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देवों के साथ ददुआ भी पूजा जाने लगा
ब्यूरो, अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Tue, 16 Feb 2016 12:41 AM IST
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नरसिंहपुर कबरहा के शिवहरे रामजानकी हनुमान मंदिर में
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धार्मिक महोत्सव व मूर्ति स्थापना का काम पूरा हो चुका है। अब आस्था के
साथ ही लोगों में कौतूहल देखने को मिल रहा है। यहां सोमवार सुबह से ही
दर्शन करने वालों का रेला लगा रहा। देवी-देवताओं के आगे माथा टेकने आए
लोगों में कई ने ददुआ, उसकी पत्नी व माता-पिता की मूर्ति के आगे भी शीश
झुकाया।
इस आयोजन के विरोध में हिंदूवादी संगठनों की आवाज को दरकिनार करते हुए रविवार को नरसिंहपुर-कबरहा गांव के तीन मंजिला मंदिर की लॉबी में दस्यु ददुआ की मूर्ति स्थापित कर दी गई। इस पर पुलिस व प्रशासन खामोश रहा।
स्थानीय जनता ने इसे हाथों-हाथ लिया। रविवार दोपहर सवा 11 बजे के बाद से शुरू हुआ पूजा का दौर देर रात तक चला। सोमवार भोर पहर से ही यह क्रम फिर चल पड़ा।
जो लोग रविवार को यहां नहीं आ पाए, उनमें ददुआ की मूर्ति को नजदीक से देखने की ललक रही। भले ही सड़कों पर रविवार जैसा रेला नहीं था लेकिन मंदिर के अंदर दर्शन के लिए लाइनें लगती रहीं।
जिले के अलावा चित्रकूट, बांदा, कौशांबी, इलाहाबाद जिलों से आए लोग दस्यु की आराधना करते दिखे। कर्वी से राम सुमेर सिंह भी बीवी बच्चों के साथ मंदिर पहुंचे।
उन्होंने देवी देवताओं की आराधना करने के साथ ही पाठा के कुख्यात डाकुओं में शुमार ददुआ को नमन किया। माथा टेकने के बाद मंदिर से बाहर निकले सुमेर बोले- अखबार में सुबह ददुआ की मूर्ति देखने के बाद जिज्ञासा हुई, इसीलिए चले आए।
इन्हीं की तरह नैनी से ददुआ की मूर्ति करीब से देखने के लिए मनोज पटेल आए। इन्होंने कहा कि जिस शख्स ने मंदिर बनवाया, यदि उसकी मूर्ति उसके परिजनों ने लगा दी तो इसमें बुराई क्या है।
इस आयोजन के विरोध में हिंदूवादी संगठनों की आवाज को दरकिनार करते हुए रविवार को नरसिंहपुर-कबरहा गांव के तीन मंजिला मंदिर की लॉबी में दस्यु ददुआ की मूर्ति स्थापित कर दी गई। इस पर पुलिस व प्रशासन खामोश रहा।
स्थानीय जनता ने इसे हाथों-हाथ लिया। रविवार दोपहर सवा 11 बजे के बाद से शुरू हुआ पूजा का दौर देर रात तक चला। सोमवार भोर पहर से ही यह क्रम फिर चल पड़ा।
जो लोग रविवार को यहां नहीं आ पाए, उनमें ददुआ की मूर्ति को नजदीक से देखने की ललक रही। भले ही सड़कों पर रविवार जैसा रेला नहीं था लेकिन मंदिर के अंदर दर्शन के लिए लाइनें लगती रहीं।
जिले के अलावा चित्रकूट, बांदा, कौशांबी, इलाहाबाद जिलों से आए लोग दस्यु की आराधना करते दिखे। कर्वी से राम सुमेर सिंह भी बीवी बच्चों के साथ मंदिर पहुंचे।
उन्होंने देवी देवताओं की आराधना करने के साथ ही पाठा के कुख्यात डाकुओं में शुमार ददुआ को नमन किया। माथा टेकने के बाद मंदिर से बाहर निकले सुमेर बोले- अखबार में सुबह ददुआ की मूर्ति देखने के बाद जिज्ञासा हुई, इसीलिए चले आए।
इन्हीं की तरह नैनी से ददुआ की मूर्ति करीब से देखने के लिए मनोज पटेल आए। इन्होंने कहा कि जिस शख्स ने मंदिर बनवाया, यदि उसकी मूर्ति उसके परिजनों ने लगा दी तो इसमें बुराई क्या है।