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चेहते ठेकेदार को काम देने के लिए नियमों में कर दिया खेल
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बहुआ के शास्त्री नगर में स्थित बरातशाला। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। कमीशनबाजी के चक्कर में अधिकारी किस कदर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, इसका ताजा मामला नगर पंचायत बहुआ में सामने आया है। यहां ईओ और जेई ने बिना हैसियत प्रमाणपत्र के चहेते ठेकेदार को बरातशाला का ठेका के दिया।
शिकायत पर जब डीएम ने कमेटी गठित करके जांच कराई तो सारी गड़बड़ी सामने आ गई। डीएम ने विभागीय और कठोर दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति शासन से की है।
नगर पंचायत बहुआ के वार्ड तीन शास्त्री नगर में बरातशाला के नवीनीकरण के लिए ई-निविदा 18 से 24 जुलाई 2020 के मध्य जारी की गईं। निर्धारित तिथि तक सिर्फ दो निविदाएं आने के कारण प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया।
इसके बाद अगली निविदा का प्रकाश 20 अगस्त 2020 को किया गया। निविदाओं की पात्रता के लिए जो शर्तें नगर पंचायत बहुआ ने रखी थीं, उसमें निविदादाता का हैसियत प्रमाणपत्र भी शामिल था।
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31 अगस्त 2020 की शाम चार बजे निविदाएं टेंडर समिति के समक्ष खोली गईं। पांच ई-निविदाएं प्राप्त हुई थीं, इनमें दो फर्मों को ही तकनीकी रूप से पात्र पाया गया जबकि तीन को अभिलेख पूर्ण न होने के कारण निरस्त कर दिया गया।
स्वीकृत निविदाओं की तुलना करने के बाद ठेका मेसर्स एसके द्विवेदी कांट्रैक्टर, जगदीश कर्वी चित्रकूट को दे दिया गया। इसके बाद कार्यादेश जारी करने के प्रस्ताव पर टेंडर समिति में शामिल नगर पंचायत बहुआ के ईओ, अवर अभियंता और लिपिक की सील और हस्ताक्षर हुए।
इस मामले की शिकायत सदर विधायक विक्रम सिंह ने जिलाधिकारी से की तो तीन सदस्यीय कमेटी को जांच सौंप दी गई। जांच कमेटी के अध्यक्ष एसडीएम सदर बनाए गए।
जबकि एक्सईएन पीडब्ल्यूडी (प्रांतीय खंड) और वरिष्ठ कोषाधिकारी फतेहपुर को बतौर सदस्य शामिल किया गया। कमेटी की जांच में सामने आया कि बरातशाला के नवीनीकरण का ठेका जिस फर्म को दिया गया उसके पास हैसियत प्रमाणपत्र नहीं था।
इसके अलावा, फर्म को काम की स्वीकृति प्रदान करने के लिए जो प्रस्ताव नोट तैयार किया गया, उसमें नगर पंचायत बहुआ के ईओ, जेई और लिपिक के हस्ताक्षर और सील तो थे लेकिन नगर पंचायत अध्यक्ष की केवल सील लगी थी उनके हस्ताक्षर नहीं थे।
कमेटी ने ईओ नगर पंचायत बहुआ को नियम विरुद्ध तरीके से फर्म को काम का ठेका देने का दोषी पाया और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की।
जिलाधिकारी ने इस जांच रिपोर्ट के आधार पर अपनी आख्या 28 अगस्त 2021 को प्रमुख सचिव नगर विकास अनुभाग एक लखनऊ भेज दी। डीएम ने आख्या में लिखा कि निविदा प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन नहीं किया गया।
इस पर उन्होंने ईओ नगर पंचायत बहुआ राजकुमार और अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग गोविंद प्रसाद के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति कर दी।
तीन महीने बाद भी ईओ पर कार्रवाई नहीं
इसे राजनीतिक हस्तक्षेप कहें या फिर शासनस्तर तक सेटिंग कि डीएम की जांच रिपोर्ट अगस्त माह में जाने के बाद भी अभी तक ईओ और जेई के खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में नहीं आई है। गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ शासनस्तर से कार्रवाई न होना कई सवाल भी खड़े कर रहा है।
बरातशाला का ठेका जिस फर्म को दिया गया था। उसने बैंक से जारी सालवेंसी लगाई थी। इसीलिए हैसियत प्रमाणपत्र पर ध्यान नहीं दिया गया। जांच के बाद क्या रिपोर्ट आगे बढ़ाई गई है इसकी जानकारी नहीं उन्हें नहीं है। - राजकुमार, ईओ नगर पंचायत बहुआ।
बरातशाला की टेंडर प्रक्रिया में घोर लापरवाही सामने आई थी। ईओ और जेई के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। कार्रवाई शासनस्तर से होनी है, क्यों नहीं हुई, इसकी जानकारी अभी नहीं है। वह एक-दो दिन में फिर से रिमांइडर भेजेंगी। कार्रवाई हरहाल में होगी। - अपूर्वा दुबे, जिलाधिकारी।
बरातशाला में गड़बड़ी की जानकारी पर उन्होंने शिकायत की थी। जांच में आरोप भी सही पाए गए थे। अभी तक इस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इसकी जानकारी की जाएगी। कार्रवाई कराई जाएगी। - विक्रम सिंह, विधायक सदर।
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शिकायत पर जब डीएम ने कमेटी गठित करके जांच कराई तो सारी गड़बड़ी सामने आ गई। डीएम ने विभागीय और कठोर दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति शासन से की है।
नगर पंचायत बहुआ के वार्ड तीन शास्त्री नगर में बरातशाला के नवीनीकरण के लिए ई-निविदा 18 से 24 जुलाई 2020 के मध्य जारी की गईं। निर्धारित तिथि तक सिर्फ दो निविदाएं आने के कारण प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया।
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इसके बाद अगली निविदा का प्रकाश 20 अगस्त 2020 को किया गया। निविदाओं की पात्रता के लिए जो शर्तें नगर पंचायत बहुआ ने रखी थीं, उसमें निविदादाता का हैसियत प्रमाणपत्र भी शामिल था।
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31 अगस्त 2020 की शाम चार बजे निविदाएं टेंडर समिति के समक्ष खोली गईं। पांच ई-निविदाएं प्राप्त हुई थीं, इनमें दो फर्मों को ही तकनीकी रूप से पात्र पाया गया जबकि तीन को अभिलेख पूर्ण न होने के कारण निरस्त कर दिया गया।
स्वीकृत निविदाओं की तुलना करने के बाद ठेका मेसर्स एसके द्विवेदी कांट्रैक्टर, जगदीश कर्वी चित्रकूट को दे दिया गया। इसके बाद कार्यादेश जारी करने के प्रस्ताव पर टेंडर समिति में शामिल नगर पंचायत बहुआ के ईओ, अवर अभियंता और लिपिक की सील और हस्ताक्षर हुए।
इस मामले की शिकायत सदर विधायक विक्रम सिंह ने जिलाधिकारी से की तो तीन सदस्यीय कमेटी को जांच सौंप दी गई। जांच कमेटी के अध्यक्ष एसडीएम सदर बनाए गए।
जबकि एक्सईएन पीडब्ल्यूडी (प्रांतीय खंड) और वरिष्ठ कोषाधिकारी फतेहपुर को बतौर सदस्य शामिल किया गया। कमेटी की जांच में सामने आया कि बरातशाला के नवीनीकरण का ठेका जिस फर्म को दिया गया उसके पास हैसियत प्रमाणपत्र नहीं था।
इसके अलावा, फर्म को काम की स्वीकृति प्रदान करने के लिए जो प्रस्ताव नोट तैयार किया गया, उसमें नगर पंचायत बहुआ के ईओ, जेई और लिपिक के हस्ताक्षर और सील तो थे लेकिन नगर पंचायत अध्यक्ष की केवल सील लगी थी उनके हस्ताक्षर नहीं थे।
कमेटी ने ईओ नगर पंचायत बहुआ को नियम विरुद्ध तरीके से फर्म को काम का ठेका देने का दोषी पाया और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की।
जिलाधिकारी ने इस जांच रिपोर्ट के आधार पर अपनी आख्या 28 अगस्त 2021 को प्रमुख सचिव नगर विकास अनुभाग एक लखनऊ भेज दी। डीएम ने आख्या में लिखा कि निविदा प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन नहीं किया गया।
इस पर उन्होंने ईओ नगर पंचायत बहुआ राजकुमार और अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग गोविंद प्रसाद के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति कर दी।
तीन महीने बाद भी ईओ पर कार्रवाई नहीं
इसे राजनीतिक हस्तक्षेप कहें या फिर शासनस्तर तक सेटिंग कि डीएम की जांच रिपोर्ट अगस्त माह में जाने के बाद भी अभी तक ईओ और जेई के खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में नहीं आई है। गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ शासनस्तर से कार्रवाई न होना कई सवाल भी खड़े कर रहा है।
बरातशाला का ठेका जिस फर्म को दिया गया था। उसने बैंक से जारी सालवेंसी लगाई थी। इसीलिए हैसियत प्रमाणपत्र पर ध्यान नहीं दिया गया। जांच के बाद क्या रिपोर्ट आगे बढ़ाई गई है इसकी जानकारी नहीं उन्हें नहीं है। - राजकुमार, ईओ नगर पंचायत बहुआ।
बरातशाला की टेंडर प्रक्रिया में घोर लापरवाही सामने आई थी। ईओ और जेई के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है। कार्रवाई शासनस्तर से होनी है, क्यों नहीं हुई, इसकी जानकारी अभी नहीं है। वह एक-दो दिन में फिर से रिमांइडर भेजेंगी। कार्रवाई हरहाल में होगी। - अपूर्वा दुबे, जिलाधिकारी।
बरातशाला में गड़बड़ी की जानकारी पर उन्होंने शिकायत की थी। जांच में आरोप भी सही पाए गए थे। अभी तक इस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इसकी जानकारी की जाएगी। कार्रवाई कराई जाएगी। - विक्रम सिंह, विधायक सदर।