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Fatehpur News: करोड़ों खर्च, पर झूलते तारों से नहीं मिली निजात
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फतेहपुर। रिवैंप योजना के तहत बिजली सुधार के कामों को 90 प्रतिशत होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन गांव व कस्बों को जर्जर झूलते तारों से निजात नहीं मिली है। इससे हादसे हो रहे हैं।
जिले में वर्ष 2023 से रिवैंप योजना के तहत 257 करोड़ रुपये से जर्जर पोल, तार और नए उपकेंद्र बनाने व क्षमता बढ़ाने का काम हो रहा है। इसमें जनपद में 2217.96 किमी में खुले तारों की जगह एबीसी केबल, 151 नए फीडर बनाकर लाइन अलग की जानी थी। बिजली विभाग 90 प्रतिशत का काम का दावा भी कर रही है, लेकिन गांवों और कस्बों में अभी भी जर्जर झूलते तारों से निजात नहीं मिली है। इन तारों की वजह से कई हादसे हो चुके हैं, इससे लोगों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इतने बड़े बजट के बावजूद भी जर्जर तारों को बदलने का काम नहीं हो पाया है।
सीन-1-
किशनपुर उपकेंद्र नरौनी फीडर से जुड़े बाराची गांव से हाईटेंशन लाइन गांव के करीब पांच बीघे खेत के बीच से होकर निकली है। लाइन इतनी नीचे है कि अगर कोई खेतों में काम करता है तो उसकों डर लगा रहता है। किसान धर्मेेंद सिंह, दयाराम पाल, रामराज मौर्य ने बताया कि बारिश के समय इन झूलते तारों के कारण कई हादसे हो चुके हैं। तारों को ठीक करने के लिए कई बार शिकायत की गई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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सीन-2-
खखरेरू कस्बे के बनियान तारा के पास बिजली विभाग ने पोल न लगाकर पीपल के पेड़ में ही इंसुलेटर लगा दिया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह करीब छह महीने से लगा हुआ है। बारिश व हवा चलने पर खराब हो जाता है। इसे बनाने में विभागीय लोगों को घंटो का समय लगता है। इसके बाद भी पोल नहीं लगया गया है।
रिवैंप योजना से जो काम आवंटित हुए है, वहीं काम हुए है। बाकी कामों को सेकेंड फेज व दूसरी स्कीम में किया जाएगा। इसके अलावा जहां भी बिजली के तार झूल रहे है। उनको सही कराया जाएगा। -एसपी सिंह, मुख्य अभियंता, पूर्वांचल विद्युत निगम।
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जिले में वर्ष 2023 से रिवैंप योजना के तहत 257 करोड़ रुपये से जर्जर पोल, तार और नए उपकेंद्र बनाने व क्षमता बढ़ाने का काम हो रहा है। इसमें जनपद में 2217.96 किमी में खुले तारों की जगह एबीसी केबल, 151 नए फीडर बनाकर लाइन अलग की जानी थी। बिजली विभाग 90 प्रतिशत का काम का दावा भी कर रही है, लेकिन गांवों और कस्बों में अभी भी जर्जर झूलते तारों से निजात नहीं मिली है। इन तारों की वजह से कई हादसे हो चुके हैं, इससे लोगों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इतने बड़े बजट के बावजूद भी जर्जर तारों को बदलने का काम नहीं हो पाया है।
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सीन-1-
किशनपुर उपकेंद्र नरौनी फीडर से जुड़े बाराची गांव से हाईटेंशन लाइन गांव के करीब पांच बीघे खेत के बीच से होकर निकली है। लाइन इतनी नीचे है कि अगर कोई खेतों में काम करता है तो उसकों डर लगा रहता है। किसान धर्मेेंद सिंह, दयाराम पाल, रामराज मौर्य ने बताया कि बारिश के समय इन झूलते तारों के कारण कई हादसे हो चुके हैं। तारों को ठीक करने के लिए कई बार शिकायत की गई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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सीन-2-
खखरेरू कस्बे के बनियान तारा के पास बिजली विभाग ने पोल न लगाकर पीपल के पेड़ में ही इंसुलेटर लगा दिया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह करीब छह महीने से लगा हुआ है। बारिश व हवा चलने पर खराब हो जाता है। इसे बनाने में विभागीय लोगों को घंटो का समय लगता है। इसके बाद भी पोल नहीं लगया गया है।
रिवैंप योजना से जो काम आवंटित हुए है, वहीं काम हुए है। बाकी कामों को सेकेंड फेज व दूसरी स्कीम में किया जाएगा। इसके अलावा जहां भी बिजली के तार झूल रहे है। उनको सही कराया जाएगा। -एसपी सिंह, मुख्य अभियंता, पूर्वांचल विद्युत निगम।