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गैर इरादतन हत्या के मामले में चार को सश्रम कारावास
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फतेहपुर। गैर इरादतन हत्या के मामले में जिला जज की अदालत ने पिता-पुत्र समेत चार अभियुक्तों को अलग-अलग सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद आरोपियों को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
मामला हथगाम थानाक्षेत्र के पलिया बुजुर्ग गांव का है। 14 अक्तूबर 2018 की शाम साढ़े सात बजे मूर्ति विसर्जन के समय रास्ते में राकेश गुप्त और उसके पिता केशनपाल का गांव के ही सोनू, रविशंकर दुबे, उनके पुत्र योगेश दुबे और मनीष दुबे से विवाद हो गया।
चारों ने मिलकर लाठी-डंडों और लोहे के राड से राकेश और उनके पिता केशनपाल की पिटाई की। जिसमें दोनों को चोटें आईं। केशनपाल को गंभीर रूप से घायल होने के कारण कानपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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जहां 22 अक्तूबर को उनकी मृत्यु हो गई थी। राकेश की तहरीर पर पुलिस ने चारों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद से मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था।
सहायक शासकीय अधिवक्ता अनिल दुबे ने बताया कि मामले में छह गवाह कोर्ट में प्रस्तुत किए गए। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर गौर करते हुए जिला जज अशोक कुमार ने चारों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
इसके अनुसार मनीष को सात वर्ष के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये का अर्थदंड, सोनू, योगेश और रविशंकर को पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास और तीनों को पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता अनिल दुबे ने बताया कि सभी को मुल्जिम जमानत पर चल रहे थे और अदालत का आदेश आने के बाद सभी को जेल भेज दिया गया।
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मामला हथगाम थानाक्षेत्र के पलिया बुजुर्ग गांव का है। 14 अक्तूबर 2018 की शाम साढ़े सात बजे मूर्ति विसर्जन के समय रास्ते में राकेश गुप्त और उसके पिता केशनपाल का गांव के ही सोनू, रविशंकर दुबे, उनके पुत्र योगेश दुबे और मनीष दुबे से विवाद हो गया।
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चारों ने मिलकर लाठी-डंडों और लोहे के राड से राकेश और उनके पिता केशनपाल की पिटाई की। जिसमें दोनों को चोटें आईं। केशनपाल को गंभीर रूप से घायल होने के कारण कानपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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जहां 22 अक्तूबर को उनकी मृत्यु हो गई थी। राकेश की तहरीर पर पुलिस ने चारों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद से मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था।
सहायक शासकीय अधिवक्ता अनिल दुबे ने बताया कि मामले में छह गवाह कोर्ट में प्रस्तुत किए गए। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर गौर करते हुए जिला जज अशोक कुमार ने चारों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
इसके अनुसार मनीष को सात वर्ष के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये का अर्थदंड, सोनू, योगेश और रविशंकर को पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास और तीनों को पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता अनिल दुबे ने बताया कि सभी को मुल्जिम जमानत पर चल रहे थे और अदालत का आदेश आने के बाद सभी को जेल भेज दिया गया।