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पूर्व प्रधान व तत्कालीन पंचायत सचिव से होगी रिकवरी
Updated Mon, 29 Jan 2018 11:00 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। पूर्व प्रधान व तत्कालीन पंचायत सचिव पर सरकारी धनराशि को बंदरबांट करने का मामला सामने आया है। दोनों पर नाली, खड़ंजा निर्माण में तीन लाख 94 हजार रुपये का फर्जी भुगतान का आरोप है। डीएम के निर्देश पर सोमवार को दोनों से बराबर-बराबर वसूली की कार्रवाई हुई है।
ग्रामीण नवल सिंह पटेल और इंद्रजीत ने पूर्व प्रधान सज्जन बेग और तत्कालीन पंचायत सचिव प्रमोद सोनकर की शिकायत डीएम से की थी। इसमें पक्की सड़क से दिनेश के दरवाजे तक खड़ंजा, नाली निर्माण, अंसार के घर से मोईन के घर तक खड़ंजा, नौशाद के दरवाजे से बबलू के दरवाजे तक खड़ंजा, अनीस के दरवाजे से इश्तियाक के दरवाजे तक खड़ंजा निर्माण कराने के नाम पर फर्जी भुगतान कराने का आरोप लगाया था।
डीएम के निर्देश पर तत्कालीन सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी नीलेंद्र सिंह ने शिकायत के आधार पर जांच की थी, जिसमें बिना कार्य कराए फर्जी तरीके से भुगतान कराने का मामला उजागर हुआ है।
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डीपीआरओ अजय आनंद सरोज ने बताया कि जांच के बाद प्रधान व पंचायत सचिव से स्पष्टीकरण मांगा गया था। ग्राम प्रधान ने जो जवाब दिया था, वह संतोषजनक नहीं रहा। पंचायत सचिव ने कोई जवाब नहीं दिया है। दोनों से गबन की बराबर-बराबर धनराशि वसूली जाएगी।
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फतेहपुर। पूर्व प्रधान व तत्कालीन पंचायत सचिव पर सरकारी धनराशि को बंदरबांट करने का मामला सामने आया है। दोनों पर नाली, खड़ंजा निर्माण में तीन लाख 94 हजार रुपये का फर्जी भुगतान का आरोप है। डीएम के निर्देश पर सोमवार को दोनों से बराबर-बराबर वसूली की कार्रवाई हुई है।
ग्रामीण नवल सिंह पटेल और इंद्रजीत ने पूर्व प्रधान सज्जन बेग और तत्कालीन पंचायत सचिव प्रमोद सोनकर की शिकायत डीएम से की थी। इसमें पक्की सड़क से दिनेश के दरवाजे तक खड़ंजा, नाली निर्माण, अंसार के घर से मोईन के घर तक खड़ंजा, नौशाद के दरवाजे से बबलू के दरवाजे तक खड़ंजा, अनीस के दरवाजे से इश्तियाक के दरवाजे तक खड़ंजा निर्माण कराने के नाम पर फर्जी भुगतान कराने का आरोप लगाया था।
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डीएम के निर्देश पर तत्कालीन सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी नीलेंद्र सिंह ने शिकायत के आधार पर जांच की थी, जिसमें बिना कार्य कराए फर्जी तरीके से भुगतान कराने का मामला उजागर हुआ है।
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डीपीआरओ अजय आनंद सरोज ने बताया कि जांच के बाद प्रधान व पंचायत सचिव से स्पष्टीकरण मांगा गया था। ग्राम प्रधान ने जो जवाब दिया था, वह संतोषजनक नहीं रहा। पंचायत सचिव ने कोई जवाब नहीं दिया है। दोनों से गबन की बराबर-बराबर धनराशि वसूली जाएगी।