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ड्रोन से देखी यमुना में आई बाढ़ की भयावता
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ललौली में यमुना के बाढ़ का नजारा। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। यमुना में आई बाढ़ ने किस कदर तबाही मचाई इसकी तस्वीरें ड्रोन की मदद से सामने आई हैं। बांदा प्रशासन ने फतेहपुर जिले से लगे क्षेत्रों में ड्रोन की मदद से हालात का जायजा लिया है। बताया गया है कि यह तस्वीरें शासन को भी उपलब्ध कराई गई हैं। उधर, बांदा-कानपुर हाईवे अभी भी बाढ़ के पानी से घिरा है। इस स्टेट हाईवे पर तीन फीट तक पानी भरा है। यातायात तीन दिन से बंद है और इसके सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
उधर, यमुना अभी भी खतरे के निशान से 2.18 मीटर ऊपर बह रही हैं। पलटूपुर गांव खाली होने के बाद यहां के लोग बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे तिरपाल तानकर रात गुजार रहे हैं।
यमुना नदी के जलस्तर ने इस बार कई साल का रिकार्ड तोड़ा है। पानी अभी भी उफान पर है। ग्रामीण क्षेत्रों के 300 से ज्यादा घरों में पानी घुस चुका है और एक सैकड़ा से ज्यादा कच्चे मकान ऐसे हैं जिन्हें बारिश और बाढ़ के कारण नुकसान हुआ है। बांदा प्रशासन ने यमुना से आई इस तबाही का नजारा ड्रोन की मदद से कैद कराया है। एक तस्वीर में तो यमुना पर दो पुलों का ऊपरी हिस्सा पानी में को छूता दिख रहा है। इलाकाई लोगों का कहना है कि कई साल बाद ऐसे हालात देखने को मिले हैं।
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ललौली में बांदा-कानपुर स्टेट हाईवे पर तीन फीट ऊपर पानी बह रहा है। हादसे की आशंका पर यातायात शनिवार रात से रुका हुआ है। वाहनों को अब ललौली, बिंदकी होकर कानपुर गुजारा जा रहा है। इससे बांदा-टांडा हाईवे पर वाहनों की संख्या में इजाफा हुआ है और जाम की समस्या खड़ी हो रही है। स्थिति सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
पलटूपुर गांव में शनिवार रात पानी भरने से ग्रामीण खेतों में तिरपाल की छावनी बनाकर परिवार के साथ रह रहे हैं। रात जंगली जीवों के भय में कट रही है। दो दिन में मंगलवार को इन लोगों तक सरकारी मदद पहुंची। लंच पैकेट मिलने से इन ग्रामीणों ने कुछ राहत की सांस ली।
अढ़ावल के ग्रामीण ललौली इंटर कॉलेज में बने बाढ़ शिविर में गृहस्थी रखकर गुजर बसर कर रहे हैं। मंगलवार को एसडीएम प्रमोद झा और नायब तहसीलदार विकास पांडेय ने बाढ़ क्षेत्र का नाव से निरीक्षण किया। फिर दोनों शिविरों में जाकर ग्रामीणों को लंच पैकेट बांटे।
अमौली क्षेत्र के गौरी औरा, परसेढ़ा और दपसौरा गांव की गलियों में पानी भरा हुआ है। कारागार राज्यमंत्री जयकुमार सिंह जैकी ने परसेढ़ा गांव में कैंप लगाकर बाढ़ पीड़ितों की समस्या सुनीं और एसडीएम विजयशंकर तिवारी को निर्देश दिए कि पीड़ितों की हर संभव मदद की जाए। वहीं, किशनपुर क्षेत्र के असहट गांव के लोग नाव से आ जा रहे हैं।
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उधर, यमुना अभी भी खतरे के निशान से 2.18 मीटर ऊपर बह रही हैं। पलटूपुर गांव खाली होने के बाद यहां के लोग बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे तिरपाल तानकर रात गुजार रहे हैं।
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यमुना नदी के जलस्तर ने इस बार कई साल का रिकार्ड तोड़ा है। पानी अभी भी उफान पर है। ग्रामीण क्षेत्रों के 300 से ज्यादा घरों में पानी घुस चुका है और एक सैकड़ा से ज्यादा कच्चे मकान ऐसे हैं जिन्हें बारिश और बाढ़ के कारण नुकसान हुआ है। बांदा प्रशासन ने यमुना से आई इस तबाही का नजारा ड्रोन की मदद से कैद कराया है। एक तस्वीर में तो यमुना पर दो पुलों का ऊपरी हिस्सा पानी में को छूता दिख रहा है। इलाकाई लोगों का कहना है कि कई साल बाद ऐसे हालात देखने को मिले हैं।
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ललौली में बांदा-कानपुर स्टेट हाईवे पर तीन फीट ऊपर पानी बह रहा है। हादसे की आशंका पर यातायात शनिवार रात से रुका हुआ है। वाहनों को अब ललौली, बिंदकी होकर कानपुर गुजारा जा रहा है। इससे बांदा-टांडा हाईवे पर वाहनों की संख्या में इजाफा हुआ है और जाम की समस्या खड़ी हो रही है। स्थिति सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
पलटूपुर गांव में शनिवार रात पानी भरने से ग्रामीण खेतों में तिरपाल की छावनी बनाकर परिवार के साथ रह रहे हैं। रात जंगली जीवों के भय में कट रही है। दो दिन में मंगलवार को इन लोगों तक सरकारी मदद पहुंची। लंच पैकेट मिलने से इन ग्रामीणों ने कुछ राहत की सांस ली।
अढ़ावल के ग्रामीण ललौली इंटर कॉलेज में बने बाढ़ शिविर में गृहस्थी रखकर गुजर बसर कर रहे हैं। मंगलवार को एसडीएम प्रमोद झा और नायब तहसीलदार विकास पांडेय ने बाढ़ क्षेत्र का नाव से निरीक्षण किया। फिर दोनों शिविरों में जाकर ग्रामीणों को लंच पैकेट बांटे।
अमौली क्षेत्र के गौरी औरा, परसेढ़ा और दपसौरा गांव की गलियों में पानी भरा हुआ है। कारागार राज्यमंत्री जयकुमार सिंह जैकी ने परसेढ़ा गांव में कैंप लगाकर बाढ़ पीड़ितों की समस्या सुनीं और एसडीएम विजयशंकर तिवारी को निर्देश दिए कि पीड़ितों की हर संभव मदद की जाए। वहीं, किशनपुर क्षेत्र के असहट गांव के लोग नाव से आ जा रहे हैं।