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दो माह पहले पुलिस ने ही हाजी रजा को बताया था सभ्रांत नागरिक
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फतेहपुर। हिस्ट्रीशीटर हाजी रजा की पुलिस में गहरी पैठ सामने आई है। थाना और चौकी स्तर पर सपा की राजनीति करने वाले रजा के जिले के एक अधिकारी से भी गहरे संबंध सामने आए हैं। इस अधिकारी ने करीब दो माह पहले हाजी रजा को सभ्रांत नागरिक बताकर रिपोर्ट आला अधिकारियों को भेजी थी।
सदर विधायक विक्रम सिंह ने हाजी रजा के खिलाफ मुख्यमंत्री से जुलाई माह में एक शिकायत की थी। इसमें जिक्र था कि हाजी रजा और उसका साथी अज्जन आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त है और ये हिस्ट्रीशीटर हैं।
इन लोगों ने अकूत संपत्ति भी अर्जित कर ली है। ऐसे में इनकी बेनामी संपत्ति जब्त की जाए। इनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इस पूरे मामले की जांच जब जिले में पहुंची तो पुलिस विभाग के एक अधिकारी ने हाजी रजा को सभ्रांत नागरिक बताकर यह रिपोर्ट लगा दी कि हाजी रजा को राजनीतिक द्वेष के कारण निशाना बनाया जा रहा है। वह और उनका परिवार शहर के सभ्रांत लोगों में शामिल है।
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अब जब भाजपा नेता को ही हाजी रजा ने अपने साथियों संग सरेआम पीटा तो मामला तूल पकड़ा। इसके साथ ही उस अधिकारी की भी हाजी रजा से सांठगांठ सामने आ गई।
ऐसा इसलिए भी है क्योंकि सदर विधायक ने 1992 से लेकर 2017 के मध्य उस पर दर्ज मुकदमों का भी जिक्र अपने पत्र के साथ किया था। इसके बाद भी पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और उसे सभ्रांत नागरिक बताकर शिकायत को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। अब पुलिस एक के बाद एक अलग-अलग मामलों में तीन मुकदमे हाजी रजा और उसके साथियों पर दर्ज कर चुकी है।
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सदर विधायक विक्रम सिंह ने हाजी रजा के खिलाफ मुख्यमंत्री से जुलाई माह में एक शिकायत की थी। इसमें जिक्र था कि हाजी रजा और उसका साथी अज्जन आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त है और ये हिस्ट्रीशीटर हैं।
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इन लोगों ने अकूत संपत्ति भी अर्जित कर ली है। ऐसे में इनकी बेनामी संपत्ति जब्त की जाए। इनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इस पूरे मामले की जांच जब जिले में पहुंची तो पुलिस विभाग के एक अधिकारी ने हाजी रजा को सभ्रांत नागरिक बताकर यह रिपोर्ट लगा दी कि हाजी रजा को राजनीतिक द्वेष के कारण निशाना बनाया जा रहा है। वह और उनका परिवार शहर के सभ्रांत लोगों में शामिल है।
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अब जब भाजपा नेता को ही हाजी रजा ने अपने साथियों संग सरेआम पीटा तो मामला तूल पकड़ा। इसके साथ ही उस अधिकारी की भी हाजी रजा से सांठगांठ सामने आ गई।
ऐसा इसलिए भी है क्योंकि सदर विधायक ने 1992 से लेकर 2017 के मध्य उस पर दर्ज मुकदमों का भी जिक्र अपने पत्र के साथ किया था। इसके बाद भी पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और उसे सभ्रांत नागरिक बताकर शिकायत को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। अब पुलिस एक के बाद एक अलग-अलग मामलों में तीन मुकदमे हाजी रजा और उसके साथियों पर दर्ज कर चुकी है।