{"_id":"675000029316ca487c0e6bcb","slug":"dirty-water-going-into-the-canal-will-be-treated-through-bio-culture-fatehpur-news-c-217-1-fth1004-125249-2024-12-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehpur News: बायो कल्चर से शोधित होगा नहर में जाने वाला गंदा पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehpur News: बायो कल्चर से शोधित होगा नहर में जाने वाला गंदा पानी
विज्ञापन
खागा (फतेहपुर)। नगर पंचायत को उत्तर से दक्षिण दिशा में बांटने वाली कटोघन-सरसई माइनर में गिरने वाले गंदे पानी को शोधित करने की योजना है।
इसके लिए करीब 10 जगहों पर बायोरेमेडिएशन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इसकी शुरुआत कैनाल रोड पर हो भी चुकी है। इस प्रयास से नहर में जाने वाला गंदा पानी बॉयो कल्चर के जरिये शोधित किया जाएगा।
कटोघन-सरसई माइनर खागा को दो भागों में बांटती है और यह कस्बे के बीच से निकलती है। कस्बे के अंदर होने के कारण घरों का पानी गिरता है और यह कचरे से लबालब रहती है। नहर का पानी भी दूषित होता है। नहर के पानी को प्रदूषण से बचाने के लिए नगर पंचायत ने योजना बनाई है।
इसके तहत 10 जगहों पर बायोरेमेडिएशन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। सबसे पहले कैनाल रोड पर काम शुरू हुआ है। यहां नहर किनारे चबूतरा बनाकर उसमें एक हजार लीटर की टंकी रखी जाएगी। इस टंकी में बॉयो कल्चर भरा जाएगा, जो बूंद-बूंद नाले में गिरेगा और नाले का पानी नहर में जाने से पहले शोधित होगा। बॉयो कल्चर से नाले के पानी में घुले खतरनाक केमिकल्स को शोधित करेगा। प्लांट ऐसी जगहों पर बनाए जा रहे हैं, जहां से कस्बे का पानी नहर में जाकर गिरता है।
विज्ञापन
कैनाल रोड के साथ ही मुसवापर व गौरया माता समेत अन्य जगहों पर प्लांट बनाए जाएंगे। नगर पंचायत अध्यक्ष गीता सिंह ने बताया कि नहर के किनारे बायोरेमेडिएशन प्लांट तैयार कराए जा रहे हैं, जिससे पानी को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
विज्ञापन
इसके लिए करीब 10 जगहों पर बायोरेमेडिएशन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इसकी शुरुआत कैनाल रोड पर हो भी चुकी है। इस प्रयास से नहर में जाने वाला गंदा पानी बॉयो कल्चर के जरिये शोधित किया जाएगा।
कटोघन-सरसई माइनर खागा को दो भागों में बांटती है और यह कस्बे के बीच से निकलती है। कस्बे के अंदर होने के कारण घरों का पानी गिरता है और यह कचरे से लबालब रहती है। नहर का पानी भी दूषित होता है। नहर के पानी को प्रदूषण से बचाने के लिए नगर पंचायत ने योजना बनाई है।
विज्ञापन
इसके तहत 10 जगहों पर बायोरेमेडिएशन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। सबसे पहले कैनाल रोड पर काम शुरू हुआ है। यहां नहर किनारे चबूतरा बनाकर उसमें एक हजार लीटर की टंकी रखी जाएगी। इस टंकी में बॉयो कल्चर भरा जाएगा, जो बूंद-बूंद नाले में गिरेगा और नाले का पानी नहर में जाने से पहले शोधित होगा। बॉयो कल्चर से नाले के पानी में घुले खतरनाक केमिकल्स को शोधित करेगा। प्लांट ऐसी जगहों पर बनाए जा रहे हैं, जहां से कस्बे का पानी नहर में जाकर गिरता है।
विज्ञापन
कैनाल रोड के साथ ही मुसवापर व गौरया माता समेत अन्य जगहों पर प्लांट बनाए जाएंगे। नगर पंचायत अध्यक्ष गीता सिंह ने बताया कि नहर के किनारे बायोरेमेडिएशन प्लांट तैयार कराए जा रहे हैं, जिससे पानी को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।