बजट में बिजली विभाग ने स्कूलों में कनेक्शन देने के नाम पर बड़ा खेल किया है।
स्कूलों की संख्या से ज्यादा कनेक्शन का पैसा लेने के बावजूद 70 फीसदी स्कूल अंधेरे में हैं। जबकि इस पर साढ़े पांच करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च हो चुकी है।
जिले के कुल 2650 स्कूलों में ग्रामीण क्षेत्र के बहुतायत परिषदीय स्कूल अभी तक बिजली कनेक्शन से वंचित हैं। खास बात ये है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने कनेक्शन विहीन स्कूलों में भी वायरिंग की औपचारिकता पूरी करा रखी है।
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इसके साथ ही लगाए गए पंखे आदि भी गायब हो चुके हैं। ऐसे में स्कूलों में होने वाली चोरियों के शोपीस बने पंखे मुख्य कारण हैं। चोर सीधे पंखा और गैस सिलिंडरों को निशाना बना रहे हैं।
खास बात तो ये है कि विभाग का साढ़े पांच करोड़ खर्च भी हो गया, लेकिन इसका लाभ बच्चों को नाम मात्र ही मिल पाया है। स्थिति ये बन रही है कि जिन स्कूलों में कनेक्शन भी हैं, वहां के पंखे आदि चोरी होने के कारण बच्चों को कनेक्शन का लाभ नहीं मिल रहा है।
जिले में दो बार अधिशासी अभियंता विद्युत की जिम्मेदारी संभाल चुके सरोज कुमार का कहना है उनके कार्यकाल में दो बार चुनाव के समय कनेक्शन के लिए धनराशि आई थी।
उन्होंने करीब सात सौ कनेक्शन जोड़े गए थे, लेकिन बाद में लोग केबल खोल ले गए। केबल की सुरक्षा की जिम्मेदारी बिजली विभाग की नहीं है। उनके कर्मचारी मीटर लगाने गए थे, लेकिन केबल न होने के कारण वह लौट आए।
ऐसे में कनेक्शन शो नहीं हो पाए होंगे। इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग को लिखा गया था, लेकिन उसने केबल की व्यवस्था नहीं की थी। यही कारण है कि कुछ स्कूलों में कनेक्शनों के लेखा जोखा गायब है।
जितनी भी धनराशि बेसिक शिक्षा विभाग ने जमा की थी, उसकी रसीद दी गई थी। बेसिक शिक्षा विभाग रसीद प्रस्तुत कर जमा धनराशि का हिसाब किताब कर सकता है।
बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पुरानी पत्रावलियां स्टोर में डंप हैं। इनकी तलाश के लिए दो लिपिक लगाए गए हैं। पत्रावली मिलने पर बिजली विभाग से पत्राचार किया जाएगा।
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स्कूलों की संख्या से ज्यादा कनेक्शन का पैसा लेने के बावजूद 70 फीसदी स्कूल अंधेरे में हैं। जबकि इस पर साढ़े पांच करोड़ से ज्यादा की रकम खर्च हो चुकी है।
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जिले के कुल 2650 स्कूलों में ग्रामीण क्षेत्र के बहुतायत परिषदीय स्कूल अभी तक बिजली कनेक्शन से वंचित हैं। खास बात ये है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने कनेक्शन विहीन स्कूलों में भी वायरिंग की औपचारिकता पूरी करा रखी है।
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इसके साथ ही लगाए गए पंखे आदि भी गायब हो चुके हैं। ऐसे में स्कूलों में होने वाली चोरियों के शोपीस बने पंखे मुख्य कारण हैं। चोर सीधे पंखा और गैस सिलिंडरों को निशाना बना रहे हैं।
खास बात तो ये है कि विभाग का साढ़े पांच करोड़ खर्च भी हो गया, लेकिन इसका लाभ बच्चों को नाम मात्र ही मिल पाया है। स्थिति ये बन रही है कि जिन स्कूलों में कनेक्शन भी हैं, वहां के पंखे आदि चोरी होने के कारण बच्चों को कनेक्शन का लाभ नहीं मिल रहा है।
जिले में दो बार अधिशासी अभियंता विद्युत की जिम्मेदारी संभाल चुके सरोज कुमार का कहना है उनके कार्यकाल में दो बार चुनाव के समय कनेक्शन के लिए धनराशि आई थी।
उन्होंने करीब सात सौ कनेक्शन जोड़े गए थे, लेकिन बाद में लोग केबल खोल ले गए। केबल की सुरक्षा की जिम्मेदारी बिजली विभाग की नहीं है। उनके कर्मचारी मीटर लगाने गए थे, लेकिन केबल न होने के कारण वह लौट आए।
ऐसे में कनेक्शन शो नहीं हो पाए होंगे। इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग को लिखा गया था, लेकिन उसने केबल की व्यवस्था नहीं की थी। यही कारण है कि कुछ स्कूलों में कनेक्शनों के लेखा जोखा गायब है।
जितनी भी धनराशि बेसिक शिक्षा विभाग ने जमा की थी, उसकी रसीद दी गई थी। बेसिक शिक्षा विभाग रसीद प्रस्तुत कर जमा धनराशि का हिसाब किताब कर सकता है।
बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पुरानी पत्रावलियां स्टोर में डंप हैं। इनकी तलाश के लिए दो लिपिक लगाए गए हैं। पत्रावली मिलने पर बिजली विभाग से पत्राचार किया जाएगा।

13 जनवरी को अमर उजाला के पहले पेज पर छपी खबर की पीडीएफ- फोटो : FATEHPUR