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फतेहपुरः झमाझम बारिश से फसलों को मिली संजीवनी
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सिविल लाइन्स में सड़क पर भरा बारिश का पानी। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। झमाझम बारिश से फसलों को संजीवनी मिल गई है। 13 दिन के बाद 45 मिमी बारिश दर्ज की गई। बरसात होने से लोगों को उमसभरी गर्मी से राहत मिली है।
अबकी बार मानसून की बेरुखी से किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उम्मीद से आधी बारिश होने से धान की फसलें काफी प्रभावित हो रही हैं। मंगलवार को दिन में बादल छाए रहे। रात नौ बजे बारिश शुरू हुई और रात भर रुक-रुक कर होती रही। बुधवार को भी रुक-रुककर बारिश होती रही। बुुधवार को फसलें हरी-भरी दिखने लगी। झमाझम बारिश से शहर की कई सड़कों पर बारिश का पानी भर गया, लेकिन लोगों को उससे ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। जिला कृषि अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि यह बारिश धान की फसल के लिए फायदेमंद है। सितंबर महीने में दूसरी बार 45 मिमी बारिश हुई है। इसके पहले दो सितंबर को 46 मिमी बारिश हुई थी।
बारिश से तापमान में भी कमी आई है। जिले में खरीफ फसल के बाद अरहर, तिल, ज्वार की फसलों की सर्वाधिक बुआई की जाती है। महीना भर से जोरदार बारिश न होने के कारण और तेज धूप से फसलें सूखने लगी थी। अरहर, ज्वार, तिल की फसलें असिंचित क्षेत्र में ही ज्यादातर बोई जाती हैं। इनकी सिंचाई के लिए किसानों के पास साधन भी नहीं रहता है। बारिश के भरोसे ही किसान इनकी खेती करते हैं। उधर, रक्षपालपुर संवाद के मुताबिक खखरेरू नगर पंचायत के पुरानी बाजार सोनारन गली में बरसात के कारण जलभराव हो गया। जल निकासी की व्यवस्था बाधित होने के कारण पानी सड़क पर रुका तो आवागमन ठप हो गया। लोग केवल बाइक और साइकिल से ही निकल पा रहे हैं।
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अबकी बार मानसून की बेरुखी से किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उम्मीद से आधी बारिश होने से धान की फसलें काफी प्रभावित हो रही हैं। मंगलवार को दिन में बादल छाए रहे। रात नौ बजे बारिश शुरू हुई और रात भर रुक-रुक कर होती रही। बुधवार को भी रुक-रुककर बारिश होती रही। बुुधवार को फसलें हरी-भरी दिखने लगी। झमाझम बारिश से शहर की कई सड़कों पर बारिश का पानी भर गया, लेकिन लोगों को उससे ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। जिला कृषि अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि यह बारिश धान की फसल के लिए फायदेमंद है। सितंबर महीने में दूसरी बार 45 मिमी बारिश हुई है। इसके पहले दो सितंबर को 46 मिमी बारिश हुई थी।
बारिश से तापमान में भी कमी आई है। जिले में खरीफ फसल के बाद अरहर, तिल, ज्वार की फसलों की सर्वाधिक बुआई की जाती है। महीना भर से जोरदार बारिश न होने के कारण और तेज धूप से फसलें सूखने लगी थी। अरहर, ज्वार, तिल की फसलें असिंचित क्षेत्र में ही ज्यादातर बोई जाती हैं। इनकी सिंचाई के लिए किसानों के पास साधन भी नहीं रहता है। बारिश के भरोसे ही किसान इनकी खेती करते हैं। उधर, रक्षपालपुर संवाद के मुताबिक खखरेरू नगर पंचायत के पुरानी बाजार सोनारन गली में बरसात के कारण जलभराव हो गया। जल निकासी की व्यवस्था बाधित होने के कारण पानी सड़क पर रुका तो आवागमन ठप हो गया। लोग केवल बाइक और साइकिल से ही निकल पा रहे हैं।
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