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सरकारी खरीद केंद्र पर किसानों का हो रहा शोषण
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फतेहपुर। सरकारी खरीद केंद्रों में किसानों का शोषण हो रहा है। क्रय केंद्रों में बिचौलिया और केंद्र प्रभारियों के बीच हो रही धांधली को देखने वाला कोई नहीं है। किसानों को कभी टोकन के नाम पर तो कभी सरकार के मानक बताकर लौटाया जाता है। थक हारकर किसान बिचौलियों से सौदा करता है और ऑनलाइन कराए हुए दस्तावेज भी किसान बिचौलियों को देता है।
किसानों का गेहूं खरीदने के लिए जिले में 59 क्रय केंद्र खोल दिए गए हैं, लेकिन किसानों को सरकारी भाव का फायदा नहीं मिल रहा है। किसानों से गेहूं औने-पौने दाम में लेकर बिचौलिया सरकारी भाव का लाभ ले रहे हैं। मजे की बात यह है कि बिचौलियों को कागज के लिए भी भटकना नहीं पड़ता है। जो किसान गेहूं बेचने आता है, वह पहले ऑनलाइन पंजीयन करा लेता है। क्रय केंद्र में किसानों को 25 से 30 दिन के आगे का टोकन जारी होता है। गेहूं बेचने की इतनी लंबी तारीख देखकर किसान घबरा जाता है और क्रय केंद्र के आसपास ही मौजूद बिचौलिया सौदे बाजी करने के लिए किसान को एकांत में बुला लेते हैं।
गेहूं की तौल एक-दो दिन में कराने का लालच देते हैं, बदले में 300 से 350 रुपये क्विंटल के हिसाब से सौदेबाजी करते हैं। साथ ही किसानों के ही खाता में रुपया भेजने का लालच देते हैं। मजबूरी में किसान अपने गेहूं को बिचौलियों के हाथ बेच रहे हैं।
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कोरोना महामारी में लगे अधिकारी
सरकारी खरीद की देखरेख करने वाले अधिकारी इस समय कोरोना महामारी में लगे हैं। क्रय केंद्रों में क्या हो रहा है, इससे कोई मतलब नहीं है। केंद्र प्रभारी रोज की फीडिंग तौल कराने के बाद करते हैं, या फिर बिचौलियों के गेहूं की बोरियां दिखाकर कोटा पूरा करते हैं। इसकी कोई चिंता नहीं है।
चुनका डेरा के किसान नीरज सिंह ने कहा कि क्रय केंद्र में बिचालियां हावी है। टोकन जारी करने के बाद भी गेहूं की तौल नहीं कराई गई है। असोथर क्रय केंद्र में 10 दिन से गेहूं पड़ा हुआ है। केंद्र प्रभारी से कई बार कहा जा चुका है। कभी बोरी न होने तो कभी क्रय केंद्र में जगह न होने की बात कह कर टाल देती हैं। जबकि केंद्र प्रभारी व बिचौलिया मिलकर खेल कर रहे हैं।
....
जानिकपुर गांव के किसान महेशचंद्र ने कहा कि ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद बड़ी मुश्किल से सत्यापन हुआ है। अब क्रय केंद्र में गेहूं बेचने के लिए आए तो यहां पर नौ जून के लिए टोकन दिया गया है। मई के अंतिम सप्ताह में धान की नर्सरी डालना है, उसके लिए बीज खरीदना है और आगे की खेती करने की तैयारी करनी है। ऐसे में लगता है बिचौलियों से ही गेहूं का सौदा करना पड़ेगा।
......
किसी भी क्रय केंद्र में बिचौलिया मिलते हैं, तो केंद्र प्रभारी जिम्मेदार होंगे। टीम बनाकर औचक निरीक्षण किया जाएगा। साथ ही गेहूं बेचने वाले किसान से मोबाइल पर संपर्क किया जाएगा। किसान अगर किसी प्रकार की शिकायत करता है, तो कार्रवाई की जाएगी।
-- लालता प्रसाद शाक्य, एडीएम
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किसानों का गेहूं खरीदने के लिए जिले में 59 क्रय केंद्र खोल दिए गए हैं, लेकिन किसानों को सरकारी भाव का फायदा नहीं मिल रहा है। किसानों से गेहूं औने-पौने दाम में लेकर बिचौलिया सरकारी भाव का लाभ ले रहे हैं। मजे की बात यह है कि बिचौलियों को कागज के लिए भी भटकना नहीं पड़ता है। जो किसान गेहूं बेचने आता है, वह पहले ऑनलाइन पंजीयन करा लेता है। क्रय केंद्र में किसानों को 25 से 30 दिन के आगे का टोकन जारी होता है। गेहूं बेचने की इतनी लंबी तारीख देखकर किसान घबरा जाता है और क्रय केंद्र के आसपास ही मौजूद बिचौलिया सौदे बाजी करने के लिए किसान को एकांत में बुला लेते हैं।
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गेहूं की तौल एक-दो दिन में कराने का लालच देते हैं, बदले में 300 से 350 रुपये क्विंटल के हिसाब से सौदेबाजी करते हैं। साथ ही किसानों के ही खाता में रुपया भेजने का लालच देते हैं। मजबूरी में किसान अपने गेहूं को बिचौलियों के हाथ बेच रहे हैं।
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कोरोना महामारी में लगे अधिकारी
सरकारी खरीद की देखरेख करने वाले अधिकारी इस समय कोरोना महामारी में लगे हैं। क्रय केंद्रों में क्या हो रहा है, इससे कोई मतलब नहीं है। केंद्र प्रभारी रोज की फीडिंग तौल कराने के बाद करते हैं, या फिर बिचौलियों के गेहूं की बोरियां दिखाकर कोटा पूरा करते हैं। इसकी कोई चिंता नहीं है।
चुनका डेरा के किसान नीरज सिंह ने कहा कि क्रय केंद्र में बिचालियां हावी है। टोकन जारी करने के बाद भी गेहूं की तौल नहीं कराई गई है। असोथर क्रय केंद्र में 10 दिन से गेहूं पड़ा हुआ है। केंद्र प्रभारी से कई बार कहा जा चुका है। कभी बोरी न होने तो कभी क्रय केंद्र में जगह न होने की बात कह कर टाल देती हैं। जबकि केंद्र प्रभारी व बिचौलिया मिलकर खेल कर रहे हैं।
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जानिकपुर गांव के किसान महेशचंद्र ने कहा कि ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद बड़ी मुश्किल से सत्यापन हुआ है। अब क्रय केंद्र में गेहूं बेचने के लिए आए तो यहां पर नौ जून के लिए टोकन दिया गया है। मई के अंतिम सप्ताह में धान की नर्सरी डालना है, उसके लिए बीज खरीदना है और आगे की खेती करने की तैयारी करनी है। ऐसे में लगता है बिचौलियों से ही गेहूं का सौदा करना पड़ेगा।
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किसी भी क्रय केंद्र में बिचौलिया मिलते हैं, तो केंद्र प्रभारी जिम्मेदार होंगे। टीम बनाकर औचक निरीक्षण किया जाएगा। साथ ही गेहूं बेचने वाले किसान से मोबाइल पर संपर्क किया जाएगा। किसान अगर किसी प्रकार की शिकायत करता है, तो कार्रवाई की जाएगी।
-- लालता प्रसाद शाक्य, एडीएम