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कोर्ट के फैसले से प्रशिक्षित उपनिरीक्षकों में छायी खुशी

Fri, 07 Jan 2022 07:51 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 07 Jan 2022 07:51 PM IST
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Candidates expressed happiness over the decision of the court
फतेहपुर। 2020 में प्रशिक्षण पूरा करने वाले उपनिरीक्षकों के पक्ष में शुक्रवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया है। फैसले से जिले के सफल उपनिरीक्षकों में खुशी छा गई। जल्द ही उन्हें शासन से नियुक्त पत्र मिला सकता है।
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उपनिरीक्षकों की 2016 में शासन से भर्ती आई थी। एक साल बाद अभ्यर्थियों की लिखित परीक्षा हुई थी। 2018 में शारीरिक दक्षता परीक्षा के बाद 2019 में ट्रेनिंग चालू हुई। जून 2020 में प्रशिक्षण पूरा होने के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती पर रोक लगाई थी। इससे जिले के करीब 35 पुरुष उपनिरीक्षक और चार महिला उपनिरीक्षकों की भर्ती रुकी थी।
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कोर्ट का फैसला आने से उपनिरीक्षकों और उनके परिवारों में खुशी का माहौल है। परिवारों ने एक-दूसरे मिठाई बाटकर खुशी का इजहार किया। ट्रेनिंग के बाद दरोगा बनने की चाह लेकर करीब सवा साल से इंतजार करने वाले जिले के कुछ उपनिरीक्षकों की जुबानी।
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प्रशिक्षण पूरा करने वाले शुभेंदु दीक्षित मूल रूप से अमौली ब्लाक के दरियापुर जेदिया गांव निवासी हैं। परिवार के साथ औंग में रहते हैं। दरोगा भर्ती में प्रदेश में 193 रैंक आई थी। पिता ज्ञानेंद्र दीक्षित किसान और मां श्यामलता गृहिणी हैं। भाई शुभांग रेलवे में टेक्नीशियन है। शुभेंदु ने बताया कि वह कोचिंग पढ़ाते रहे हैं। भर्ती पर रोक के बाद मायूस हो गए थे। उन्हें कोर्ट पर पूरा विश्वास था।
प्रशिक्षण पूरा करने वाले सनद पटेल अमौली ब्लाक के मोतीपुर गांव के रहने वाले हैं। उनकी 11वीं रैंक आई थी। पिता अवध बिहारी किसान हैं। मां सावित्री देवी गृहिणी हैं। सनद ने बताया कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भर्ती पर रोक लगी थी। उसके बाद भी पुलिस सेवा से पीछे नहीं हटे थे। व्यवहारिक प्रशिक्षण पर जिले में थे। कोरोना के दौरान सीएए, एनआरसी की ड्यूटी की थी।

डिघरुवा के रोहित पटेल ने बताया कि पिता खेती करते हैं। तकरीबन डेढ़ साल से घर बैठे हैं और एक छोटी की बहन भी है। उन्होंने बताया कि कोई काम नहीं मिला तो गांव में ही एक डेयरी खोल ली थी। जिससे थोड़ी-बहुत आमदनी हो जाती थी। शेष कोई दूसरा काम नहीं मिला। कोर्ट का आदेश आने के बाद पूरी परिवार में खुशी का माहौल छा गया।
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