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बिना मिट्टी के करें सब्जी की खेती
अमर उजाला ब्यूरो/फतेहपुर
Updated Wed, 21 Feb 2018 11:53 PM IST
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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प्रेक्षागृह में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को औद्यानिक फसलों का बुधवार को प्रशिक्षण दिया। इसमें बिना मिट्टी के जलीय खेती (हाईड्रोपोनिक) करने के गुर बताए। किसान को जल संरक्षण और जैविक खेती से फसलों के उत्पादन की जानकारी दी।
उद्यान विभाग के योजना प्रभारी वीके सिंह ने कहा कि औद्यानिक फसलों से ही किसान अपनी आय दोगुना कर सकते हैं। किसान अब बिना मिट्टी के पालक, मेथी, धनिया, बैगन, टमाटर, मिर्च, शिमला मिर्च, पत्ता गोभी और फूल गोभी की फसल की जा सकती है। इन फसलों के लिए पानी, पोषक तत्व और सूर्य के प्रकाश की जरूरत होती है। हाईड्रोपोनिक ढंग से इन फसलों का उत्पादन किया जा सकता है।
इसके लिए पथरीली व ऊबड़ खाबड़ जमीन को भी प्रयोग में लाया जाएगा। इन फसलों की बुआई के लिए प्लास्टिक एवं लोहे के एंगल का स्ट्रक्चर बनाना पड़ेगा। दो से तीन फुट की ऊंचाई में पाइप लगाए जाएंगे। बीच-बीच सुराग बनाकर इसमें गोबर व फसलों के अवशेष बीज को बोना होगा। छोटे आकार के पौधों को जल, पोषकतत्व और सूर्य के रोशनी की जरूरत होती है। पाइप से सिंचाई होगी। गोबर से पोषकतत्व मिलेगा और सूर्य के रोशनी से फसल का विस्तार होगा। जहां पर सूर्य की रोशनी आती हो, वहीं पर स्ट्रक्चर को बनाएं।
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चंद्रशेखर आजाद कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आरके सिंह ने कहा कि कद्दू वर्गी फसल को मिट्टी की नहीं, ऊपर फैलने के लिए स्ट्रक्चर होना चाहिए। इसको बनाने के लिए बांस, एंगल और लकड़ियों की जरूरत है। पौधे जब बड़े हो जाएंगे तो इन्हीं स्ट्रक्चर में फैल जाएंगे। सिंचाई से पौधे और उनमें लगे फल खराब भी नहीं होंगे। सिंचाई में पानी भी कम लगेगा।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र स्वरूप ने कहा कि फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए जल संरक्षण की जरूरत है। जल स्तर की कमी से मिट्टी में नमी समाप्त हो रही है। इससे असिंचित फसलों में भी सिंचाई की जरूरत पड़ती है। इस मौके पर जिला उद्यान अधिकारी एके श्रीवास्तव, धर्मेंद्र कुमार, शब्बीर हुसैन, कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार शर्मा मौजूद रहे।
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उद्यान विभाग के योजना प्रभारी वीके सिंह ने कहा कि औद्यानिक फसलों से ही किसान अपनी आय दोगुना कर सकते हैं। किसान अब बिना मिट्टी के पालक, मेथी, धनिया, बैगन, टमाटर, मिर्च, शिमला मिर्च, पत्ता गोभी और फूल गोभी की फसल की जा सकती है। इन फसलों के लिए पानी, पोषक तत्व और सूर्य के प्रकाश की जरूरत होती है। हाईड्रोपोनिक ढंग से इन फसलों का उत्पादन किया जा सकता है।
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इसके लिए पथरीली व ऊबड़ खाबड़ जमीन को भी प्रयोग में लाया जाएगा। इन फसलों की बुआई के लिए प्लास्टिक एवं लोहे के एंगल का स्ट्रक्चर बनाना पड़ेगा। दो से तीन फुट की ऊंचाई में पाइप लगाए जाएंगे। बीच-बीच सुराग बनाकर इसमें गोबर व फसलों के अवशेष बीज को बोना होगा। छोटे आकार के पौधों को जल, पोषकतत्व और सूर्य के रोशनी की जरूरत होती है। पाइप से सिंचाई होगी। गोबर से पोषकतत्व मिलेगा और सूर्य के रोशनी से फसल का विस्तार होगा। जहां पर सूर्य की रोशनी आती हो, वहीं पर स्ट्रक्चर को बनाएं।
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चंद्रशेखर आजाद कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आरके सिंह ने कहा कि कद्दू वर्गी फसल को मिट्टी की नहीं, ऊपर फैलने के लिए स्ट्रक्चर होना चाहिए। इसको बनाने के लिए बांस, एंगल और लकड़ियों की जरूरत है। पौधे जब बड़े हो जाएंगे तो इन्हीं स्ट्रक्चर में फैल जाएंगे। सिंचाई से पौधे और उनमें लगे फल खराब भी नहीं होंगे। सिंचाई में पानी भी कम लगेगा।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र स्वरूप ने कहा कि फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए जल संरक्षण की जरूरत है। जल स्तर की कमी से मिट्टी में नमी समाप्त हो रही है। इससे असिंचित फसलों में भी सिंचाई की जरूरत पड़ती है। इस मौके पर जिला उद्यान अधिकारी एके श्रीवास्तव, धर्मेंद्र कुमार, शब्बीर हुसैन, कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार शर्मा मौजूद रहे।