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मृत अधिशाषी अभियंता के हस्ताक्षर बनाकर दूसरे ने हड़पी रकम
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फतेहपुर। कोर्ट के आदेश पर अधिशासी अभियंता यूपीआरएनएसएस (उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी संघ लिमिटेड) निर्माण प्रखंड के खिलाफ फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज कराया गया है। मुकदमे में ठेकेदार ने मृत अधिशाषी अभियंता के हस्ताक्षर बनाकर रकम हड़पने का आरोप लगाया है।
सदर कोतवाली क्षेत्र के शादीपुर मोहल्ला निवासी मोहम्मद हनीफ यूपीआर एनएसएस निर्माण प्रखंड में ठेकेदारी करते हैं। उन्होंने एफआईआर दर्ज कराते हुए बताया कि कौशांबी में संस्था ने चार राजकीय नवीन हाईस्कूलों का निर्माण कराया था।
तीन स्कूलों में संस्था के ठेकेदार अधूरा काम छोड़कर चले गए थे। इस पर पूर्व अधिशाषी अभियंता रवींद्र कुमार ने बाकी काम उन्हें करने के लिए दिया था। स्कूल निर्माण शुरू कराया और कुछ भुगतान भी हुआ।
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इस दौरान अधिशाषी अभियंता का स्थानांतरण हो गया। जिसके बाद तीन लाख का भुगतान नए अधिशाषी अभियंता आरके चौरसिया निवासी कृष्ण बिहारी कालोनी निवासी चिनहट फैजाबाद रोड लखनऊ के पास अवर अभियंता ने संस्तुति के लिए भेजा।
जहां अधिशाषी अभियंता आरके चौरसिया ने उनका नाम कटवाकर पूर्व ठेकेदार रवींद्र नाथ मिश्रा के नाम पर बिल बनवा दिया। बिलों पर पूर्व के अधिशाषी अभियंता रवींद्र कुमार के फर्जी हस्ताक्षर कराए गए।
जबकि पूर्व अधिशाषी अभियंता की मृत्यु हो चुकी है। अवर अभियंता के मना करने पर वर्तमान अधिशाषी अभियंता ने उन्हें निलंबित करने की धमकी दी। इसके बाद फर्जी तरीके से भुगतान रवींद्र नाथ मिश्रा को किया गया।
फर्जी भुगतान की शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई। जांच में अवर अभियंता बीडी राय ने आरके चौरसिया के खिलाफ फर्जीवाड़ा कर भुगतान कराकर रुपये अपने पास रखने का बयान भी दिया।
इस क्रम में अवर अभियंता सुधीर कुमार ने बयान में बताया कि आरके चौरसिया ने रुपयों की जरूरत के चलते दबाव बनाकर नाम बदलाया था। इसी तरह उसके काम का जून 2019 में छह लाख रुपये का भुगतान दूसरों के नाम पर कर दिया गया।
मामले की शिकायत पुलिस से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। जिसके बाद कोर्ट की शरण ली। कोतवाल अरुण चतुर्वेदी ने बताया कि एफआईआर दर्ज की गई है। जांच के बाद कार्रवाई होगी।
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सदर कोतवाली क्षेत्र के शादीपुर मोहल्ला निवासी मोहम्मद हनीफ यूपीआर एनएसएस निर्माण प्रखंड में ठेकेदारी करते हैं। उन्होंने एफआईआर दर्ज कराते हुए बताया कि कौशांबी में संस्था ने चार राजकीय नवीन हाईस्कूलों का निर्माण कराया था।
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तीन स्कूलों में संस्था के ठेकेदार अधूरा काम छोड़कर चले गए थे। इस पर पूर्व अधिशाषी अभियंता रवींद्र कुमार ने बाकी काम उन्हें करने के लिए दिया था। स्कूल निर्माण शुरू कराया और कुछ भुगतान भी हुआ।
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इस दौरान अधिशाषी अभियंता का स्थानांतरण हो गया। जिसके बाद तीन लाख का भुगतान नए अधिशाषी अभियंता आरके चौरसिया निवासी कृष्ण बिहारी कालोनी निवासी चिनहट फैजाबाद रोड लखनऊ के पास अवर अभियंता ने संस्तुति के लिए भेजा।
जहां अधिशाषी अभियंता आरके चौरसिया ने उनका नाम कटवाकर पूर्व ठेकेदार रवींद्र नाथ मिश्रा के नाम पर बिल बनवा दिया। बिलों पर पूर्व के अधिशाषी अभियंता रवींद्र कुमार के फर्जी हस्ताक्षर कराए गए।
जबकि पूर्व अधिशाषी अभियंता की मृत्यु हो चुकी है। अवर अभियंता के मना करने पर वर्तमान अधिशाषी अभियंता ने उन्हें निलंबित करने की धमकी दी। इसके बाद फर्जी तरीके से भुगतान रवींद्र नाथ मिश्रा को किया गया।
फर्जी भुगतान की शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई। जांच में अवर अभियंता बीडी राय ने आरके चौरसिया के खिलाफ फर्जीवाड़ा कर भुगतान कराकर रुपये अपने पास रखने का बयान भी दिया।
इस क्रम में अवर अभियंता सुधीर कुमार ने बयान में बताया कि आरके चौरसिया ने रुपयों की जरूरत के चलते दबाव बनाकर नाम बदलाया था। इसी तरह उसके काम का जून 2019 में छह लाख रुपये का भुगतान दूसरों के नाम पर कर दिया गया।
मामले की शिकायत पुलिस से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। जिसके बाद कोर्ट की शरण ली। कोतवाल अरुण चतुर्वेदी ने बताया कि एफआईआर दर्ज की गई है। जांच के बाद कार्रवाई होगी।