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खुशखबरी : अब प्लाज्मा और प्लेटलेट्स के लिए नहीं होगा गैर जनपद
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में तैयार कम्पोनेंट यूनिट दिखाते टेक्निकल सुपरवाइजर अशोक शुक्ल। संवा?
- फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद अब जनपद को ब्लड कंपोनेंट यूनिट की भी सौगात मिली है। तकरीबन ढाई करोड़ की लागत से जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में यह यूनिट बनकर तैयार हो गई है। मशीनें भी आ गई हैं। जनपद के लोगों को जल्द ही प्लाज्मा और प्लेटलेट्स के लिए अन्य जिलों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
मेडिकल कॉलेज की ओर से यूनिट का संचालन करने के लिए लाइसेंस का आवेदन किया गया है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरपी सिंह और पैथालॉजी विभाग के एचओडी डॉ. वरद वर्धन बिसेन की ओर से इस संबंध में राज्य रक्त संचरण परिषद और औषधि नियंत्रक लखनऊ को पत्राचार किया गया है। करीब 15 दिनों के अंदर दिल्ली से एक टीम आकर इस यूनिट का निरीक्षण करेगी और सब कुछ संतोषजनक मिलने पर रिपोर्ट देगी। इसके बाद यूनिट का संचालन शुरू हो जाएगा।
जनपद में डेंगू, मलेरिया, आग से जलने आदि के पीड़ितों के मामले बड़ी संख्या में आते हैं। पीड़ितों को खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। कई पीड़ितों को सहयोगी तत्व चढ़ाने की जरूरत होती है। जनपद में ब्लड से तत्व निकालने की सुविधा न होने से दिक्कतें आती हैं। अब ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट तैयार हो चुकी है। सेपरेशन यूनिट से ब्लड से चार अलग-अलग तत्व निकालने का काम किया जा सकेगा। यूनिट के लिए पर्याप्त स्टाफ और प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ब्लड बैंक के कर्मचारी अशोक शुक्ल को टेक्निकल सुपरवाइजर और बृजकिशोर को लैब टेक्नीशियन का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
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ब्लड में 4 कंपोनेंट होते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड को घुमाया (मथा) जाता है। इससे ब्लड परत दर परत (लेयर बाई लेयर) हो जाता है और आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट अलग-अलग हो जाते हैं। जरूरत के मुताबिक इन्हें निकाल लिया जाता है। निकले गए रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। एक यूनिट 3 से 4 लोगों की जरूरत पूरी की जा सकती है।
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मेडिकल कॉलेज की ओर से यूनिट का संचालन करने के लिए लाइसेंस का आवेदन किया गया है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरपी सिंह और पैथालॉजी विभाग के एचओडी डॉ. वरद वर्धन बिसेन की ओर से इस संबंध में राज्य रक्त संचरण परिषद और औषधि नियंत्रक लखनऊ को पत्राचार किया गया है। करीब 15 दिनों के अंदर दिल्ली से एक टीम आकर इस यूनिट का निरीक्षण करेगी और सब कुछ संतोषजनक मिलने पर रिपोर्ट देगी। इसके बाद यूनिट का संचालन शुरू हो जाएगा।
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जनपद में डेंगू, मलेरिया, आग से जलने आदि के पीड़ितों के मामले बड़ी संख्या में आते हैं। पीड़ितों को खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। कई पीड़ितों को सहयोगी तत्व चढ़ाने की जरूरत होती है। जनपद में ब्लड से तत्व निकालने की सुविधा न होने से दिक्कतें आती हैं। अब ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट तैयार हो चुकी है। सेपरेशन यूनिट से ब्लड से चार अलग-अलग तत्व निकालने का काम किया जा सकेगा। यूनिट के लिए पर्याप्त स्टाफ और प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ब्लड बैंक के कर्मचारी अशोक शुक्ल को टेक्निकल सुपरवाइजर और बृजकिशोर को लैब टेक्नीशियन का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
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ब्लड में 4 कंपोनेंट होते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड को घुमाया (मथा) जाता है। इससे ब्लड परत दर परत (लेयर बाई लेयर) हो जाता है और आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट अलग-अलग हो जाते हैं। जरूरत के मुताबिक इन्हें निकाल लिया जाता है। निकले गए रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। एक यूनिट 3 से 4 लोगों की जरूरत पूरी की जा सकती है।