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डीपीआरओ का बाबू बन प्रधानपति से 15 हजार ठगे
Updated Fri, 07 Sep 2018 12:46 AM IST
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फतेहपुर। महिला प्रधानों को विशेष योजना का लाभ दिलाने का झांसा देकर टप्पेबाजों ने एक प्रधानपति को पंद्रह हजार रुपये का चूना लगा दिया। टप्पेेबाजों में एक ने खुद को डीपीआरओ दफ्तर का बाबू बताया था। सौ नंबर की सूचना पर पुलिस पहुंची हालांकि कोई सुराग हाथ नहीं लगा है।
अमौली ब्लाक के पांडेपुर निवासी ज्ञानेंद्र सिंह यादव की पत्नी विजेता यादव प्रधान हैं। प्रधानपति ने बताया कि उनके मोबाइल पर बुधवार शाम एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को डीपीआरओ ऑफिस का बाबू विजय
बताया। उसके मुख्यमंत्री योजना के तहत कुछ विशेष महिला ग्राम प्रधानों को प्रोत्साहन के लिए अंडरग्राउंड नाली के लिए डेढ़ लाख की मंजूरी होने के बारे में बताया। उसने पत्नी समेत दूसरी महिला प्रधानों के नाम गिनाए। कहा
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कि इस काम में फाइल खर्च 25 हजार रुपया और लेटरपैड लेकर आना होगा। वह सुबह करीब पौने दस बजे विकास भवन पहुंचा। फोन मिलाने पर उसने बताया कि फाइलें लेकर लखनऊ जाने के लिए ज्वालागंज बस स्टैंड
पर आ गया हूं। उसके बुलावे पर बसअड्डे पहुंचा। बसअड्डे के नजदीक पेट्रोल पंप के बाहर मिला। प्रधानपति ने बताया कि उन्होंने डीपीआरओ विभाग का बाबू बताने वाले विजय ने 15 हजार रुपए ले लिए। बाकी रकम लेटर पैड का प्रिंट निकालने गए साथी के आने पर देने की बात कही। इसी बीच आरोपी ने दूसरे प्रधान से मिलकर आने
की बात कही और पैदल चलने लगा। शक होने पर पीछा किया। इसी दौरान स्विफ्ट डिजायर कार आ पहुंची। कार का नंबर इलाहाबाद का था और उस पर हाईकोर्ट लिखा था। उसमें बैठकर आरोपी फरार हो गया। उसने फौरन 100 नंबर में सूचना दी। पीआरवी 3511 पहुंची। पुलिस को आपबीती बताई। कोतवाल शैलेंद्र सिंह ने बताया कि घटना की तहरीर पर जांच शुरू की गई है।
डीपीआरओ का बाबू बन प्रधानपति से 15 हजार ठगे
- इलाहाबाद के रजिस्ट्रेशन नंबर की कार से आए थे टप्पेबाज
अमर उजाला ब्यूरो
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अमौली ब्लाक के पांडेपुर निवासी ज्ञानेंद्र सिंह यादव की पत्नी विजेता यादव प्रधान हैं। प्रधानपति ने बताया कि उनके मोबाइल पर बुधवार शाम एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को डीपीआरओ ऑफिस का बाबू विजय
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बताया। उसके मुख्यमंत्री योजना के तहत कुछ विशेष महिला ग्राम प्रधानों को प्रोत्साहन के लिए अंडरग्राउंड नाली के लिए डेढ़ लाख की मंजूरी होने के बारे में बताया। उसने पत्नी समेत दूसरी महिला प्रधानों के नाम गिनाए। कहा
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कि इस काम में फाइल खर्च 25 हजार रुपया और लेटरपैड लेकर आना होगा। वह सुबह करीब पौने दस बजे विकास भवन पहुंचा। फोन मिलाने पर उसने बताया कि फाइलें लेकर लखनऊ जाने के लिए ज्वालागंज बस स्टैंड
पर आ गया हूं। उसके बुलावे पर बसअड्डे पहुंचा। बसअड्डे के नजदीक पेट्रोल पंप के बाहर मिला। प्रधानपति ने बताया कि उन्होंने डीपीआरओ विभाग का बाबू बताने वाले विजय ने 15 हजार रुपए ले लिए। बाकी रकम लेटर पैड का प्रिंट निकालने गए साथी के आने पर देने की बात कही। इसी बीच आरोपी ने दूसरे प्रधान से मिलकर आने
की बात कही और पैदल चलने लगा। शक होने पर पीछा किया। इसी दौरान स्विफ्ट डिजायर कार आ पहुंची। कार का नंबर इलाहाबाद का था और उस पर हाईकोर्ट लिखा था। उसमें बैठकर आरोपी फरार हो गया। उसने फौरन 100 नंबर में सूचना दी। पीआरवी 3511 पहुंची। पुलिस को आपबीती बताई। कोतवाल शैलेंद्र सिंह ने बताया कि घटना की तहरीर पर जांच शुरू की गई है।
डीपीआरओ का बाबू बन प्रधानपति से 15 हजार ठगे
- इलाहाबाद के रजिस्ट्रेशन नंबर की कार से आए थे टप्पेबाज
अमर उजाला ब्यूरो