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Fatehpur News: सावन का पहला सोमवार आज, सजे शिवालय

Mon, 14 Jul 2025 01:15 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 14 Jul 2025 01:15 AM IST
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First Monday of Sawan today, decorated Shivalaya
फतेहपुर। सावन के पहले सोमवार की तैयारियां रविवार को पूरे दिन शिवालयों में चलती रहीं। नगरपालिका कर्मियों के अलावा शिवभक्त व्यवस्था दुरुस्त करने में लगे रहे।
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सिद्धपीठ तांबेश्वर मंदिर में सावन के पहले सोमवार को उमड़ने वाली भीड़ के मद्देनजर रविवार दोपहर से ही नगर पालिका कर्मी व्यवस्था दुरुस्त करने में लगे रहे। मंदिर के गेट से लेकर चौराहे तक साफ सफाई की गई। भीड़ काबू करने के लिए बैरिकेडिंग की गई। इससे पुरुष और महिला श्रद्धालु अलग-अलग लाइन से मंदिर के अंदर जा सकें। वहीं जागेश्वरधाम, थवईश्वर धाम, डूढ़ेश्वर धाम, कुंडेश्वर धाम समेत जिले में भगवान शिव के सिद्धपीठ मंदिर हैं। यहां पर सावन के सोमवार को जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। श्रद्धालुओं को संभालने के लिए पुलिस कर्मी भी लगाए गए हैं।
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सावन हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष का पांचवां महीना ईस्वी कैलेंडर के जुलाई या अगस्त माह में पड़ता है। इसे वर्षा ऋतु का महीना या पावस ऋतु भी कहा जाता है, क्योंकि यह बारिश का समय होता है। इस माह में कई महत्वपूर्ण त्योहार मनाए जाते हैं। इसमें हरियाली तीज, रक्षाबंधन, नागपंचमी प्रमुख हैं। सावन में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है। इस माह में पड़ने वाले सोमवार सावन के सोमवार कहे जाते हैं, जिनमें महिलाएं विशेष तौर से कन्याएं भगवान शिव के निमित्त व्रत रखती हैं।
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ऐसे करें भगवान शिव की आराधना

सावन मास में भगवान शिव की पूजा उनके परिवार के सदस्यों संग करनी चाहिए। इस माह में भगवान शिव के रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है।
सावन के सोमवार के दिन व्रत रखकर बेल पत्र, दूध, धतूरा, भांग का भोग लगाकर शिव जी को प्रसन्न कर सकते हैं। इसके साथ ओम नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करके भगवान से अपनी मनोकामना पूर्ति कर सकते हैं।


महादेव को प्रिय है सावन

पंडित दिनेश महाराज बताते हैं कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब सनत कुमारों ने भगवान शिव से सावन महीना प्रिय होने का कारण पूछा, तो उन्होंने बताया कि देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्यागने से पहले महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अगले जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने युवावस्था में सावन महीने में निराहार रहकर कठोर व्रत किया और शिव को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया। इसके बाद ही महादेव के लिए यह विशेष हो गया।
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