{"_id":"61fec96266ef25751d42f3a5","slug":"fathepur-news-singraur-kshatriyas-made-kshatrap-of-politics-fatehpur-news-knp6789157173","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहीद की ’दहलीज’ से गुजरता है सियासी रास्ता ...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहीद की ’दहलीज’ से गुजरता है सियासी रास्ता ...
विज्ञापन
फतेहपुर। विधानसभा चुनाव 2012 से पहले हुए नए परिसीमन के बाद से खागा विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आ गया। इसके बाद यहां के सियासी समीकरण बदल गए।
यहां सिंगरौर बिरादरी का कद बढ़ गया। खागा तहसील क्षेत्र से तकरीबन पंद्रह गांवों में लगभग 25 से 30 हजार मतदाताओं वाली इस बिरादरी का वोट बैंक अपने खेमे में कर पाना हर किसी के लिए चुनौती बना हुआ है।
सिंगरौर बिरादरी में राजनीतिक एकता का भाव 2007 के विधानसभा चुनाव से पनपा। इस चुनाव में सिंगरौर क्षत्रियों ने एकजुट होकर भगवा खेमे को समर्थन देकर उनकी चुनावी वैतरणी पार लगाई।
क्षेत्र में नगर के अलावा तकरीबन 12 से 15 गांवों में 25 से 30 हजार लोगों ने भाजपा को खुला समर्थन दिया था। इसी समय हुए नगर पंचायत चुनाव में भी भाजपा को समर्थन मिला।
विज्ञापन
इसके बाद 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में एक बार फिर सिंगरौर बिरादरी भाजपा के पाले में खड़ा रहा और भगवा पार्टी की प्रत्याशी का समर्थन कर उसकी जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भाजपा के लिए इन वोटों का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि खागा विधानसभा सीट पर इससे पहले कभी भी दो बार लगातार भाजपा अपना परचम नहीं फहरा पायी थी। रामलहर जैसा भावुक मुद्दा भी भाजपा को जीत की संजीवनी नहीं दे सका था।
इस बार के चुनाव में पैनी निगाहें
वर्तमान विधानसभा चुनावों में राजनीतिक जानकारों की पैनी निगाहें इन पर लगी हुई हैं। प्रत्येक दल का प्रत्याशी अंदरखाने इस समुदाय पर डोरे डाल रहा है लेकिन अब तक यह समुदाय खुलकर किसी के समर्थन में सामने नहीं आया है। इसके बारे में सिर्फ कयास ही लगाए जा रहे हैं कि अब तक भगवा खेमे को एकमुश्त समर्थन दे रहे इस अहम फैक्टर को साधने में सभी दल जुटे हैं।
विज्ञापन
यहां सिंगरौर बिरादरी का कद बढ़ गया। खागा तहसील क्षेत्र से तकरीबन पंद्रह गांवों में लगभग 25 से 30 हजार मतदाताओं वाली इस बिरादरी का वोट बैंक अपने खेमे में कर पाना हर किसी के लिए चुनौती बना हुआ है।
सिंगरौर बिरादरी में राजनीतिक एकता का भाव 2007 के विधानसभा चुनाव से पनपा। इस चुनाव में सिंगरौर क्षत्रियों ने एकजुट होकर भगवा खेमे को समर्थन देकर उनकी चुनावी वैतरणी पार लगाई।
विज्ञापन
क्षेत्र में नगर के अलावा तकरीबन 12 से 15 गांवों में 25 से 30 हजार लोगों ने भाजपा को खुला समर्थन दिया था। इसी समय हुए नगर पंचायत चुनाव में भी भाजपा को समर्थन मिला।
विज्ञापन
इसके बाद 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में एक बार फिर सिंगरौर बिरादरी भाजपा के पाले में खड़ा रहा और भगवा पार्टी की प्रत्याशी का समर्थन कर उसकी जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भाजपा के लिए इन वोटों का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि खागा विधानसभा सीट पर इससे पहले कभी भी दो बार लगातार भाजपा अपना परचम नहीं फहरा पायी थी। रामलहर जैसा भावुक मुद्दा भी भाजपा को जीत की संजीवनी नहीं दे सका था।
इस बार के चुनाव में पैनी निगाहें
वर्तमान विधानसभा चुनावों में राजनीतिक जानकारों की पैनी निगाहें इन पर लगी हुई हैं। प्रत्येक दल का प्रत्याशी अंदरखाने इस समुदाय पर डोरे डाल रहा है लेकिन अब तक यह समुदाय खुलकर किसी के समर्थन में सामने नहीं आया है। इसके बारे में सिर्फ कयास ही लगाए जा रहे हैं कि अब तक भगवा खेमे को एकमुश्त समर्थन दे रहे इस अहम फैक्टर को साधने में सभी दल जुटे हैं।