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Fatehpur News: बेतवा की रेत, खराब सीमेंट और टूटे पिलर ने खड़े किए सवाल
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फोटो 30 एचएएमपी 37- स्टोर परिसर में रखी खराब सीमेंट की बोरियां। संवाद
हमीरपुर। बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे में छह लोगों की मौत के बाद जांच का दायरा अब केवल आंधी-तूफान तक सीमित नहीं रह गया है। दूसरे दिन निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों, निगरानी व्यवस्था और निर्माण प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। घटनास्थल की पड़ताल, प्रत्यक्षदर्शी गार्ड के आरोप और कंपनी के स्टोर यार्ड की स्थिति ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
शनिवार को अमर उजाला टीम ने हादसे वाले स्थल और निर्माण कंपनी के स्टोर यार्ड का निरीक्षण किया। घटनास्थल पर ढहा हुआ कंक्रीट ढांचा, कई जगहों से बाहर निकली सरिया, क्षतिग्रस्त लॉन्चिंग गैंट्री और टूटे पिलर दिखाई दिए। जिस हिस्से के नीचे दबकर छह मजदूरों और कर्मचारियों की मौत हुई थी वहां अब भी भारी मलबा और टूटी संरचना मौजूद है।
स्थानीय लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा टूटे पिलर को लेकर रही। लोगों का कहना है कि तकनीकी जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि संरचना का कौन सा हिस्सा पहले कमजोर हुआ और इतनी बड़ी विफलता कैसे हुई।
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आरोप : निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच की जानकारी नहीं दी जाती थी
हादसे में बचे गार्ड अवधपाल ने निर्माण कार्य को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वह लंबे समय से साइट पर तैनात थे और उनके सामने ही काम चलता रहा। उन्होंने दावा किया कि बेतवा नदी से निकाली गई रेत का इस्तेमाल निर्माण में किया जा रहा था।
अवधपाल के अनुसार मजदूरों को निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच की कोई जानकारी नहीं दी जाती थी। उन्होंने मांग की कि रेत, सीमेंट और अन्य सामग्री की स्वतंत्र तकनीकी जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
गार्ड ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में तेजी के दबाव में काम कराया जा रहा था। उनके अनुसार इंजीनियर राजू और पवन समय से पहले काम पूरा कराने में लगे थे और खराब मौसम के बावजूद निर्माण जारी रहा। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह जांच का विषय है।
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जांच में स्थिति होगी स्पष्ट
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप थी तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी अन्यथा खामियां भी सामने आएंगी। ग्रामीणों का कहना है कि हादसे की जांच केवल मौसम पर नहीं, बल्कि निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी केंद्रित होनी चाहिए। फिलहाल बेतवा किनारे पड़ा मलबा, टूटे पिलर, बाहर निकली सरिया, खराब हालत में मिली सीमेंट की बोरियां और प्रत्यक्षदर्शियों के आरोप कई ऐसे सवाल छोड़ रहे हैं जिनके जवाब तकनीकी जांच, पुलिस पड़ताल और विभागीय रिपोर्ट से ही सामने आ सकेंगे।
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चेतावनी के बावजूद मजदूरों को नहीं भेजा सुरक्षित स्थान
मृतक पुष्पेंद्र सिंह चौहान के भाई राघवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि मौसम को लेकर पहले से चेतावनी जारी थी। इसके बावजूद मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर नहीं भेजा गया। उनका कहना है कि हादसे के बाद भी कंपनी के जिम्मेदार लोग मौके पर नहीं पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीण सचिन सेंगर ने हादसे को सिस्टम की विफलता बताया है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और मानकों के अनुरूप हुआ होता तो इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती। उन्होंने कहा कि केवल आंधी-तूफान को कारण मान लेना पर्याप्त नहीं है बल्कि निर्माण सामग्री, तकनीकी गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था की भी जांच जरूरी है।
हादसे में बचे मजदूर इरफान और शफीक ने भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि छह मजदूरों की मौत केवल आंकड़ा नहीं है बल्कि पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक कारण सामने आ सकें। साथ ही उन्होंने मृतकों के परिजन को दी जा रही सहायता को अपर्याप्त बताते हुए दीर्घकालिक मदद की मांग की है।
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श्रम विभाग ने निर्माण कंपनी को जारी किया नोटिस
श्रम विभाग ने निर्माण कंपनी को वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट के तहत नोटिस जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार मृतकों के आश्रितों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और विभिन्न विभागीय टीमें मामले की जांच करेंगी।
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स्टोर यार्ड में खराब मिली सीमेंट
पड़ताल के दौरान निर्माण कंपनी के स्टोर यार्ड में बड़ी संख्या में सीमेंट की बोरियां पाई गईं। कई बोरियां फटी हुई थीं और कुछ में सीमेंट जमकर कठोर हो चुका था। कुछ में नमी भी थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण सामग्री के नमूनों की जांच की जानी चाहिए।
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400 रुपये पेनाल्टी का भी आरोप
प्रत्यक्षदर्शी गार्ड और कुछ परिजन ने आरोप लगाया है कि ड्यूटी पर न पहुंचने पर मजदूरी काटने के साथ अतिरिक्त पेनाल्टी भी लगाई जाती थी। उनका दावा है कि आर्थिक दबाव के चलते कई मजदूर खराब मौसम में भी ड्यूटी पर पहुंचते थे। जांच में यह पहलू भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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मजदूरों की मांग : केवल मुआवजा नहीं, सच्चाई भी सामने आए
बचे हुए मजदूरों का कहना है कि मृतकों के परिवारों को सहायता मिलना जरूरी है। साथ ही हादसे की वास्तविक वजह भी सामने आनी चाहिए। उनका कहना है कि जांच निष्पक्ष और तकनीकी आधार पर होनी चाहिए।
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सिस्टम फेलियर बता रहे ग्रामीण
ग्रामीण सचिन सेंगर का कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और निगरानी के साथ हुआ होता तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती। उनका कहना है कि जिम्मेदारी तय किए बिना केवल इसे हादसा मान लेना उचित नहीं होगा।
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जांच में इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे
- मौसम अलर्ट के दौरान साइट पर क्या स्थिति थी?
- क्या काम जारी था?
- निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप थी या नहीं?
- रेत और सीमेंट की गुणवत्ता की जांच हुई थी या नहीं?
- पिलर और संरचना के टूटने की वास्तविक तकनीकी वजह क्या थी?
- सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं?
- जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी?
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शनिवार को अमर उजाला टीम ने हादसे वाले स्थल और निर्माण कंपनी के स्टोर यार्ड का निरीक्षण किया। घटनास्थल पर ढहा हुआ कंक्रीट ढांचा, कई जगहों से बाहर निकली सरिया, क्षतिग्रस्त लॉन्चिंग गैंट्री और टूटे पिलर दिखाई दिए। जिस हिस्से के नीचे दबकर छह मजदूरों और कर्मचारियों की मौत हुई थी वहां अब भी भारी मलबा और टूटी संरचना मौजूद है।
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स्थानीय लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा टूटे पिलर को लेकर रही। लोगों का कहना है कि तकनीकी जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि संरचना का कौन सा हिस्सा पहले कमजोर हुआ और इतनी बड़ी विफलता कैसे हुई।
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आरोप : निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच की जानकारी नहीं दी जाती थी
हादसे में बचे गार्ड अवधपाल ने निर्माण कार्य को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वह लंबे समय से साइट पर तैनात थे और उनके सामने ही काम चलता रहा। उन्होंने दावा किया कि बेतवा नदी से निकाली गई रेत का इस्तेमाल निर्माण में किया जा रहा था।
अवधपाल के अनुसार मजदूरों को निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच की कोई जानकारी नहीं दी जाती थी। उन्होंने मांग की कि रेत, सीमेंट और अन्य सामग्री की स्वतंत्र तकनीकी जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
गार्ड ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में तेजी के दबाव में काम कराया जा रहा था। उनके अनुसार इंजीनियर राजू और पवन समय से पहले काम पूरा कराने में लगे थे और खराब मौसम के बावजूद निर्माण जारी रहा। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह जांच का विषय है।
जांच में स्थिति होगी स्पष्ट
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप थी तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी अन्यथा खामियां भी सामने आएंगी। ग्रामीणों का कहना है कि हादसे की जांच केवल मौसम पर नहीं, बल्कि निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी केंद्रित होनी चाहिए। फिलहाल बेतवा किनारे पड़ा मलबा, टूटे पिलर, बाहर निकली सरिया, खराब हालत में मिली सीमेंट की बोरियां और प्रत्यक्षदर्शियों के आरोप कई ऐसे सवाल छोड़ रहे हैं जिनके जवाब तकनीकी जांच, पुलिस पड़ताल और विभागीय रिपोर्ट से ही सामने आ सकेंगे।
चेतावनी के बावजूद मजदूरों को नहीं भेजा सुरक्षित स्थान
मृतक पुष्पेंद्र सिंह चौहान के भाई राघवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि मौसम को लेकर पहले से चेतावनी जारी थी। इसके बावजूद मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर नहीं भेजा गया। उनका कहना है कि हादसे के बाद भी कंपनी के जिम्मेदार लोग मौके पर नहीं पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीण सचिन सेंगर ने हादसे को सिस्टम की विफलता बताया है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और मानकों के अनुरूप हुआ होता तो इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती। उन्होंने कहा कि केवल आंधी-तूफान को कारण मान लेना पर्याप्त नहीं है बल्कि निर्माण सामग्री, तकनीकी गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था की भी जांच जरूरी है।
हादसे में बचे मजदूर इरफान और शफीक ने भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि छह मजदूरों की मौत केवल आंकड़ा नहीं है बल्कि पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक कारण सामने आ सकें। साथ ही उन्होंने मृतकों के परिजन को दी जा रही सहायता को अपर्याप्त बताते हुए दीर्घकालिक मदद की मांग की है।
श्रम विभाग ने निर्माण कंपनी को जारी किया नोटिस
श्रम विभाग ने निर्माण कंपनी को वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट के तहत नोटिस जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार मृतकों के आश्रितों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और विभिन्न विभागीय टीमें मामले की जांच करेंगी।
स्टोर यार्ड में खराब मिली सीमेंट
पड़ताल के दौरान निर्माण कंपनी के स्टोर यार्ड में बड़ी संख्या में सीमेंट की बोरियां पाई गईं। कई बोरियां फटी हुई थीं और कुछ में सीमेंट जमकर कठोर हो चुका था। कुछ में नमी भी थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण सामग्री के नमूनों की जांच की जानी चाहिए।
400 रुपये पेनाल्टी का भी आरोप
प्रत्यक्षदर्शी गार्ड और कुछ परिजन ने आरोप लगाया है कि ड्यूटी पर न पहुंचने पर मजदूरी काटने के साथ अतिरिक्त पेनाल्टी भी लगाई जाती थी। उनका दावा है कि आर्थिक दबाव के चलते कई मजदूर खराब मौसम में भी ड्यूटी पर पहुंचते थे। जांच में यह पहलू भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मजदूरों की मांग : केवल मुआवजा नहीं, सच्चाई भी सामने आए
बचे हुए मजदूरों का कहना है कि मृतकों के परिवारों को सहायता मिलना जरूरी है। साथ ही हादसे की वास्तविक वजह भी सामने आनी चाहिए। उनका कहना है कि जांच निष्पक्ष और तकनीकी आधार पर होनी चाहिए।
सिस्टम फेलियर बता रहे ग्रामीण
ग्रामीण सचिन सेंगर का कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और निगरानी के साथ हुआ होता तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती। उनका कहना है कि जिम्मेदारी तय किए बिना केवल इसे हादसा मान लेना उचित नहीं होगा।
जांच में इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे
- मौसम अलर्ट के दौरान साइट पर क्या स्थिति थी?
- क्या काम जारी था?
- निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप थी या नहीं?
- रेत और सीमेंट की गुणवत्ता की जांच हुई थी या नहीं?
- पिलर और संरचना के टूटने की वास्तविक तकनीकी वजह क्या थी?
- सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं?
- जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी?

फोटो 30 एचएएमपी 37- स्टोर परिसर में रखी खराब सीमेंट की बोरियां। संवाद

फोटो 30 एचएएमपी 37- स्टोर परिसर में रखी खराब सीमेंट की बोरियां। संवाद