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Fatehpur News: नाले ने खेतों को बनाया झील, किसान पल्लेदारी को मजबूर
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फतेहपुर। नगर पालिका क्षेत्र के चौदखियापुर के किसानों को झाऊपुर नाले ने किसानों को पल्लेदारी करने को मजबूर कर दिया है। शहर के दक्षिणी क्षेत्र का गंदा पानी झाऊपुर नाले से चौदखियापुर की कृषि योग्य जमीन में भरता है। पांच साल सेे गंदे पानी का जमाव होने के कारण धान, गेहूं के साथ सब्जी उगाने वाले करीब एक हजार बीघे के खेत जमीन झील में तब्दील होते जा रहे हैं। वहीं जमीन के मालिक 1300 किसानों को जीविकोपार्जन के लिए पल्लेदारी करनी पड़ रही है।
चौदखियापुर निवासी भदई का कहना है कि पांच साल पहले तक जमीनों पर खेती होती थी, लेकिन नई रेलवे लाइन बनने से झाऊपुर नाले की जलनिकासी प्रभावित हुई है। अब तो मजदूरी ही जीविकोपार्जन का सहारा है।
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यहीं के रहने वाले जगतपाल कहते हैं कि बारिश में तो यह इलाका टापू बन जाता है। साल के हर मौसम में खेत जलमग्न रहते हैं। ऐसे में गांव के ज्यादातर लोग रैक उतारने पर पल्लेदारी करते हैं।
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छेदीलाल का कहना है कि कई बार नगर पालिका और डीएम से भी इसकी शिकायत की गई, लेकिन कोई अधिकारी देखने तक नहीं आया। किसी तरह धान की रोपाई करते हैं, तो वह भी नष्ट हो जाता है।
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संजय कुमार का कहना है कि पैतृक जमीन छोड़ने का भी मन नहीं हो रहा है। अब तो भगवान का ही भरोसा रह गया है। जलभराव की समस्या से निजात के लिए सड़क पर उतरकर आंदोलन के सिवा कोई रास्ता नहीं दिख रहा है।
दोपहर में प्रयागराज के रेलवे कार्यालय से वार्ता हुई है। वहां से नगर पालिका की मेल आईडी मांगी गई थी, जो भेज दी गई है। जल्द ही मेल से रेलवे अधिकारियों के आने का कार्यक्रम मिलेगा। दो से तीन दिन में किसी न किसी अधिकारी के आने की पूरी उम्मीद है। इसके बाद ही समस्या के समाधान के लिए पहल की जा सकेगी।
रवींद्र कुमार, ईओ नगर पालिका
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चौदखियापुर निवासी भदई का कहना है कि पांच साल पहले तक जमीनों पर खेती होती थी, लेकिन नई रेलवे लाइन बनने से झाऊपुर नाले की जलनिकासी प्रभावित हुई है। अब तो मजदूरी ही जीविकोपार्जन का सहारा है।
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यहीं के रहने वाले जगतपाल कहते हैं कि बारिश में तो यह इलाका टापू बन जाता है। साल के हर मौसम में खेत जलमग्न रहते हैं। ऐसे में गांव के ज्यादातर लोग रैक उतारने पर पल्लेदारी करते हैं।
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छेदीलाल का कहना है कि कई बार नगर पालिका और डीएम से भी इसकी शिकायत की गई, लेकिन कोई अधिकारी देखने तक नहीं आया। किसी तरह धान की रोपाई करते हैं, तो वह भी नष्ट हो जाता है।
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संजय कुमार का कहना है कि पैतृक जमीन छोड़ने का भी मन नहीं हो रहा है। अब तो भगवान का ही भरोसा रह गया है। जलभराव की समस्या से निजात के लिए सड़क पर उतरकर आंदोलन के सिवा कोई रास्ता नहीं दिख रहा है।
दोपहर में प्रयागराज के रेलवे कार्यालय से वार्ता हुई है। वहां से नगर पालिका की मेल आईडी मांगी गई थी, जो भेज दी गई है। जल्द ही मेल से रेलवे अधिकारियों के आने का कार्यक्रम मिलेगा। दो से तीन दिन में किसी न किसी अधिकारी के आने की पूरी उम्मीद है। इसके बाद ही समस्या के समाधान के लिए पहल की जा सकेगी।
रवींद्र कुमार, ईओ नगर पालिका
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