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गुरु शिष्य का रिस्ता कलंकित करने वाले मौलवी को कारावास
Updated Thu, 27 Sep 2018 12:17 AM IST
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फतेहपुर। गुरु-शिष्य का रिश्ता कलंकित करने वाले मौलवी को अदालत ने दस वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मामला गाजीपुर थानाक्षेत्र के एक गांव का है। यहां के मदरसे में पढ़ाने वाला अब्दुल शकूर मदरसे की छात्रा को नशीली दवा खिलाकर उसे भगा ले गया था। छात्रा के पिता ने थाने में पहले गुमशुदगी की तहरीर दी थी। बाद में पुलिस ने घटना को बलात्कार की धारा में तरमीम कर दिया था। इस पूरे प्रकरण में बुधवार को अदालत ने आरोपी अब्दुल शकूर को दस वर्ष कारावास की सजा मुकर्रर कर दी। अदालत ने अभियुक्त को कारावास के साथ अर्थदंड भी लगाया है।
अब्दुल शकूर लखीमपुर खीरी जनपद के हैदराबाद थानाक्षेत्र का निवासी था। वह गाजीपुर थानाक्षेत्र के एक गांव के मदरसे में पढ़ाता था। 23 अगस्त 2014 की रात ग्यारह से बारह बजे के बीच शकूर छात्रा को उसके घर से भगा ले गया था। शकूर छात्रा को लखीमपुर खीरी ले गया था और वहीं उससे निकाह कर लिया था। इधर छात्रा के पिता ने पांच नवंबर 2014 को थाने में बेटी की गुमशुदगी की तहरीर दी थी और इसके ठीक पांच दिन बाद 10 नवंबर को
गाजीपुर पुलिस ने इस मसले में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। उसी दिन लापता बेटी की तलाश में निकले पिता और चाचा जब बेटी की खोजबीन कर बांदा से लौट रहे थे तो उन्होंने बहुआ में शकूर को देख लिया। पिता और चाचा ने शकूर को वहीं पकड़ लिया और थाने ले गए। इस दौरान छात्रा की भी बरामदगी हो गई। मामला अपर जिला जज रविकरन सिंह की फास्ट ट्रैक कोर्ट में विचाराधीन चल रहा था। जिसमें सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रहस बिहारी श्रीवास्तव की दलीलें और तर्काें के मद्देनजर व साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने छात्रा से दुष्कर्म करने के आरोपी अब्दुल शकूर को दस वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने शकूर पर 35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जिसमें से 25 हजार पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देय होंगे। अदालत का फैसला आने के बाद अब्दुल शकूर को जेल भेज दिया गया।
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मौलवी को दस साल की कैद
मदरसा छात्रा को घर से भगा कर ले जाने के मामले में हुई सजा
अमर उजाला ब्यूरो
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अब्दुल शकूर लखीमपुर खीरी जनपद के हैदराबाद थानाक्षेत्र का निवासी था। वह गाजीपुर थानाक्षेत्र के एक गांव के मदरसे में पढ़ाता था। 23 अगस्त 2014 की रात ग्यारह से बारह बजे के बीच शकूर छात्रा को उसके घर से भगा ले गया था। शकूर छात्रा को लखीमपुर खीरी ले गया था और वहीं उससे निकाह कर लिया था। इधर छात्रा के पिता ने पांच नवंबर 2014 को थाने में बेटी की गुमशुदगी की तहरीर दी थी और इसके ठीक पांच दिन बाद 10 नवंबर को
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गाजीपुर पुलिस ने इस मसले में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। उसी दिन लापता बेटी की तलाश में निकले पिता और चाचा जब बेटी की खोजबीन कर बांदा से लौट रहे थे तो उन्होंने बहुआ में शकूर को देख लिया। पिता और चाचा ने शकूर को वहीं पकड़ लिया और थाने ले गए। इस दौरान छात्रा की भी बरामदगी हो गई। मामला अपर जिला जज रविकरन सिंह की फास्ट ट्रैक कोर्ट में विचाराधीन चल रहा था। जिसमें सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रहस बिहारी श्रीवास्तव की दलीलें और तर्काें के मद्देनजर व साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने छात्रा से दुष्कर्म करने के आरोपी अब्दुल शकूर को दस वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने शकूर पर 35 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जिसमें से 25 हजार पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देय होंगे। अदालत का फैसला आने के बाद अब्दुल शकूर को जेल भेज दिया गया।
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अमर उजाला ब्यूरो