{"_id":"62e820a51bcc4b2b412603a1","slug":"crime-fatehpur-news-knp7107126137","type":"story","status":"publish","title_hn":"शव क ीतलाश के लिए जनपदों की पुलिस से मदद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शव क ीतलाश के लिए जनपदों की पुलिस से मदद
विज्ञापन
खागा। छह आरोपियों को जेल भेजने के बाद पुलिस अब इरफान के शव की तलाश में जुटी है। यमुना किनारे के चार जनपदों को अलर्ट कराया है। अधिकारिक रूप से बांदा, चित्रकूट, कौशांबी और प्रयागराज को पत्र के जरिए यह सूचना भेजी गई है कि कोई भी शव यमुना में मिलने पर खागा पुलिस को जरूर सूचना दी जाए।
जबकि पुलिस की एक टीम परिजनों के साथ अभी भी औगासी पुल के नीचे सबूत की खोज में लगाई गई है। स्थानीय नाविकों के जरिए यह सर्च अभियान जारी रखा गया है।
अपहरण में जेल भेजे गए धर्मेंद्र व उसके साथियों के बयान के अनुसार शव उन्होंने औगासी पुल के नीचे (बांदा की ओर से आने पर पुल से 50 मीटर आगे) शव को फेंका था। यह जगह मरका थाना क्षेत्र के अंतर्गत आती है। जहां पर शव को फेंका गया, यह स्थान बहुत ही गहरा है और यहां पर जल का प्रवाह सबसे अधिक हैं। दो दिन सर्च अभियान चलने के बाद जब शव का पता नहीं चला तो पुलिस ने आरोपियों को जेल भेज दिया।
जबकि शव की खोजबीन के लिए पुलिस ने अब अपने सभी विकल्प अजमाने शुरू कर दिए हैं। पुलिस की ओर से बांदा, चित्रकूट, कौशांबी और प्रयागराज जनपद को सूचना दी गई है। जिनमें यह बताया गया है कि यमुना किनारे स्थित थानों को यह बताया जाए कि अगर कोई अज्ञात शव 21 जुलाई के बाद मिला है या फिर मिले तोे खागा पुलिस को इसकी जानकारी दी जाए।
विज्ञापन
घटना के मास्टर माइंड धर्मेंद्र ने घटना के बाद पहनी गई अपनी शर्ट जोनिहा चौराहे के पास एक नहर में फेंकी थी। जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया था। शर्ट पर खून के निशान थे। जिसकी सैम्पलिंग कराई गई है।
धर्मेंद्र ने इस घटना की साजिश हुबहू फिल्म दृश्यम की तरह रची थी। जिस तरह से फिल्म में पुलिस मुख्य प्रमाण को नहीं खोज पाती है और सारे सबूत मिल जाते है। वैसे ही घटना में पुलिस ने अपहरण के सभी व हत्या के कुछ आंशिक प्रमाण खोजे हैं लेकिन वह अभी तक शव बरामद नहीं कर सकी है।
धर्मेंद्र ने फिल्म की तरह ही इरफान व अपनी चीजों को एक ही जगह के बजाए, अलग-अलग जगहों पर फेंका था। जैसे ही इरफान का मोबाइल राजापुर-कमासिन रोड पर मिला तो उसका पर्स, एक आरोपी के पास से। इरफान की टोपी व जूते उन्हें औगासी पुल के पास से मिले तो धर्मेंद्र ने अपनी शर्ट को जोनिहा चौराहे से पहले पड़ने वाली नहर में फेंका।
विज्ञापन
जबकि पुलिस की एक टीम परिजनों के साथ अभी भी औगासी पुल के नीचे सबूत की खोज में लगाई गई है। स्थानीय नाविकों के जरिए यह सर्च अभियान जारी रखा गया है।
अपहरण में जेल भेजे गए धर्मेंद्र व उसके साथियों के बयान के अनुसार शव उन्होंने औगासी पुल के नीचे (बांदा की ओर से आने पर पुल से 50 मीटर आगे) शव को फेंका था। यह जगह मरका थाना क्षेत्र के अंतर्गत आती है। जहां पर शव को फेंका गया, यह स्थान बहुत ही गहरा है और यहां पर जल का प्रवाह सबसे अधिक हैं। दो दिन सर्च अभियान चलने के बाद जब शव का पता नहीं चला तो पुलिस ने आरोपियों को जेल भेज दिया।
विज्ञापन
जबकि शव की खोजबीन के लिए पुलिस ने अब अपने सभी विकल्प अजमाने शुरू कर दिए हैं। पुलिस की ओर से बांदा, चित्रकूट, कौशांबी और प्रयागराज जनपद को सूचना दी गई है। जिनमें यह बताया गया है कि यमुना किनारे स्थित थानों को यह बताया जाए कि अगर कोई अज्ञात शव 21 जुलाई के बाद मिला है या फिर मिले तोे खागा पुलिस को इसकी जानकारी दी जाए।
विज्ञापन
घटना के मास्टर माइंड धर्मेंद्र ने घटना के बाद पहनी गई अपनी शर्ट जोनिहा चौराहे के पास एक नहर में फेंकी थी। जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया था। शर्ट पर खून के निशान थे। जिसकी सैम्पलिंग कराई गई है।
धर्मेंद्र ने इस घटना की साजिश हुबहू फिल्म दृश्यम की तरह रची थी। जिस तरह से फिल्म में पुलिस मुख्य प्रमाण को नहीं खोज पाती है और सारे सबूत मिल जाते है। वैसे ही घटना में पुलिस ने अपहरण के सभी व हत्या के कुछ आंशिक प्रमाण खोजे हैं लेकिन वह अभी तक शव बरामद नहीं कर सकी है।
धर्मेंद्र ने फिल्म की तरह ही इरफान व अपनी चीजों को एक ही जगह के बजाए, अलग-अलग जगहों पर फेंका था। जैसे ही इरफान का मोबाइल राजापुर-कमासिन रोड पर मिला तो उसका पर्स, एक आरोपी के पास से। इरफान की टोपी व जूते उन्हें औगासी पुल के पास से मिले तो धर्मेंद्र ने अपनी शर्ट को जोनिहा चौराहे से पहले पड़ने वाली नहर में फेंका।