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दिव्यांशु ने यूपीएससी में फहराया दोआबा का परचम
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दिव्यांशु तिवारी। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। दिल्ली में एडिशनल इनकम टैक्स कमिश्नर पद पर तैनात दिव्यांशु ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में फिर अपना दमखम लहराया है। इस बार उन्होंने यूपीएससी में 198वीं रैंक हासिल की है। हालांकि इससे पूर्व 2018 की यूपीएससी परीक्षा में उन्हें 323वीं रैंक मिली थी। इस सफलता के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की है।
उनकी सफलता पर परिवार और परिचितों ने जमकर जश्न मनाया। परिवार को बधाइयां मिलने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। शुक्रवार शाम को संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2020 का परिणाम जारी हुआ। जैसे ही परिजनों को दिव्यांशु की 198वी रैंक आने की जानकारी मिली, लोग खुशी से उछल पड़े। शहर के आईटीआई रोड के समीप सिविल लाइंस इलाके में रहने वाले दिव्यांशु ने महर्षि विद्या मंदिर इंटर कॉलेज से हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा शानदार अंकों से उत्तीर्ण की थी। वह शुरू से ही मेधावी रहे हैं। उनके पिता राजेंद्र प्रसाद तिवारी जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय में कार्यरत हैं, जबकि मां सविता देवी गृहिणी हैं।
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दिव्यांशु तिवारी ने इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने के बाद प्रयागराज स्थित एमएलएनआर कॉलेज से बीटेक किया। इसके बाद उन्होंने दर्शनशास्त्र विषय चुनकर तैयारी शुरू की। बीटेक करने बाद उन्हें अच्छी खासी सैलरी पर नौकरी के आफर मिले लेकिन उन पर आईएएस बनने का जुनून सवार था। उन्होंने कभी राज्य स्तर की सिविल सेवा परीक्षा में आवेदन नहीं किया है। अब तक उन्होंने तीन बार यूपीएससी परीक्षा दी जिसमें से दो बार सफलता का स्वाद चख चुके हैं।
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उनकी सफलता पर परिवार और परिचितों ने जमकर जश्न मनाया। परिवार को बधाइयां मिलने का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। शुक्रवार शाम को संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2020 का परिणाम जारी हुआ। जैसे ही परिजनों को दिव्यांशु की 198वी रैंक आने की जानकारी मिली, लोग खुशी से उछल पड़े। शहर के आईटीआई रोड के समीप सिविल लाइंस इलाके में रहने वाले दिव्यांशु ने महर्षि विद्या मंदिर इंटर कॉलेज से हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा शानदार अंकों से उत्तीर्ण की थी। वह शुरू से ही मेधावी रहे हैं। उनके पिता राजेंद्र प्रसाद तिवारी जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय में कार्यरत हैं, जबकि मां सविता देवी गृहिणी हैं।
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दिव्यांशु तिवारी ने इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने के बाद प्रयागराज स्थित एमएलएनआर कॉलेज से बीटेक किया। इसके बाद उन्होंने दर्शनशास्त्र विषय चुनकर तैयारी शुरू की। बीटेक करने बाद उन्हें अच्छी खासी सैलरी पर नौकरी के आफर मिले लेकिन उन पर आईएएस बनने का जुनून सवार था। उन्होंने कभी राज्य स्तर की सिविल सेवा परीक्षा में आवेदन नहीं किया है। अब तक उन्होंने तीन बार यूपीएससी परीक्षा दी जिसमें से दो बार सफलता का स्वाद चख चुके हैं।
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