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दो अस्पताल ऐसे, दो साल से नहीं मिला दवा बजट
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मदन मोहन नेत्र चिकित्सालय फतेहपुर। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। इसे कहते हैं सरकारी व्यवस्था, जहां लाखों खर्च होने के बाद जनता को कोई लाभ मिला की नहीं, इसे देखने वाला कोई नहीं है। कुछ ऐसे ही हालात जिले के दो सरकारी अस्पतालों के हैं।
जहां मरीजों के लिए दवा और सरकारी भवन की मरम्मत के लिए कोई बजट नहीं है। यहां आने वाले मरीजों को कभी-कभार दूसरे अस्पतालों से कृपा पर मिली दवाएं मिल जाती हैं। हम बात कर रहे हैं जिला मुख्यालय के मदन मोहन नेत्र चिकित्सालय और अमौली के महिला अस्पताल की।
मदन मोहन नेत्र चिकित्सालय जिले का एक मात्र आंखों का अस्पताल है। यहां पर दो नेत्र विशेषज्ञों के स्थान पर एक की नियुक्ति है। अस्पताल को दो साल से दवाओं के लिए कोई बजट नहीं मिला है।
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यहां आने वाले मरीजों को चिकित्सक देख कर बाहर से दवाएं लिख देते हैं। अस्पताल भवन के हालात ये हैं कि रंगाई-पुताई नहीं हुई है। छत और दीवारों का प्लास्टर गिर रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग बेपरवाह है। अस्पताल को पिछले माह अंधता निवारण के तहत कुछ दवाएं मिली हैं।
कमोवेश यहीं स्थिति अमौली के महिला अस्पताल की है। समाजसेवी देवीचरन ओमर ने रामा देवी के नाम से 1975 में महिला अस्पताल भवन का निर्माण कराया था।
तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.पीएल रत्ती ने महिला अस्पताल का शुभारंभ किया था। 45 साल से अस्पताल महिला और बच्चों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है।
इस दौरान अस्पताल भवन की आज तक रंगाई-पुताई नहीं हुई। इससे भवन जीर्णशीर्ण स्थिति में पहुंच चुका है। छतों से बारिश का पानी टपकता है। दरवाजे सड़ चुके हैं।
सफाई कर्मचारी न होने से परिसर में गंदगी का अंबार है। जिले से अस्पताल को दवाएं मिलना भी बंद है। सीएचसी से दवाएं लेकर काम चलाया जाता है। इन अव्यवस्थाओं के कारण मरीजों की ओपीडी काफी कम हो चुकी है। अस्पताल में एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट की नियुक्ति है।
मदनमोहन नेत्र चिकित्सालय और महिला अस्पताल अमौली की शासन स्तर पर आईडी नहीं बनी होने के कारण यह समस्या खड़ी हो गई है। आईडी बनाने के लिए बराबर शासन को लिखा पढ़ी की जा रही है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है। दोनों अस्पतालों को नजदीकी अन्य अस्पतालों के दवाओं की व्यवस्था की जा रही है। - डॉ. राजेंद्र सिंह, सीएमओ
हुसैनगंज निवासी राम प्रसाद का कहना है कि सरकारी आंख से अस्पताल में दवाओं की कमी बनी रहती है। डॉक्टर की राय पर मरीज को बाहर से दवाएं लेनी पड़ती हैं।
कोटिया निकाली सूर्यप्रताप कहते हैं कि अस्पताल में आंखों का इलाज कराने आए थे। अस्पताल में पैरासिटामाल और मल्टी विटामिन मिलती है। बुखार की दवा से आंख की तकलीफ कैसे ठीक होगी।
सिविल लाइन निवासी शीलू का कहना है कि महिला अस्पताल अमौली के साथ स्वास्थ्य विभाग सौतेला बर्ताव कर रहा है। दो साल से अस्पताल के स्टोर में दवा नहीं हैं।
नउवाबाग निवासी वसुंधरा चौधरी का कहना है कि महिलाओं के लिए जिला अस्पताल के बाद सिर्फ अमौली में महिला अस्पताल है। जिसे स्वास्थ्य विभाग ने पूरी तरह से उपेक्षित कर रखा है।
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जहां मरीजों के लिए दवा और सरकारी भवन की मरम्मत के लिए कोई बजट नहीं है। यहां आने वाले मरीजों को कभी-कभार दूसरे अस्पतालों से कृपा पर मिली दवाएं मिल जाती हैं। हम बात कर रहे हैं जिला मुख्यालय के मदन मोहन नेत्र चिकित्सालय और अमौली के महिला अस्पताल की।
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मदन मोहन नेत्र चिकित्सालय जिले का एक मात्र आंखों का अस्पताल है। यहां पर दो नेत्र विशेषज्ञों के स्थान पर एक की नियुक्ति है। अस्पताल को दो साल से दवाओं के लिए कोई बजट नहीं मिला है।
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यहां आने वाले मरीजों को चिकित्सक देख कर बाहर से दवाएं लिख देते हैं। अस्पताल भवन के हालात ये हैं कि रंगाई-पुताई नहीं हुई है। छत और दीवारों का प्लास्टर गिर रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग बेपरवाह है। अस्पताल को पिछले माह अंधता निवारण के तहत कुछ दवाएं मिली हैं।
कमोवेश यहीं स्थिति अमौली के महिला अस्पताल की है। समाजसेवी देवीचरन ओमर ने रामा देवी के नाम से 1975 में महिला अस्पताल भवन का निर्माण कराया था।
तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.पीएल रत्ती ने महिला अस्पताल का शुभारंभ किया था। 45 साल से अस्पताल महिला और बच्चों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है।
इस दौरान अस्पताल भवन की आज तक रंगाई-पुताई नहीं हुई। इससे भवन जीर्णशीर्ण स्थिति में पहुंच चुका है। छतों से बारिश का पानी टपकता है। दरवाजे सड़ चुके हैं।
सफाई कर्मचारी न होने से परिसर में गंदगी का अंबार है। जिले से अस्पताल को दवाएं मिलना भी बंद है। सीएचसी से दवाएं लेकर काम चलाया जाता है। इन अव्यवस्थाओं के कारण मरीजों की ओपीडी काफी कम हो चुकी है। अस्पताल में एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट की नियुक्ति है।
मदनमोहन नेत्र चिकित्सालय और महिला अस्पताल अमौली की शासन स्तर पर आईडी नहीं बनी होने के कारण यह समस्या खड़ी हो गई है। आईडी बनाने के लिए बराबर शासन को लिखा पढ़ी की जा रही है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है। दोनों अस्पतालों को नजदीकी अन्य अस्पतालों के दवाओं की व्यवस्था की जा रही है। - डॉ. राजेंद्र सिंह, सीएमओ
हुसैनगंज निवासी राम प्रसाद का कहना है कि सरकारी आंख से अस्पताल में दवाओं की कमी बनी रहती है। डॉक्टर की राय पर मरीज को बाहर से दवाएं लेनी पड़ती हैं।
कोटिया निकाली सूर्यप्रताप कहते हैं कि अस्पताल में आंखों का इलाज कराने आए थे। अस्पताल में पैरासिटामाल और मल्टी विटामिन मिलती है। बुखार की दवा से आंख की तकलीफ कैसे ठीक होगी।
सिविल लाइन निवासी शीलू का कहना है कि महिला अस्पताल अमौली के साथ स्वास्थ्य विभाग सौतेला बर्ताव कर रहा है। दो साल से अस्पताल के स्टोर में दवा नहीं हैं।
नउवाबाग निवासी वसुंधरा चौधरी का कहना है कि महिलाओं के लिए जिला अस्पताल के बाद सिर्फ अमौली में महिला अस्पताल है। जिसे स्वास्थ्य विभाग ने पूरी तरह से उपेक्षित कर रखा है।

अमौली का बदहाल महिला अस्पताल। संवाद- फोटो : FATEHPUR