फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Fatehpur News ›   crime,fatehpur news

दलालों की मदद से बनवाया था पासपोर्ट

Fri, 01 Oct 2021 12:48 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 01 Oct 2021 12:48 AM IST
विज्ञापन
crime,fatehpur news
फतेहपुर। नेपाल मूल के मौलवी का पासपोर्ट जारी होना पुलिस और खुफिया तंत्र पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। पासपोर्ट के आवेदन के बाद इन दोनों विभागों की जांच रिपोर्ट भी लगीं, जिनकी मदद से मौलाना को पासपोर्ट जारी हो गया।
विज्ञापन

पुलिस टीमों की जांच के दौरान यह बड़ा सवाल खड़ा हुआ कि आखिर पासपोर्ट कैसे बना। इस बारे में टीमों ने मौलाना फिरोज आलम से पूछताछ की। मौलाना ने बताया कि पासपोर्ट की जांच में वह किसी के सामने पेश नहीं हुआ।
विज्ञापन

आवेदन के बाद शुरू होने वाली जांच प्रक्रिया महज पांच से छह हजार के खर्चे में निपट गई थी। इसके बाद पासपोर्ट जारी हो गया। एक तरह से मौलाना के पास दो देशों की नागरिकता हो गई थी। वह देश में आपराधिक कार्य करने के बाद नेपाल में आसानी से शरण ले सकता था। उसे खोजना नाकों चने चबाना जैसा होता।
विज्ञापन
विज्ञापन

पासपोर्ट के अलावा उसका मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस तक जारी हुआ। सबसे पहले उसने मतदाता पहचान पत्र बनवाया था। यह कैसे बना इसकी भी खोजबीन की जा रही है। उसके सारे दस्तावेजों को बनवाने के पीछे कौन लोग हैं, इसकी भी जांच हो रही है।
एसपी राजेश कुमार सिंह ने बताया मामले में हर बिंदु पर जांच की जा रही है। पासपोर्ट वेरीफिकेशन में किन अधिकारियों ने जांच की है, उसकी भी पड़ताल होगी। मौलाना का सहयोग करने वाले भी जांच के दायरे में हैं।
जिले में मौलाना ने मुंशी से फाजिल तक ली तालीम
मौलाना फिरोज आलम रिजवी ने जिले के कई इस्लामिक शिक्षण संस्थानों में तालीम हासिल की। जिले में आने के बाद वह बिंदकी की एक मस्जिद में रहा। जहां काम करता था और शुरुआती तालीम लेता रहा।
उसकी प्रमुख तौर से तालीम 2008 में शुरू हुई। मौलाना ने 2008 में मुंशी (समकक्ष हाई स्कूल) की तालीम बिंदकी के मदरसे से पूरी की। 2009 में शहर के सनगांव स्थित इस्लामिक शिक्षा संस्थान से मौलवी (समकक्ष इंटर) की तालीम 2010-11 में पूरी की। सनगांव में ही कामिल (समकक्ष स्नातक) की तालीम ली। उसके बाद हसवा स्थित इस्लामिक शिक्षण संस्थान से 2014 से 15 के बीच फाजिल (समकक्ष परास्नातक) की तालीम ली।
पूरा परिवार नेपाल में रहता
मौलाना का पूरा परिवार नेपाल में ही रहता है। लोगों के बीच चर्चा रही कि कई साल पहले उसका परिवार एक बार आया था। मौलाना इमाम बनने के बाद काफी व्यस्त हो गया था। उसे नेपाल जाने का मौका नहीं मिलता था। नेपाल में पिता, मां, भाई, पत्नी और दो बेटियां हैं।
मौलाना के समर्थन में भी कुछ लोग जुटे
मौलाना ने ग्रामीणों के बीच अपनी अच्छी पकड़ बना रखी है। उसकी धरपकड़ के बाद कुछ ग्रामीण इकट्ठा हुए और मौलाना को बेवजह फंसाने का आरोप लगाने लगे। हालांकि पुलिस ने सबूत सामने रखे तो उनके भी होश उड़ गए और वह बैकफुट पर हो गए।
प्रधानी चुनाव के बाद से मौलाना और कमेटी के बीच शुरू हुआ विवाद
मौलाना की नागरिकता का मामला अभी सालों साल छिपा रहता, लेकिन प्रधानी चुनाव की वजह से मामला उभरकर सामने आया। पुलिस की जांच के अनुसार विवाद की असल वजह चुनाव था। गाजीपुर कस्बा का प्रधान बड़ी मस्जिद से जुड़ा हुआ ही बनता रहा है। इस मर्तबा चुनाव में उलटफेर हो गया। इसके पीछे मौलाना का हाथ माना जाने लगा। जिसके बाद सालों से मौलाना के छुपाए रहस्यों को कुछ लोग सामने लेकर आए।

मौलाना का मोबाइल और यात्राओं की जांच शुरू
मौलाना के मोबाइल और यात्राओं की जांच शुरू की गई है। मोबाइल के जरिए मौलाना का कनेक्शन पुलिस खोजने में जुटी है। पुलिस उसकी यात्राओं के बारे में भी जानकारी जुटाने में जुटी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed