{"_id":"67d278a2dd8c2350ebba2bf659b6ae22","slug":"the-death-of-jailed-convicted-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेल में बंद सजायाफ्ता की मौत ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जेल में बंद सजायाफ्ता की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर
Updated Wed, 06 Jan 2016 12:56 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला कारागार में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदी
विज्ञापन
रक्षक रामकुमार(60) की हार्टअटैक से मौत हो गई। परिजनों ने जेल प्रशासन पर
सूचना न देने का आरोप लगाया है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है।
बंदी रक्षक असोथर थाना क्षेत्र के कुंसुभी गांव के रहने वाले थे। वह 1982 में गांव के रामशरन की पीट-पीट कर हत्या किए जाने में आरोपी था। वह 2005 में जेल से जमानत पर रिहा हुआ था।
इसके बाद हाईकोर्ट से उसे आजीवन कारावास हुआ था। दोबारा 2007 में जेल पहुंचा था। तभी से सजा काट रहा था। वह रात को लघुशंका के लिए गया था। तभी अचानक उसे चक्कर आया और वह बेहोश होकर गिर पड़ा।
घटना की खबर पर जेल प्रशासन ने उसे जिला अस्पताल भेजा। जहां पर डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम हाउस में बंदी रक्षक के बेटे विनोद ने बताया कि रविवार को परिवार के लोग मुलाकात के लिए जेल गए थे।
तब उनकी तबियत ठीक थी। अचानक मौत की बात समझ में नहीं आ रही है। जेल प्रशासन ने रात को उन लोगों को घटना की कोई खबर भी नहीं दी। जेल अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि आरोप निराधार है।
बंदी के पास मोबाइल नंबर नहीं था। इसके बावजूद बंदी की हालत बिगड़ने की खबर पड़ोसी गांव के ग्रामीण को दी गई थी। उनके साढ़ू रामखेलावन भी साथ में बैरक में निरुद्ध हैं।
बंदी रक्षक असोथर थाना क्षेत्र के कुंसुभी गांव के रहने वाले थे। वह 1982 में गांव के रामशरन की पीट-पीट कर हत्या किए जाने में आरोपी था। वह 2005 में जेल से जमानत पर रिहा हुआ था।
इसके बाद हाईकोर्ट से उसे आजीवन कारावास हुआ था। दोबारा 2007 में जेल पहुंचा था। तभी से सजा काट रहा था। वह रात को लघुशंका के लिए गया था। तभी अचानक उसे चक्कर आया और वह बेहोश होकर गिर पड़ा।
घटना की खबर पर जेल प्रशासन ने उसे जिला अस्पताल भेजा। जहां पर डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम हाउस में बंदी रक्षक के बेटे विनोद ने बताया कि रविवार को परिवार के लोग मुलाकात के लिए जेल गए थे।
तब उनकी तबियत ठीक थी। अचानक मौत की बात समझ में नहीं आ रही है। जेल प्रशासन ने रात को उन लोगों को घटना की कोई खबर भी नहीं दी। जेल अधीक्षक एके सिंह ने बताया कि आरोप निराधार है।
बंदी के पास मोबाइल नंबर नहीं था। इसके बावजूद बंदी की हालत बिगड़ने की खबर पड़ोसी गांव के ग्रामीण को दी गई थी। उनके साढ़ू रामखेलावन भी साथ में बैरक में निरुद्ध हैं।