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90 थानों की रिपोर्ट, 300 घंटे की फुटेज से भी नहीं खुले राज
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फतेहपुर। कहते हैं कि वारदात कितनी भी सफाई से क्यों न की गई हो, अपराधी अपने पीछे कोई न कोई सबूत जरूर छोड़ जाता है। लेकिन छह माह पहले अपराधियों ने एक युवती की हत्या तो की लेकिन अपने पीछे सुराग नहीं छोड़ा। 10 जिलों के 90 थानों की रिपोर्ट और 300 घंटे के सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद भी आज तक युवती और हत्यारों की पहचान रहस्य बनी हुई है।
कल्यानपुर थानाक्षेत्र के मुरादीपुर-बिंदकी मार्ग पर रेलवे क्रॉसिंग से पहले कंसपुर गांव है। इस गांव के पास रेलवे कॉरिडोर का निर्माण करने वाली कंपनी का प्लांट लगा हुआ है। 11 मार्च की तड़के प्लांट के नजदीक झाड़ियों में करीब 20 साल की युवती का शव सुलगता मिला था।
ग्रामीणों ने घटनास्थल पर 10 मार्च की देर रात एक बोलेरो देखी थी और पुलिस को इसकी जानकारी भी दी थी। शव को पेट्रोल डालकर फूंका गया था। युवती के चेहरे और बाल सुरक्षित बच गए थे। जांच के लिए थाना पुलिस और स्वाट टीम को लगाया गया। पुलिस की टीमों ने उन्नाव, कानपुर, बांदा, हमीरपुर, रायबरेली, प्रतापगढ़, प्रयागराज समेत 10 जिलों के 90 थानों से संपर्क किया। इन थानों से आई रिपोर्ट में सिर्फ नाकामी दर्ज थी।
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पुलिस ने बढ़ोरी टोल प्लाजा और प्लांट के सीसीटीवी कैमरों का 15-15 दिन का फुटेज इकट्ठा किया जो करीब 300 घंटे का था। फुटेज को बारीकी से देखा गया। इसके अलावा, संदेह के आधार पर कई लोगों से लंबी पूछताछ भी हुई। लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा।
काटे गए हाथ का भी नहीं लगा पता
हत्यारों ने युवती की पहचान मिटाने के मकसद से शव को जलाया था। इसके बाद भी युवती के बाल और चेहरा सुरक्षित बच गया था। युवती का एक हाथ भी काटा गया था। उस हाथ को कहां फेंका गया, इसका सुराग भी नहीं लगा। लंबी पड़ताल के बाद पुलिस का मानना है कि युवती आसपास के जिलों की नहीं है।
उसके बिहार, झारखंड के होने की भी संभावना जताई गई है। रेलवे कॉरिडोर का काम कर रही कंपनी के प्लांट में तमाम गैर प्रांतों के लोग रहते हैं। यहां के कर्मियों से हत्या का कनेक्शन होने की चर्चा ग्रामीणों में है। माना जा रहा है कि उनके संपर्क के ही युवती बाहर से आई होगी।
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कल्यानपुर थानाक्षेत्र के मुरादीपुर-बिंदकी मार्ग पर रेलवे क्रॉसिंग से पहले कंसपुर गांव है। इस गांव के पास रेलवे कॉरिडोर का निर्माण करने वाली कंपनी का प्लांट लगा हुआ है। 11 मार्च की तड़के प्लांट के नजदीक झाड़ियों में करीब 20 साल की युवती का शव सुलगता मिला था।
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ग्रामीणों ने घटनास्थल पर 10 मार्च की देर रात एक बोलेरो देखी थी और पुलिस को इसकी जानकारी भी दी थी। शव को पेट्रोल डालकर फूंका गया था। युवती के चेहरे और बाल सुरक्षित बच गए थे। जांच के लिए थाना पुलिस और स्वाट टीम को लगाया गया। पुलिस की टीमों ने उन्नाव, कानपुर, बांदा, हमीरपुर, रायबरेली, प्रतापगढ़, प्रयागराज समेत 10 जिलों के 90 थानों से संपर्क किया। इन थानों से आई रिपोर्ट में सिर्फ नाकामी दर्ज थी।
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पुलिस ने बढ़ोरी टोल प्लाजा और प्लांट के सीसीटीवी कैमरों का 15-15 दिन का फुटेज इकट्ठा किया जो करीब 300 घंटे का था। फुटेज को बारीकी से देखा गया। इसके अलावा, संदेह के आधार पर कई लोगों से लंबी पूछताछ भी हुई। लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा।
काटे गए हाथ का भी नहीं लगा पता
हत्यारों ने युवती की पहचान मिटाने के मकसद से शव को जलाया था। इसके बाद भी युवती के बाल और चेहरा सुरक्षित बच गया था। युवती का एक हाथ भी काटा गया था। उस हाथ को कहां फेंका गया, इसका सुराग भी नहीं लगा। लंबी पड़ताल के बाद पुलिस का मानना है कि युवती आसपास के जिलों की नहीं है।
उसके बिहार, झारखंड के होने की भी संभावना जताई गई है। रेलवे कॉरिडोर का काम कर रही कंपनी के प्लांट में तमाम गैर प्रांतों के लोग रहते हैं। यहां के कर्मियों से हत्या का कनेक्शन होने की चर्चा ग्रामीणों में है। माना जा रहा है कि उनके संपर्क के ही युवती बाहर से आई होगी।